15 जुलाई 2026
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टीवीके में नेताओं का आना विचारधारा से प्रेरित, हॉर्स-ट्रेडिंग नहीं: कानून मंत्री आर. निर्मलकुमार

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टीवीके में नेताओं का आना विचारधारा से प्रेरित, हॉर्स-ट्रेडिंग नहीं: कानून मंत्री आर. निर्मलकुमार

सारांश

टीवीके के कानून मंत्री आर. निर्मलकुमार ने साफ कहा — पार्टी में आने वाले नेता विचारधारा से आ रहे हैं, किसी प्रलोभन से नहीं। DMK और AIADMK में नेतृत्व से मोहभंग के बीच टीवीके का विस्तार तमिलनाडु की राजनीति में नई करवट का संकेत दे रहा है।

मुख्य बातें

तमिलनाडु के कानून मंत्री आर.
निर्मलकुमार ने 14 जुलाई 2026 को चेन्नई में टीवीके पर हॉर्स-ट्रेडिंग के आरोप पूरी तरह नकारे।
उन्होंने कहा कि DMK और AIADMK के नेता अपने दल के नेतृत्व से निराश होकर स्वेच्छा से टीवीके में शामिल हो रहे हैं।
DMK संगठन सचिव आरएस भारती की CBI शिकायत को निर्मलकुमार ने 'टाइमपास' करार दिया।
AIADMK का संगठनात्मक प्रभाव अब केवल तमिलनाडु के कुछ दक्षिणी जिलों तक सीमित रह गया है — निर्मलकुमार का दावा।
राज्य सरकार की दो-भाषा नीति में कोई बदलाव नहीं; पार्टी फंड मामलों की जाँच जारी।

तमिलनाडु के कानून मंत्री और तमिलगा वेत्री कझगम (टीवीके) के संयुक्त महासचिव आर. निर्मलकुमार ने 14 जुलाई 2026 को चेन्नई में पत्रकारों से बातचीत करते हुए यह आरोप पूरी तरह नकार दिया कि टीवीके अन्य दलों के नेताओं को प्रलोभन देकर अपने पाले में खींच रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी में शामिल होने वाले नेता किसी लालच से नहीं, बल्कि अपनी राजनीतिक आस्था और वैचारिक सहमति के आधार पर यह कदम उठा रहे हैं।

हॉर्स-ट्रेडिंग का आरोप — निर्मलकुमार का जवाब

निर्मलकुमार ने हॉर्स-ट्रेडिंग की परिभाषा स्पष्ट करते हुए कहा, "हॉर्स-ट्रेडिंग का अर्थ है — चुने हुए जनप्रतिनिधियों को पैसे या अन्य प्रलोभन देकर दल बदलवाना। यदि कोई नेता एमके स्टालिन या एडप्पादी के. पलानीस्वामी के नेतृत्व में आस्था खो देता है और किसी नई राजनीतिक राह पर चलने का निर्णय लेता है, तो यह उसका व्यक्तिगत फैसला है — हॉर्स-ट्रेडिंग नहीं।"

उन्होंने यह भी दावा किया कि टीवीके ने किसी भी दल के किसी नेता को सक्रिय रूप से संपर्क नहीं किया है और न ही उन्हें मनाने की कोशिश की है। उनके शब्दों में, "हमने किसी को आमंत्रित नहीं किया। जो नेता स्वयं इस्तीफा देकर टीवीके से जुड़ना चाहते हैं, उन्हें हम कैसे मना करें?"

डीएमके और एआईएडीएमके नेताओं की नाराज़गी

निर्मलकुमार के अनुसार, द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) और अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (AIADMK) के कई नेता अपने-अपने दल के शीर्ष नेतृत्व से मोहभंग के कारण पार्टी छोड़ने का स्वैच्छिक निर्णय ले रहे हैं। उन्होंने इसे राजनीतिक दल-बदल की श्रेणी में रखने से इनकार किया।

यह ऐसे समय में आया है जब तमिलनाडु की राजनीति में टीवीके — जो मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की पार्टी है — तेज़ी से अपना संगठनात्मक विस्तार कर रही है और विपक्षी खेमों में हलचल मची हुई है।

विपक्ष पर पलटवार — सेंथिलबालाजी और सीबीआई शिकायत

हॉर्स-ट्रेडिंग के आरोपों को पलटते हुए निर्मलकुमार ने कहा कि ऐसे आरोप पूर्व मंत्री वी. सेंथिलबालाजी और उनके समर्थकों पर अधिक लागू होते हैं।

उन्होंने DMK के संगठन सचिव आरएस भारती द्वारा कथित विधायकों की खरीद-फरोख्त को लेकर CBI को दी गई शिकायत को भी खारिज किया और इसे महज "टाइमपास" करार दिया।

