31 अगस्त 2026
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कोलकाता बाल विवाह मामला: नाबालिग के पिता, पति और सास गिरफ्तार, 'कन्यारत्न योजना' का दुरुपयोग उजागर

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कोलकाता बाल विवाह मामला: नाबालिग के पिता, पति और सास गिरफ्तार, 'कन्यारत्न योजना' का दुरुपयोग उजागर

सारांश

कोलकाता में बाल विवाह का एक मामला उस वक्त और उलझ गया जब पता चला कि लड़की के पिता ने सरकारी 'कन्यारत्न योजना' की राशि पाने के लिए शादी छुपाई। पुलिस ने पिता, पति और सास — तीनों को गिरफ्तार किया; नाबालिग को सुरक्षित निकाला गया।

मुख्य बातें

कोलकाता पुलिस ने 31 अगस्त 2026 को बाल विवाह मामले में तीन लोगों — नाबालिग का पिता, पति और सास — को गिरफ्तार किया।
नाबालिग लड़की दक्षिण 24 परगना की रहने वाली है; करीब डेढ़ महीने पहले वह हरिदेवपुर के एक युवक के साथ घर छोड़ गई थी।
लड़की के पिता ने पश्चिम बंगाल की 'कन्यारत्न शिक्षा अनुदान योजना' की मासिक सहायता राशि पाने के लिए शादी को छुपाए रखा।
पति और सास के खिलाफ पॉक्सो अधिनियम, 2012 की धाराओं के तहत अपहरण और यौन उत्पीड़न का मामला दर्ज।
एक एनजीओ की सूचना पर पुलिस ने कार्रवाई की; नाबालिग को सुरक्षित स्थान पर रखा गया है।

कोलकाता पुलिस ने 31 अगस्त 2026 को बाल विवाह के एक गंभीर मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया — जिनमें नाबालिग लड़की का पिता, उसका पति और सास शामिल हैं। यह मामला तब और संवेदनशील हो गया जब सामने आया कि लड़की के परिवार ने पश्चिम बंगाल सरकार की 'कन्यारत्न शिक्षा अनुदान योजना' के तहत मिलने वाली आर्थिक सहायता हड़पने के लिए शादी को छुपाए रखा।

मामले का घटनाक्रम

पुलिस के अनुसार, नाबालिग लड़की दक्षिण 24 परगना जिले के नोडाखाली इलाके की रहने वाली है। करीब डेढ़ महीने पहले वह कोलकाता के हरिदेवपुर इलाके के एक युवक के साथ घर से चली गई थी। युवक ने उससे शादी की और उसे अपने घर ले आया। पुलिस ने बताया कि युवक की माँ को पहले से पता था कि लड़की 18 वर्ष से कम उम्र की है, फिर भी उसने उसे बहू के रूप में स्वीकार कर लिया।

लड़की के पिता को जब बेटी के ठिकाने का पता चला, तो उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज करने के बजाय ससुराल पक्ष से संपर्क किया और शर्त रखी कि जब तक सरकारी योजना की मासिक सहायता राशि मिलती रहे, उन्हें बेटी के वहाँ रहने पर कोई आपत्ति नहीं है।

कन्यारत्न योजना का दुरुपयोग

पश्चिम बंगाल सरकार की 'कन्यारत्न शिक्षा अनुदान योजना' का उद्देश्य अविवाहित लड़कियों की शिक्षा को प्रोत्साहित करना और बाल विवाह को रोकना है। इस योजना की राशि नाबालिग लड़की के बैंक खाते में सीधे जमा होती थी। योजना का लाभ जारी रखने के लिए लड़की का मायके लौटकर सत्यापन कराना अनिवार्य था। रिपोर्टों के अनुसार, पिता की दबाव डालने की कोशिशों के बावजूद लड़की ने लौटने से इनकार कर दिया।

एनजीओ की सूचना पर पुलिस ने की कार्रवाई

जब लड़की के लौटने से इनकार के कारण योजना का सत्यापन अटक गया, तो पिता ने एक एनजीओ से संपर्क किया और पहली बार स्वीकार किया कि उनकी नाबालिग बेटी की शादी हो चुकी है। एनजीओ के अधिकारियों ने तत्काल हरिदेवपुर पुलिस स्टेशन को सूचित किया। पुलिस की एक टीम ने रविवार को लड़की के ससुराल पहुँचकर उसे सुरक्षित बाहर निकाला और तीनों आरोपियों को हिरासत में ले लिया।

