कोलकाता पुलिस समन पर डेरेक ओ ब्रायन नहीं हुए पेश, अभिषेक बनर्जी को 1 सितंबर तक बुलावा
सारांश
मुख्य बातें
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राज्यसभा सांसद डेरेक ओ ब्रायन सोमवार, 1 सितंबर को शेक्सपियर सरणी पुलिस स्टेशन में पूछताछ के लिए तय समय पर नहीं पहुँचे। यह पूछताछ मध्य कोलकाता के कैमक स्ट्रीट स्थित अभिषेक बनर्जी के पार्टी कार्यालय की छत से एक अवैध बिलबोर्ड हटाने के दौरान हुई हिंसा के सिलसिले में दर्ज एफआईआर के संबंध में होनी थी। इस विवाद ने TMC और कोलकाता पुलिस के बीच एक असामान्य टकराव को जन्म दिया है, जो राज्य की सत्ताधारी पार्टी और उसके ही नियंत्रण वाले प्रशासनिक तंत्र के बीच की है।
समन और अनुपस्थिति का घटनाक्रम
रविवार को शेक्सपियर सरणी पुलिस स्टेशन के पुलिसकर्मी दक्षिण कोलकाता के प्रिंस अनवर शाह रोड पर ओ ब्रायन के आवास पर पहुँचे और उनके सहयोगी को पूछताछ का नोटिस सौंपा। उन्हें सोमवार दोपहर तक पुलिस स्टेशन में उपस्थित होने का निर्देश दिया गया था। ओ ब्रायन ने अपने वकील के माध्यम से पुलिस को एक पत्र भेजकर पेश होने के लिए सात दिन का अतिरिक्त समय माँगा। वकील ने तर्क दिया कि नोटिस अंतिम समय पर मिलने के कारण उनके मुवक्किल को कानूनी सलाह लेने का पर्याप्त अवसर नहीं मिला।
पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पुष्टि की कि ओ ब्रायन को दूसरा नोटिस भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
अभिषेक बनर्जी और सुमित रॉय को भी नोटिस
ओ ब्रायन के अलावा, पुलिस ने TMC के वरिष्ठ नेता और सांसद अभिषेक बनर्जी को 1 सितंबर दोपहर तक तथा उनके निजी सहायक सुमित रॉय को 2 सितंबर दोपहर तक पेश होने का नोटिस जारी किया है। अभिषेक बनर्जी के वकील ने रविवार रात पुलिस को ईमेल कर यह दावा किया कि जिन तीन एफआईआर के आधार पर नोटिस भेजे गए, वे कोलकाता पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध नहीं थीं। हालाँकि, पुलिस ने इस दावे को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि तीनों एफआईआर वेबसाइट पर अपलोड की गई थीं और उनकी प्रतियाँ भी उपलब्ध हैं।
27 अगस्त की हिंसा और एफआईआर
27 अगस्त की दोपहर कोलकाता नगर निगम (KMC) के कर्मचारी पुलिसबल के साथ कैमक स्ट्रीट स्थित अभिषेक बनर्जी के कार्यालय की छत से अवैध बिलबोर्ड हटाने पहुँचे। इस दौरान अभिषेक बनर्जी, डेरेक ओ ब्रायन और अन्य TMC नेताओं के नेतृत्व में पार्टी कार्यकर्ताओं ने कड़ा विरोध किया, जिसके परिणामस्वरूप पुलिसकर्मियों और पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच हाथापाई हुई।
शेक्सपियर सरणी पुलिस स्टेशन में दर्ज तीन एफआईआर में TMC कार्यकर्ताओं पर ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट करने और एक महिला पुलिस अधिकारी की गरिमा को ठेस पहुँचाने का प्रयास करने का आरोप लगाया गया है।
राजनीतिक पहलू और व्यापक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में TMC सरकार और कोलकाता पुलिस के बीच के संबंध सार्वजनिक दृष्टि में आ गए हैं। गौरतलब है कि कोलकाता पुलिस राज्य सरकार के अधीन है, और इस मामले में पार्टी नेताओं के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई एक असामान्य स्थिति को दर्शाती है। आलोचकों का कहना है कि इस विवाद ने प्रशासनिक जवाबदेही और राजनीतिक संरक्षण के सवाल को फिर से केंद्र में ला दिया है।
आगे क्या होगा
अभिषेक बनर्जी की 1 सितंबर को पुलिस के समक्ष उपस्थिति या अनुपस्थिति इस मामले की अगली कड़ी तय करेगी। डेरेक ओ ब्रायन को जारी होने वाला दूसरा नोटिस और उसके बाद की कानूनी प्रक्रिया यह संकेत देगी कि पुलिस इस मामले में कितनी दृढ़ता से आगे बढ़ने का इरादा रखती है।