तमिलनाडु विधानसभा अध्यक्ष ने टीवीके विधायक करुप्पैया की जल्लीकट्टू टिप्पणियाँ रिकॉर्ड से हटाईं
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु विधानसभा के अध्यक्ष जेसीडी प्रभाकर ने 31 अगस्त 2026 को सत्तारूढ़ तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) के विधायक करुप्पैया की जल्लीकट्टू संबंधी विवादास्पद टिप्पणियों को सदन की आधिकारिक कार्यवाही से हटाने का आदेश दिया। शोलावंदन विधानसभा क्षेत्र के विधायक करुप्पैया की ये टिप्पणियाँ पिछले गुरुवार को सदन में की गई थीं, जिसके बाद राजनीतिक विवाद तेज़ हो गया।
विवाद की पृष्ठभूमि
करुप्पैया ने विधानसभा में अपने भाषण के दौरान जल्लीकट्टू के आयोजन स्थल और आवृत्ति को लेकर टिप्पणियाँ की थीं। उन्होंने स्पेन जैसे यूरोपीय देशों में बुलफाइटिंग के लिए बने स्थायी स्टेडियम की तर्ज पर जल्लीकट्टू के स्थायी आयोजन की प्रथा पर सवाल उठाए थे। विधायक ने यह भी कहा था कि पिछली द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) सरकार के कार्यकाल में अलंगनल्लूर और पलामेडु की पारंपरिक प्रतियोगिताओं के अलावा बार-बार जल्लीकट्टू कार्यक्रम आयोजित किए गए।
करुप्पैया के अनुसार, इन आयोजनों के कारण कुछ स्कूल और कॉलेज के छात्र पढ़ाई छोड़कर प्रतियोगिताओं में भाग लेने लगे — और उनका भाषण युवाओं को शिक्षा की ओर प्रेरित करने के उद्देश्य से था।
राजनीतिक प्रतिक्रिया
इन टिप्पणियों की अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कझगम (AIADMK) और अम्मा मक्कल मुनेत्र कझगम (AMMK) सहित कई दलों ने तीखी निंदा की। AIADMK ने 3 सितंबर को विरोध प्रदर्शन की घोषणा करते हुए करुप्पैया पर तमिल संस्कृति और परंपराओं से गहराई से जुड़े जल्लीकट्टू का अपमान करने का आरोप लगाया। पारंपरिक खेल से जुड़े संगठनों और कार्यकर्ताओं के बढ़ते दबाव के बीच यह मामला राजनीतिक रूप से और अधिक संवेदनशील हो गया।
विधायक का स्पष्टीकरण और खेद
विवाद गहराने के बाद करुप्पैया ने अपने बयान की व्याख्या के तरीके पर खेद व्यक्त किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका इरादा जल्लीकट्टू को कमतर आंकना या तमिल शौर्य के प्रतीक के रूप में इसके महत्व पर सवाल उठाना कतई नहीं था। विधायक ने कहा कि उनकी चिंता जल्लीकट्टू के प्रति नहीं, बल्कि युवा पीढ़ी की शिक्षा के प्रति थी।
करुप्पैया ने यह भी कहा कि यदि उनके शब्दों से युवाओं, जल्लीकट्टू समर्थकों या व्यापक तमिल समुदाय की भावनाएँ आहत हुई हैं, तो वह इसके लिए क्षमाप्रार्थी हैं। उन्होंने दोहराया कि वह चाहते हैं कि छात्र अपनी शिक्षा पूरी करें, डिग्री हासिल करें और एक बेहतर भविष्य सुरक्षित करें।
अध्यक्ष का निर्णय और आगे की राह
विधानसभा अध्यक्ष जेसीडी प्रभाकर का यह फैसला राजनीतिक दबाव और सांस्कृतिक संवेदनशीलता दोनों को ध्यान में रखते हुए आया है। गौरतलब है कि जल्लीकट्टू तमिलनाडु में पोंगल पर्व के दौरान विशेष रूप से अलंगनल्लूर और पलामेडु में आयोजित होने वाला परंपरागत खेल है, जो 2017 में पशु-अधिकार समूहों द्वारा लगाए गए प्रतिबंध के बाद बड़े जन-आंदोलन का केंद्र बन चुका है। AIADMK के 3 सितंबर के प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन के मद्देनज़र यह विवाद आने वाले दिनों में और राजनीतिक रंग ले सकता है।