31 अगस्त 2026
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सुकेश चंद्रशेखर की अर्जी पर दिल्ली पुलिस के सवाल, दिल्ली हाईकोर्ट में 3 नवंबर को होगी अगली सुनवाई

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सुकेश चंद्रशेखर की अर्जी पर दिल्ली पुलिस के सवाल, दिल्ली हाईकोर्ट में 3 नवंबर को होगी अगली सुनवाई

सारांश

ठग सुकेश चंद्रशेखर ने 2017 में पुलिस हिरासत से फर्जी सुप्रीम कोर्ट जज बनकर विशेष जज पूनम चौधरी पर जमानत का दबाव बनाया था। निचली अदालत 8 साल की सजा सुना चुकी है। अब दिल्ली हाईकोर्ट में दायर उसकी अर्जी की कानूनी वैधता पर ही सवाल उठ गया है — अगली सुनवाई 3 नवंबर को।

मुख्य बातें

दिल्ली हाईकोर्ट ने 31 अगस्त को सुकेश चंद्रशेखर की अर्जी की मेंटेनेबिलिटी पर नोटिस जारी किया; अगली सुनवाई 3 नवंबर को।
2017 में सुकेश ने पुलिस हिरासत से एक पुलिसकर्मी का फोन इस्तेमाल कर विशेष जज पूनम चौधरी को जमानत देने के लिए दबाव बनाने की कोशिश की थी।
फोन करने वाले ने खुद को पहले सुप्रीम कोर्ट के जज का निजी सचिव, फिर स्वयं जज बताया — जज पूनम चौधरी ने सत्यापन कर शिकायत दर्ज कराई।
निचली अदालत सुकेश को इस मामले में दोषी ठहराते हुए 8 साल की सजा सुना चुकी है।
दिल्ली पुलिस का तर्क है कि दोषसिद्धि और सजा के बाद अर्जी नहीं, बल्कि विधिवत अपील दायर होनी चाहिए।

ठग सुकेश चंद्रशेखर द्वारा दिल्ली हाईकोर्ट में दायर अर्जी पर दिल्ली पुलिस ने कानूनी सवाल उठाए हैं। सोमवार, 31 अगस्त को हुई सुनवाई में अदालत ने अर्जी की मेंटेनेबिलिटी — यानी उसकी कानूनी स्वीकार्यता — पर नोटिस जारी किया और अगली सुनवाई के लिए 3 नवंबर की तारीख निर्धारित की। सुकेश पर आरोप है कि उसने 2017 में खुद को सुप्रीम कोर्ट का जज बताकर एक निचली अदालत की न्यायिक अधिकारी को प्रभावित करने की कोशिश की थी।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला 2017 का है, जब सुकेश चंद्रशेखर एक भ्रष्टाचार मामले में पुलिस हिरासत में था। उसी दौरान उसने एक पुलिसकर्मी के मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर भ्रष्टाचार के मामलों की सुनवाई कर रहीं विशेष जज पूनम चौधरी को फोन किया।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, पहले कॉल करने वाले ने खुद को सुप्रीम कोर्ट के एक जज का निजी सचिव बताया। इसके बाद एक दूसरे व्यक्ति ने सुप्रीम कोर्ट का जज होने का दावा करते हुए जज पूनम चौधरी पर सुकेश को जमानत देने के लिए दबाव बनाने की कोशिश की। फोन करने वाले ने उन्हें एक संपर्क नंबर भी दिया।

जज पूनम चौधरी की सतर्कता

जज पूनम चौधरी इस दबाव में नहीं आईं। उन्होंने दिए गए नंबर पर संपर्क करने के बजाय सुप्रीम कोर्ट के संबंधित जज के कार्यालय से सीधे जानकारी ली। वहाँ से पता चला कि उस जज ने ऐसा कोई फोन नहीं किया था और जिसे उनका निजी सचिव बताया गया, वह व्यक्ति उस कार्यालय में काम भी नहीं करता। इसके बाद जज पूनम चौधरी ने पूरे मामले की शिकायत दर्ज कराई और पुलिस जाँच शुरू हुई।

