एम्स बठिंडा दीक्षांत समारोह: जेपी नड्डा बोले — स्वस्थ भारत के बिना 'विकसित भारत 2047' अधूरा
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने मंगलवार, 2 जून 2026 को एम्स बठिंडा के दूसरे दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि 'विकसित भारत 2047' का सपना तभी साकार होगा जब देश की आबादी स्वस्थ और कर्मठ हो। उन्होंने नवस्नातक चिकित्सकों को बधाई देते हुए कहा कि डॉक्टर और स्वास्थ्य पेशेवर स्वास्थ्य प्रणाली के 'सॉफ्टवेयर' हैं — बुनियादी ढाँचा महज 'हार्डवेयर' है।
एम्स बठिंडा की उपलब्धियाँ
एम्स बठिंडा आज प्रतिदिन लगभग 3,000 ओपीडी मरीजों और लगभग 600 आईपीडी मरीजों का उपचार कर रहा है। नड्डा ने संस्थान की सामुदायिक पहुँच की सराहना करते हुए बताया कि आसपास के 59 गाँवों में हर महीने दो बार 'आयुष्मान शिविर' आयोजित किए जाते हैं, जहाँ मधुमेह, उच्च रक्तचाप और कैंसर जैसी गैर-संक्रामक बीमारियों की जाँच की जाती है। टेलीमेडिसिन सेवाओं, मोबाइल मेडिकल इकाइयों और ग्रामीण जागरूकता अभियानों के ज़रिए संस्थान अस्पताल-आधारित देखभाल से आगे बढ़कर सार्वजनिक स्वास्थ्य में योगदान दे रहा है।
स्वास्थ्य सेवा का बदलता मॉडल
नड्डा ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत का स्वास्थ्य सेवा दृष्टिकोण 'उपचारात्मक मॉडल' से बदलकर एक व्यापक ढाँचे में परिवर्तित हुआ है, जिसमें निवारक, प्रोत्साहक, पुनर्वास, प्रशामक और बुजुर्गों की देखभाल शामिल है। उन्होंने बताया कि देशभर में 1.82 लाख से अधिक 'आयुष्मान आरोग्य मंदिर' स्वास्थ्य सेवाओं के पहले संपर्क बिंदु के रूप में कार्यरत हैं।
निवारक स्वास्थ्य देखभाल के आँकड़े
सरकार के निवारक स्वास्थ्य अभियान के तहत 30 वर्ष से अधिक आयु के सभी नागरिकों को पंचायतों, आशा कार्यकर्ताओं और फ्रंटलाइन स्वास्थ्य कर्मियों के माध्यम से नियमित जाँच के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। नड्डा के अनुसार अब तक:
• 36 करोड़ से अधिक लोगों की मुँह के कैंसर की जाँच
• 17 करोड़ से अधिक महिलाओं की स्तन कैंसर की जाँच
• 9 करोड़ से अधिक महिलाओं की सर्वाइकल कैंसर की जाँच
• 42 करोड़ से अधिक लोगों की मधुमेह और उच्च रक्तचाप की जाँच की जा चुकी है।
इसके अतिरिक्त देशव्यापी तपेदिक (टीबी) जाँच अभियान भी जारी है।
चिकित्सा शिक्षा का विस्तार
नड्डा ने पिछले एक दशक में चिकित्सा शिक्षा के अभूतपूर्व विस्तार का विवरण दिया। एम्स संस्थानों की संख्या बढ़कर 23 हो गई है। मेडिकल कॉलेज 387 से बढ़कर 820 से अधिक हो गए हैं। यूजी सीटें लगभग 59,000 से बढ़कर 1.28 लाख से अधिक और पीजी सीटें लगभग 31,000 से बढ़कर 86,000 से अधिक हो गई हैं। सरकार अगले पाँच वर्षों में 75,000 अतिरिक्त यूजी-पीजी सीटें जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है, जिनमें से लगभग 23,000 सीटें पिछले दो वर्षों में पहले ही स्थापित हो चुकी हैं।
सार्वजनिक स्वास्थ्य की बड़ी उपलब्धियाँ
नड्डा ने भारत की सार्वजनिक स्वास्थ्य उपलब्धियों का भी उल्लेख किया — 2014 में देश को पोलियो-मुक्त घोषित किया गया और 2015 में मातृ एवं नवजात टिटनेस का उन्मूलन हुआ। उन्होंने बताया कि ट्रेकोमा अब सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए चिंता का विषय नहीं रहा, और काला-अजार, कुष्ठ रोग तथा लिम्फैटिक फाइलेरिया के उन्मूलन की दिशा में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है। एम्स बठिंडा की अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) नीरजा भाटला ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री का स्वागत किया और संस्थान को उनके निरंतर मार्गदर्शन के लिए आभार व्यक्त किया। आने वाले वर्षों में एम्स बठिंडा जैसे संस्थानों की भूमिका और अधिक निर्णायक होगी, जब देश 2047 के विकसित भारत लक्ष्य की ओर बढ़ेगा।