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एनएम-आईसीपीएस मिशन ने विकसित कीं 1,146 प्रौद्योगिकियाँ, 2.46 लाख से अधिक पेशेवरों को मिला प्रशिक्षण

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एनएम-आईसीपीएस मिशन ने विकसित कीं 1,146 प्रौद्योगिकियाँ, 2.46 लाख से अधिक पेशेवरों को मिला प्रशिक्षण

सारांश

केंद्र सरकार का एनएम-आईसीपीएस मिशन अब केवल नीति-दस्तावेज़ नहीं रहा — आँकड़े बोलते हैं। 1,146 प्रौद्योगिकियाँ, 2.46 लाख प्रशिक्षित पेशेवर, 1,136 स्टार्टअप और 24,000 से अधिक नौकरियाँ — यह भारत की साइबर-फिजिकल महत्वाकांक्षा की ठोस ज़मीन है।

मुख्य बातें

एनएम-आईसीपीएस ने अब तक 1,146 प्रौद्योगिकियाँ विकसित कीं और 1,329 प्रौद्योगिकी उत्पाद तैयार किए।
2.46 लाख से अधिक पेशेवरों को मिशन के तहत कौशल प्रशिक्षण प्रदान किया गया।
चाणक्य फेलोशिप कार्यक्रम के तहत 5,824 फेलोशिप स्नातक से पोस्ट-डॉक्टोरल स्तर तक दी गईं।
मिशन ने 1,136 स्टार्टअप और स्पिन-ऑफ कंपनियाँ इनक्यूबेट कीं, जिससे 24,000 से अधिक रोज़गार सृजित हुए।
देशभर के प्रमुख संस्थानों में 25 टेक्नोलॉजी इनोवेशन हब स्थापित किए गए हैं।

केंद्र सरकार के राष्ट्रीय अंतरविषयी साइबर-फिजिकल सिस्टम मिशन (एनएम-आईसीपीएस) ने भारत में उभरती प्रौद्योगिकियों के नवाचार और कौशल विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ दर्ज की हैं। 31 अगस्त को जारी एक आधिकारिक फैक्टशीट के अनुसार, इस मिशन ने अब तक 1,146 प्रौद्योगिकियों के विकास को सक्षम बनाया है और कृषि, स्वास्थ्य सेवा, खनन, साइबर सुरक्षा, उन्नत संचार तथा पोजिशनिंग जैसे क्षेत्रों में 1,329 प्रौद्योगिकी उत्पादों के निर्माण में योगदान दिया है। इससे भी महत्वपूर्ण यह है कि मिशन के तहत 2.46 लाख से अधिक पेशेवरों को प्रशिक्षण प्रदान किया जा चुका है।

मिशन की संरचना और कार्यप्रणाली

एनएम-आईसीपीएस, टेक्नोलॉजी इनोवेशन हब (टीआईएच) और ट्रांसलेशनल रिसर्च पार्क (टीटीआरपी) के माध्यम से प्रौद्योगिकी, प्रतिभा और उद्यमिता को एक साझा ढाँचे में एकीकृत कर रहा है। मिशन का उद्देश्य अनुसंधान एवं विकास से लेकर उत्पाद निर्माण और स्टार्टअप स्थापना तक पूरे नवाचार चक्र को कवर करना है। इसके साथ ही बौद्धिक संपदा के निर्माण और लाइसेंसिंग को भी प्रोत्साहन दिया जा रहा है।

सरकार ने देशभर के प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों में 25 टेक्नोलॉजी इनोवेशन हब स्थापित किए हैं। सेक्शन-8 कंपनियों के रूप में पंजीकृत ये हब चार प्रमुख क्षेत्रों — प्रौद्योगिकी विकास, मानव संसाधन एवं कौशल विकास, नवाचार व स्टार्टअप संवर्धन, तथा अंतरराष्ट्रीय सहयोग — पर केंद्रित हैं।

चाणक्य फेलोशिप और मानव संसाधन विकास

फैक्टशीट के अनुसार, मानव संसाधन विकास में चाणक्य फेलोशिप कार्यक्रम अहम भूमिका निभा रहा है। यह कार्यक्रम साइबर-फिजिकल सिस्टम से जुड़ी वास्तविक चुनौतियों के समाधान हेतु परियोजनाओं को वित्तीय सहायता प्रदान करता है। अब तक स्नातक, स्नातकोत्तर, पीएचडी और पोस्ट-डॉक्टोरल शोधार्थियों को 5,824 फेलोशिप प्रदान की जा चुकी हैं।

गौरतलब है कि यह मिशन शिक्षा जगत, उद्योग, सरकार और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को एक साझा मंच पर लाता है, ताकि वैज्ञानिक अनुसंधान को राष्ट्रीय आवश्यकताओं और उभरते बाजार अवसरों से जोड़ा जा सके।