एआईएडीएमके की कमज़ोर होती पकड़

निर्मलकुमार ने दावा किया कि विधानसभा चुनावों के बाद AIADMK का संगठनात्मक ढाँचा काफी कमज़ोर पड़ गया है और पार्टी का प्रभाव अब तमिलनाडु के केवल कुछ दक्षिणी जिलों तक सिमट गया है।

उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा, "कुछ दक्षिणी जिलों को छोड़ दें तो पार्टी का संगठनात्मक नेटवर्क लगभग खत्म हो चुका है। पार्टी के कई कार्यकर्ताओं को तो यह भी याद नहीं कि उनका कोई महासचिव भी है।"

भविष्य के संभावित राजनीतिक समीकरणों पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि AIADMK के पूर्व मंत्री केटी राजेंद्र बालाजी और DMK मंत्री अनीता आर. राधाकृष्णन आगे चलकर DMK-AIADMK गठबंधन के समन्वयक भी बन सकते हैं — यह टिप्पणी राजनीतिक गलियारों में चल रही अटकलों पर सीधा कटाक्ष थी।

शासन और अन्य मुद्दे

शासन से जुड़े सवालों पर निर्मलकुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय से मिलने के इच्छुक लोग मुख्यमंत्री कार्यालय के ज़रिए अपॉइंटमेंट ले सकते हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य सरकार की दो-भाषा नीति में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

पार्टी फंड से जुड़ी शिकायतों पर उन्होंने कहा कि मामलों की जाँच जारी है और जहाँ आवश्यक होगा, उचित कार्रवाई की जाएगी। तमिलनाडु की राजनीति में टीवीके के बढ़ते कदमों और विपक्षी दलों में जारी उथल-पुथल के बीच यह बयान आने वाले समय में दलों के पुनर्गठन की दिशा तय कर सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

आक्रामक अधिक है — और यही इसकी असली राजनीतिक चाल है। टीवीके यह स्थापित करना चाहती है कि वह तमिलनाडु की परंपरागत द्रविड़ राजनीति के विकल्प के रूप में उभर रही है, न कि महज एक और अवसरवादी खिलाड़ी के रूप में। लेकिन 'विचारधारा' और 'प्रलोभन' के बीच की रेखा तमिलनाडु की राजनीति में हमेशा धुंधली रही है — और बिना पारदर्शी प्रक्रिया के, यह दावा केवल जुबानी जमाखर्च बनकर रह सकता है। AIADMK की कमज़ोरी पर जोर देना टीवीके की रणनीतिक ज़रूरत है, लेकिन असली परीक्षा तब होगी जब ये नए सदस्य चुनावी मैदान में उतरेंगे।
RashtraPress
15 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

टीवीके पर हॉर्स-ट्रेडिंग का आरोप क्या है और निर्मलकुमार ने क्या कहा?
आरोप यह है कि तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) अन्य दलों के नेताओं को प्रलोभन देकर अपने साथ जोड़ रही है। कानून मंत्री आर. निर्मलकुमार ने 14 जुलाई 2026 को इसे सिरे से खारिज करते हुए कहा कि नेता विचारधारा और वैचारिक सहमति के आधार पर टीवीके से जुड़ रहे हैं, किसी लालच से नहीं।
DMK और AIADMK के नेता टीवीके में क्यों शामिल हो रहे हैं?
निर्मलकुमार के अनुसार, DMK और AIADMK के कई नेता अपने-अपने दल के शीर्ष नेतृत्व से मोहभंग के कारण स्वेच्छा से पार्टी छोड़ रहे हैं और टीवीके की ओर रुख कर रहे हैं। उन्होंने इसे व्यक्तिगत राजनीतिक निर्णय बताया।
आरएस भारती की सीबीआई शिकायत पर टीवीके का क्या रुख है?
निर्मलकुमार ने DMK संगठन सचिव आरएस भारती द्वारा कथित विधायकों की खरीद-फरोख्त को लेकर CBI को दी गई शिकायत को 'टाइमपास' करार दिया। उन्होंने इसे राजनीतिक रूप से प्रेरित कदम बताया।
AIADMK की वर्तमान स्थिति के बारे में निर्मलकुमार ने क्या कहा?
निर्मलकुमार ने दावा किया कि विधानसभा चुनावों के बाद AIADMK का संगठनात्मक नेटवर्क बड़े पैमाने पर कमज़ोर हो गया है और पार्टी का असर अब केवल तमिलनाडु के कुछ दक्षिणी जिलों तक सीमित रह गया है।
तमिलनाडु की दो-भाषा नीति में कोई बदलाव हुआ है?
नहीं। कानून मंत्री आर. निर्मलकुमार ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार की दो-भाषा नीति में कोई बदलाव नहीं किया गया है। यह नीति पहले की तरह लागू है।
राष्ट्र प्रेस
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