कानूनी कार्रवाई

पुलिस ने पति और सास के खिलाफ बाल विवाह, अपहरण और यौन उत्पीड़न के आरोपों में यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम, 2012 की कड़ी धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। लड़की के पिता को इसलिए गिरफ्तार किया गया क्योंकि उन्होंने डेढ़ महीने तक बेटी के लापता होने या शादी की कोई सूचना पुलिस को नहीं दी और सरकारी सहायता के लिए चुप्पी साधे रखी। अधिकारियों के अनुसार, पिता को भी उन्हीं आरोपों में आरोपी बनाया गया है।

नाबालिग की सुरक्षा

पुलिस ने पुष्टि की है कि नाबालिग लड़की को सुरक्षित स्थान पर रखा गया है। यह मामला उन खामियों को भी उजागर करता है जिनका लाभ उठाकर सरकारी कल्याण योजनाओं का दुरुपयोग किया जा सकता है — विशेष रूप से जब लाभार्थी सत्यापन तंत्र पर्याप्त रूप से सतर्क न हो। आगे की जाँच जारी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इस मामले में वही योजना पिता को चुप रहने की आर्थिक प्रेरणा देती रही। सवाल यह है कि जब लड़की डेढ़ महीने तक 'लापता' रही, तो योजना का सत्यापन तंत्र क्यों नहीं चेता? जब तक लाभार्थी सत्यापन में बाल संरक्षण एजेंसियों की सक्रिय भागीदारी नहीं होगी, ऐसी योजनाएँ दुरुपयोग की चपेट में आती रहेंगी।
RashtraPress
31 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कोलकाता बाल विवाह मामले में किसे और क्यों गिरफ्तार किया गया?
कोलकाता पुलिस ने नाबालिग लड़की के पिता, उसके पति और सास को गिरफ्तार किया। पति और सास पर पॉक्सो अधिनियम के तहत बाल विवाह, अपहरण और यौन उत्पीड़न के आरोप हैं, जबकि पिता पर डेढ़ महीने तक शादी की जानकारी छुपाने और सरकारी योजना का दुरुपयोग करने का आरोप है।
'कन्यारत्न शिक्षा अनुदान योजना' क्या है और इसका दुरुपयोग कैसे हुआ?
यह पश्चिम बंगाल सरकार की योजना है जो अविवाहित लड़कियों की शिक्षा को प्रोत्साहित करने और बाल विवाह रोकने के लिए आर्थिक सहायता देती है। इस मामले में लड़की के पिता ने शादी छुपाकर योजना की राशि लेते रहे, और लड़की के ससुराल में रहने पर भी आपत्ति न करने की शर्त के रूप में इसी सहायता को जारी रखने की माँग की।
नाबालिग लड़की को कैसे बचाया गया?
जब लड़की ने सत्यापन के लिए मायके लौटने से इनकार किया, तो पिता ने एक एनजीओ से संपर्क किया और शादी की बात स्वीकार की। एनजीओ ने हरिदेवपुर पुलिस को सूचित किया, जिसके बाद पुलिस टीम ने रविवार को ससुराल से लड़की को सुरक्षित निकाला।
इस मामले में पॉक्सो अधिनियम क्यों लागू किया गया?
पॉक्सो अधिनियम, 2012 तब लागू होता है जब पीड़ित 18 वर्ष से कम आयु का हो और उसके साथ यौन उत्पीड़न या अपहरण जैसे अपराध हुए हों। इस मामले में लड़की नाबालिग थी और पति की माँ को यह जानकारी होने के बावजूद शादी की अनुमति दी गई, इसलिए पति और सास पर पॉक्सो की कड़ी धाराएँ लगाई गई हैं।
इस मामले में आगे क्या होगा?
तीनों आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं और जाँच जारी है। नाबालिग को सुरक्षित स्थान पर रखा गया है। अधिकारियों के अनुसार, 'कन्यारत्न योजना' के दुरुपयोग की अलग से जाँच की जा सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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