निचली अदालत का फैसला और सजा

जाँच पूरी होने के बाद सुकेश चंद्रशेखर के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया गया। मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष ने कई गवाह पेश किए। जज पूनम चौधरी ने भी अदालत में गवाही दी और बताया कि किस प्रकार उन्हें फोन कर जमानत देने के लिए प्रभावित करने की कोशिश की गई थी। निचली अदालत ने सुकेश को इस मामले में दोषी ठहराते हुए 8 साल की सजा सुनाई।

दिल्ली पुलिस की आपत्ति

निचली अदालत के फैसले को चुनौती देने के लिए सुकेश ने दिल्ली हाईकोर्ट में अर्जी दायर की। हालाँकि, दिल्ली पुलिस ने इस अर्जी की कानूनी वैधता पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब निचली अदालत दोषसिद्धि का फैसला और सजा दोनों सुना चुकी है, तो सुकेश के लिए अर्जी दाखिल करने के बजाय विधिवत अपील दायर करना उचित कानूनी रास्ता है।

हाईकोर्ट का अगला कदम

दिल्ली हाईकोर्ट ने फिलहाल इस कानूनी सवाल पर कोई अंतिम निर्णय नहीं दिया है। अदालत ने अर्जी की मेंटेनेबिलिटी के मुद्दे पर नोटिस जारी कर मामले की अगली सुनवाई 3 नवंबर के लिए तय की है। इस सुनवाई में यह तय होगा कि सुकेश की अर्जी सुनवाई योग्य है या नहीं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुकेश चंद्रशेखर पर जज को प्रभावित करने का मामला क्या है?
2017 में सुकेश चंद्रशेखर ने पुलिस हिरासत में रहते हुए एक पुलिसकर्मी का फोन इस्तेमाल कर विशेष जज पूनम चौधरी को फोन किया और खुद को सुप्रीम कोर्ट का जज बताकर जमानत देने का दबाव बनाने की कोशिश की। जज पूनम चौधरी ने सत्यापन के बाद शिकायत दर्ज कराई और जाँच शुरू हुई।
निचली अदालत ने सुकेश को इस मामले में क्या सजा दी?
निचली अदालत ने सुकेश चंद्रशेखर को फर्जी सुप्रीम कोर्ट जज बनकर न्यायिक अधिकारी को प्रभावित करने के मामले में दोषी ठहराते हुए 8 साल की सजा सुनाई।
दिल्ली पुलिस ने सुकेश की अर्जी पर क्या सवाल उठाया है?
दिल्ली पुलिस का कहना है कि जब निचली अदालत दोषसिद्धि का फैसला और सजा दोनों सुना चुकी है, तो अर्जी दाखिल करना सही कानूनी रास्ता नहीं है — उसे विधिवत अपील दायर करनी चाहिए। यह मेंटेनेबिलिटी यानी अर्जी की कानूनी स्वीकार्यता का सवाल है।
दिल्ली हाईकोर्ट में अगली सुनवाई कब होगी?
दिल्ली हाईकोर्ट ने अर्जी की मेंटेनेबिलिटी के मुद्दे पर नोटिस जारी कर अगली सुनवाई 3 नवंबर के लिए निर्धारित की है। इस सुनवाई में तय होगा कि सुकेश की अर्जी सुनवाई योग्य है या नहीं।
जज पूनम चौधरी ने फर्जी फोन का पर्दाफाश कैसे किया?
जज पूनम चौधरी ने फोन करने वाले द्वारा दिए गए नंबर पर संपर्क करने के बजाय सुप्रीम कोर्ट के संबंधित जज के कार्यालय से सीधे जानकारी ली। वहाँ से पुष्टि हुई कि कोई ऐसा फोन नहीं किया गया था और कथित निजी सचिव उस कार्यालय में काम नहीं करता, जिसके बाद उन्होंने शिकायत दर्ज कराई।
राष्ट्र प्रेस
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