स्टार्टअप इकोसिस्टम और रोज़गार सृजन

अनुसंधान-आधारित नवाचारों को व्यावसायिक स्तर तक पहुँचाने के उद्देश्य से एनएम-आईसीपीएस ने अब तक 1,136 स्टार्टअप और स्पिन-ऑफ कंपनियों को इनक्यूबेट किया है। इन पहलों के माध्यम से 24,000 से अधिक रोज़गार सृजित हुए हैं — जो मिशन की आर्थिक प्रासंगिकता को रेखांकित करता है।

यह ऐसे समय में आया है जब भारत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्वचालन और साइबर-फिजिकल सिस्टम जैसी उभरती तकनीकों में वैश्विक प्रतिस्पर्धा में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।

आगे की राह

सरकार का मानना है कि एनएम-आईसीपीएस भारत को साइबर-फिजिकल सिस्टम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), स्वचालन और अन्य उभरती तकनीकों में वैश्विक नेतृत्व की दिशा में आगे ले जाने में सहायक होगा। मिशन का दीर्घकालिक लक्ष्य एक ऐसा राष्ट्रीय ढाँचा तैयार करना है जो शोध से उत्पाद और उत्पाद से बाज़ार तक की यात्रा को निर्बाध बनाए।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि 1,146 विकसित प्रौद्योगिकियों में से कितनी बाज़ार में पहुँचीं और कितनी प्रयोगशाला की दीवारों तक सीमित रहीं। 24,000 रोज़गार का आँकड़ा उत्साहजनक है, पर 2.46 लाख प्रशिक्षित पेशेवरों की तुलना में यह अनुपात अभी भी कम दिखता है — जो प्रशिक्षण और वास्तविक नियोजन के बीच की खाई को उजागर करता है। भारत को AI और साइबर-फिजिकल क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व तभी मिलेगा जब इनोवेशन हब केवल इनक्यूबेशन केंद्र न रहें, बल्कि स्केलेबल उद्योग-भागीदारी का मंच बनें।
RashtraPress
31 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एनएम-आईसीपीएस मिशन क्या है?
राष्ट्रीय अंतरविषयी साइबर-फिजिकल सिस्टम मिशन (एनएम-आईसीपीएस) केंद्र सरकार की एक प्रमुख पहल है जो भारत में साइबर-फिजिकल सिस्टम आधारित अनुसंधान, नवाचार और अनुप्रयोगों को बढ़ावा देती है। यह मिशन शिक्षा, उद्योग, सरकार और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को एकजुट कर वैज्ञानिक शोध को बाज़ार तक पहुँचाने का काम करता है।
एनएम-आईसीपीएस ने अब तक कितनी प्रौद्योगिकियाँ विकसित की हैं?
आधिकारिक फैक्टशीट के अनुसार, मिशन ने अब तक 1,146 प्रौद्योगिकियों के विकास को सक्षम बनाया है और 1,329 प्रौद्योगिकी उत्पाद तैयार किए हैं। ये उत्पाद कृषि, स्वास्थ्य सेवा, खनन, साइबर सुरक्षा और उन्नत संचार जैसे क्षेत्रों में उपयोगी हैं।
चाणक्य फेलोशिप कार्यक्रम क्या है और इससे किसे लाभ मिलता है?
चाणक्य फेलोशिप कार्यक्रम एनएम-आईसीपीएस के तहत चलाई जाने वाली एक वित्तीय सहायता योजना है, जो साइबर-फिजिकल सिस्टम से जुड़ी वास्तविक चुनौतियों पर काम करने वाले शोधार्थियों को अनुदान देती है। अब तक स्नातक, स्नातकोत्तर, पीएचडी और पोस्ट-डॉक्टोरल स्तर पर 5,824 फेलोशिप प्रदान की जा चुकी हैं।
मिशन के तहत कितने स्टार्टअप और रोज़गार सृजित हुए हैं?
एनएम-आईसीपीएस ने अब तक 1,136 स्टार्टअप और स्पिन-ऑफ कंपनियों को इनक्यूबेट किया है, जिनके माध्यम से 24,000 से अधिक रोज़गार सृजित हुए हैं। ये स्टार्टअप टेक्नोलॉजी इनोवेशन हब के ज़रिए समर्थित हैं।
टेक्नोलॉजी इनोवेशन हब कहाँ स्थापित किए गए हैं और इनका काम क्या है?
सरकार ने देशभर के प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों में 25 टेक्नोलॉजी इनोवेशन हब स्थापित किए हैं, जो सेक्शन-8 कंपनियों के रूप में पंजीकृत हैं। ये हब प्रौद्योगिकी विकास, कौशल उन्नयन, स्टार्टअप संवर्धन और अंतरराष्ट्रीय सहयोग — चार प्रमुख क्षेत्रों पर कार्य करते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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