डीके शिवकुमार का तमिलनाडु राज्यपाल पर हमला: TVK को बहुमत साबित करने का मौका न देना अलोकतांत्रिक

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डीके शिवकुमार का तमिलनाडु राज्यपाल पर हमला: TVK को बहुमत साबित करने का मौका न देना अलोकतांत्रिक

सारांश

कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने तमिलनाडु के राज्यपाल अर्लेकर के उस कथित फैसले को अलोकतांत्रिक बताया, जिसमें विजय की TVK को बहुमत साबित करने का मौका नहीं दिया गया। शिवकुमार ने येदियुरप्पा, वाजपेयी और राष्ट्रपतियों नारायणन व कलाम के ऐतिहासिक उदाहरण देकर संवैधानिक परंपरा की याद दिलाई।

मुख्य बातें

डीके शिवकुमार ने 7 मई 2026 को तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर के कथित फैसले को अलोकतांत्रिक बताया।
तमिलगा वेट्री कजगम (TVK) को सरकार बनाने और विधानसभा में बहुमत साबित करने का मौका देने से कथित तौर पर इनकार किया गया।
शिवकुमार ने बीएस येदियुरप्पा , अटल बिहारी वाजपेयी , पूर्व राष्ट्रपति केआर नारायणन और एपीजे अब्दुल कलाम के उदाहरण देकर संवैधानिक परंपरा का हवाला दिया।
उन्होंने कहा कि एक वोट का अंतर भी बहुमत या अल्पमत तय करता है, इसलिए TVK को फ्लोर टेस्ट का मौका मिलना चाहिए।
शिवकुमार ने राज्य की जनता के जनादेश और भावनाओं का सम्मान करने की आवश्यकता पर बल दिया।

कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री और राज्य कांग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार ने 7 मई 2026 को तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर के उस कथित फैसले की कड़ी आलोचना की, जिसमें अभिनेता विजय के नेतृत्व वाली पार्टी तमिलगा वेट्री कजगम (TVK) को सरकार बनाने और तमिलनाडु विधानसभा में बहुमत साबित करने का अवसर देने से इनकार किया गया। बेंगलुरु के विधान सौधा में पत्रकारों से बात करते हुए शिवकुमार ने इस कदम को सीधे तौर पर अलोकतांत्रिक करार दिया।

शिवकुमार का मुख्य तर्क

शिवकुमार ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि राज्यपाल के पास किसी भी पार्टी को सरकार बनाने के दावे से रोकने का संवैधानिक अधिकार नहीं है, यदि उस पार्टी के पास बहुमत का दावा हो। उन्होंने कहा,

संपादकीय दृष्टिकोण

राज्यपालों पर सत्तारूढ़ दल के इशारे पर काम करने के आरोप लगते रहे हैं। शिवकुमार का TVK के पक्ष में खड़ा होना स्वाभाविक रूप से कांग्रेस की व्यापक विपक्षी एकजुटता की रणनीति का हिस्सा है, जो भाजपा-शासित राज्यपालों के खिलाफ गैर-भाजपा दलों को एक मंच पर लाने की कोशिश करती है। हालाँकि, असली संवैधानिक सवाल यह है कि क्या राज्यपाल के पास बहुमत दावे को खारिज करने का विवेकाधिकार है — सर्वोच्च न्यायालय के कई फैसले इस अधिकार को सीमित करते हैं। मुख्यधारा की कवरेज इस राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप में उलझ जाती है, जबकि ज़रूरत इस बात की जाँच की है कि TVK के पास वास्तव में संख्याबल है या नहीं।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तमिलनाडु के राज्यपाल ने TVK को बहुमत साबित करने का मौका क्यों नहीं दिया?
राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर ने कथित तौर पर तमिलगा वेट्री कजगम को सरकार बनाने और विधानसभा में फ्लोर टेस्ट का मौका देने से इनकार कर दिया। राज्यपाल के इस फैसले के विस्तृत कारण सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं किए गए हैं।
डीके शिवकुमार ने राज्यपाल के फैसले को अलोकतांत्रिक क्यों बताया?
शिवकुमार का तर्क है कि संवैधानिक परंपरा के अनुसार राज्यपाल को सबसे बड़ी पार्टी या बहुमत का दावा करने वाली पार्टी को सरकार बनाने का अवसर देना होता है। उन्होंने येदियुरप्पा, वाजपेयी और राष्ट्रपतियों नारायणन व कलाम के उदाहरण देकर यह स्थापित करने की कोशिश की कि यह लोकतांत्रिक मानदंड है।
तमिलगा वेट्री कजगम (TVK) क्या है और इसका नेतृत्व कौन करता है?
तमिलगा वेट्री कजगम एक तमिलनाडु-आधारित राजनीतिक दल है जिसका नेतृत्व अभिनेता विजय करते हैं। यह पार्टी हाल के तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में एक प्रमुख दावेदार के रूप में उभरी है।
क्या राज्यपाल के पास किसी पार्टी को सरकार बनाने से रोकने का अधिकार है?
संवैधानिक विशेषज्ञों और सर्वोच्च न्यायालय के कई फैसलों के अनुसार राज्यपाल का विवेकाधिकार सीमित है और उन्हें बहुमत का दावा करने वाली पार्टी को फ्लोर टेस्ट का अवसर देना चाहिए। शिवकुमार ने भी इसी संवैधानिक परंपरा का हवाला दिया।
इस विवाद का तमिलनाडु की राजनीति पर क्या असर पड़ सकता है?
यदि TVK को बहुमत साबित करने का मौका नहीं मिलता, तो यह राज्य में राजनीतिक अस्थिरता और कानूनी विवाद को जन्म दे सकता है। यह मामला राज्यपाल की संवैधानिक भूमिका पर राष्ट्रीय बहस को भी तेज कर सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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