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NBEMS के 23वें दीक्षांत समारोह में जेपी नड्डा बोले — स्वस्थ भारत ही विकसित भारत 2047 की असली नींव

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NBEMS के 23वें दीक्षांत समारोह में जेपी नड्डा बोले — स्वस्थ भारत ही विकसित भारत 2047 की असली नींव

सारांश

जेपी नड्डा ने NBEMS के 23वें दीक्षांत समारोह में साफ कहा — डॉक्टर स्वास्थ्य तंत्र का 'असली सॉफ्टवेयर' हैं। 11 नए पाठ्यक्रम लॉन्च हुए, ₹15,000 करोड़ मंजूर हुए और मेडिकल कॉलेजों की संख्या 387 से 818 पहुंची। विकसित भारत 2047 की राह स्वास्थ्य से होकर गुजरती है।

मुख्य बातें

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने 23 मई 2025 को नई दिल्ली में NBEMS के 23वें दीक्षांत समारोह को संबोधित किया।
समारोह में 11 नए शैक्षणिक पाठ्यक्रमों का शुभारंभ किया गया, जो विशेष चिकित्सा शिक्षा को मजबूत करने के लिए तैयार हैं।
देश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या 387 से बढ़कर 818 हुई; स्नातकोत्तर सीटें 31,000 से बढ़कर 85,000 के करीब पहुंचीं।
PM मोदी ने अगले पाँच वर्षों में 75,000 नई चिकित्सा सीटें जोड़ने की घोषणा की है; 23,000 सीटें दो वर्षों में पहले ही स्थापित।
सरकारी मेडिकल कॉलेजों के उन्नयन के लिए 2026-2029 हेतु ₹15,000 करोड़ स्वीकृत।
देश में एम्स की कुल संख्या अब 23 हो गई है, जिनमें से 16 नए एम्स हाल के वर्षों में स्थापित।

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने 23 मई 2025 को नई दिल्ली में राष्ट्रीय चिकित्सा विज्ञान परीक्षा बोर्ड (NBEMS) के 23वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि एक स्वस्थ भारत ही विकसित भारत 2047 के स्वप्न की आधारशिला है। उन्होंने स्नातक हो रहे चिकित्सा विशेषज्ञों को राष्ट्र की स्वास्थ्य सेवा प्रणाली का 'असली सॉफ्टवेयर' बताते हुए करुणा, ईमानदारी और आजीवन सीखने की प्रतिबद्धता का आह्वान किया।

दीक्षांत समारोह का महत्व

नड्डा ने कहा कि यह आयोजन केवल उपाधि वितरण का अवसर नहीं, बल्कि छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों के वर्षों के समर्पण और परिश्रम का उत्सव है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि स्नातक होने वाले प्रत्येक डॉक्टर की सफलता से जुड़े परिवार, मार्गदर्शक और संस्थान सभी इस गौरव के साझेदार हैं। उनके अनुसार, इन युवा विशेषज्ञों की प्रतिबद्धता और नवाचार देश भर में स्वास्थ्य सेवा वितरण को सशक्त बनाएंगे।

NBEMS की बढ़ती साख और 11 नए पाठ्यक्रम

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने संतोष व्यक्त किया कि NBEMS की योग्यताएं आज चिकित्सा शिक्षा में गुणवत्ता और विश्वसनीयता का राष्ट्रीय प्रतीक बन चुकी हैं। इस अवसर पर उन्होंने 11 नए शैक्षणिक पाठ्यक्रमों का शुभारंभ किया, जो विशेष स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने और रोगी देखभाल की गुणवत्ता बढ़ाने के उद्देश्य से तैयार किए गए हैं। NBEMS पाठ्यक्रम संचालित करने वाले संस्थानों में 'वन नेशन वन सब्सक्रिप्शन' (ONOS) पहल के क्रियान्वयन की भी प्रशंसा की गई, जिससे छात्रों और शिक्षकों को शैक्षणिक संसाधनों तक व्यापक पहुंच सुनिश्चित हो रही है।

चिकित्सा शिक्षा का अभूतपूर्व विस्तार

नड्डा ने पिछले एक दशक में चिकित्सा शिक्षा के विस्तार के आँकड़े साझा करते हुए बताया कि देश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या 387 से बढ़कर 818 हो गई है। स्नातक चिकित्सा सीटें बढ़कर लगभग 1.28 लाख हो गई हैं, जबकि स्नातकोत्तर सीटें लगभग 31,000 से बढ़कर 85,000 के करीब पहुंच गई हैं। उन्होंने यह भी बताया कि 20वीं शताब्दी के अंत तक देश में केवल एक एम्स था; पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में छह अतिरिक्त एम्स स्थापित हुए और तब से अब तक 16 नए एम्स जुड़ चुके हैं, जिससे देश भर में इनकी कुल संख्या 23 हो गई है।

उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अगले पाँच वर्षों में स्नातक और स्नातकोत्तर चिकित्सा सीटों में 75,000 की वृद्धि की घोषणा की है, जिनमें से लगभग 23,000 सीटें पिछले दो वर्षों में ही स्थापित हो चुकी हैं। सरकारी मेडिकल कॉलेजों के बुनियादी ढाँचे को सुदृढ़ करने के लिए 2026 से 2029 की अवधि हेतु लगभग ₹15,000 करोड़ स्वीकृत किए गए हैं।

स्वास्थ्य नीति और समग्र दृष्टिकोण

नड्डा ने कहा कि स्वास्थ्य सेवा का दायरा केवल भौतिक बुनियादी ढाँचे तक सीमित नहीं है — कुशल और दयालु डॉक्टर ही इस तंत्र की रीढ़ हैं। उन्होंने गैर-संक्रामक रोगों (NCD) के बढ़ते बोझ पर चिंता जताते हुए स्वास्थ्य पेशेवरों से नागरिकों में जागरूकता और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने का आह्वान किया। उन्होंने निवारक और संवर्धक स्वास्थ्य सेवाओं को उपचारात्मक देखभाल के साथ-साथ प्राथमिकता देने पर भी जोर दिया।

युवा डॉक्टरों के लिए संदेश

समारोह के समापन में नड्डा ने स्नातक चिकित्सकों से आग्रह किया कि वे अपने पूरे पेशेवर जीवन में सीखने की जिज्ञासा बनाए रखें। उन्होंने प्रभावी संचार कौशल को रोगी देखभाल का अनिवार्य हिस्सा बताया और युवा विशेषज्ञों को चिकित्सा शिक्षण तथा अकादमिक क्षेत्र में योगदान देने के लिए प्रेरित किया। सरकार का ध्यान अब सभी एम्स संस्थानों को एम्स नई दिल्ली के मानकों के अनुरूप उन्नत करने और उन्हें देश के अन्य मेडिकल कॉलेजों के लिए मार्गदर्शक केंद्र बनाने पर है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल मात्रा से आगे गुणवत्ता का है — क्या नए संस्थान एम्स नई दिल्ली जैसे मानकों तक पहुंच पाएंगे, या केवल सीटें भरेंगे? NCD का बढ़ता बोझ और ग्रामीण क्षेत्रों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी यह बताती है कि संख्याओं की सफलता तब तक अधूरी है जब तक वितरण न्यायसंगत न हो। ₹15,000 करोड़ का आवंटन सराहनीय है, पर इसका वास्तविक असर क्रियान्वयन की गति और जवाबदेही तंत्र पर निर्भर करेगा।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

NBEMS का 23वां दीक्षांत समारोह कहाँ और कब हुआ?
यह समारोह 23 मई 2025 को नई दिल्ली में आयोजित किया गया। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने मुख्य अतिथि के रूप में इसे संबोधित किया और 11 नए शैक्षणिक पाठ्यक्रमों का शुभारंभ किया।
NBEMS क्या है और यह किसके अधीन काम करता है?
NBEMS यानी राष्ट्रीय चिकित्सा विज्ञान परीक्षा बोर्ड, केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अधीन एक स्वायत्त निकाय है। यह स्नातकोत्तर चिकित्सा योग्यताएं प्रदान करता है और रोगी देखभाल तथा पेशेवर उत्कृष्टता के लिए प्रतिबद्ध विशेषज्ञ तैयार करता है।
भारत में मेडिकल कॉलेजों और सीटों की संख्या कितनी बढ़ी है?
देश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या 387 से बढ़कर 818 हो गई है। स्नातक सीटें लगभग 1.28 लाख और स्नातकोत्तर सीटें लगभग 31,000 से बढ़कर 85,000 के करीब पहुंच गई हैं। PM मोदी ने अगले पाँच वर्षों में 75,000 और सीटें जोड़ने की घोषणा की है।
सरकार ने मेडिकल शिक्षा के लिए कितना बजट मंजूर किया है?
सरकार ने 2026 से 2029 की अवधि के लिए सरकारी मेडिकल कॉलेजों के बुनियादी ढाँचे और गुणवत्ता मानकों को मजबूत करने हेतु लगभग ₹15,000 करोड़ स्वीकृत किए हैं। इसके अतिरिक्त, पिछले दो वर्षों में ही लगभग 23,000 नई सीटें स्थापित की जा चुकी हैं।
विकसित भारत 2047 में स्वास्थ्य क्षेत्र की क्या भूमिका है?
जेपी नड्डा के अनुसार, एक स्वस्थ भारत ही विकसित और आत्मनिर्भर राष्ट्र की नींव है। उन्होंने स्वास्थ्य को राष्ट्रीय प्रगति और सतत विकास का प्रमुख स्तंभ बताते हुए कहा कि मजबूत स्वास्थ्य प्रणाली के बिना 2047 का विकसित भारत का लक्ष्य अधूरा रहेगा।
राष्ट्र प्रेस
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