अलवर निकाय चुनाव: टिकट बंटवारे पर भाजपा में बगावत, दो मंडल अध्यक्षों समेत 23 पदाधिकारियों का इस्तीफा
सारांश
मुख्य बातें
राजस्थान के अलवर में आगामी नगर निगम पार्षद चुनावों के लिए टिकट वितरण को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) में गंभीर आंतरिक विद्रोह उभर आया है। 31 अगस्त को शहर के चार मंडलों में से दो मंडल अध्यक्षों — जितेंद्र सिंह राठौर (श्री विवेकानंद मंडल) और महेश निहलानी (श्री केशव मंडल) — ने अपनी-अपनी कार्यकारी समितियों के साथ इस्तीफा दे दिया है। ये इस्तीफे भाजपा के जिला अध्यक्ष अशोक गुप्ता को सौंपे गए हैं, जिन्होंने प्रतिक्रिया के लिए किए गए संपर्क प्रयासों में फोन नहीं उठाया।
किन मंडलों में और कितने पदाधिकारियों ने दिया इस्तीफा
श्री विवेकानंद मंडल के 15 सदस्यों ने — मंडल अध्यक्ष जितेंद्र सिंह राठौर सहित — इस्तीफा सौंपा है। यह मंडल अलवर के 65 वार्डों में से 17 वार्डों को कवर करता है। वहीं श्री केशव मंडल के 8 पदाधिकारियों ने, जिनमें मंडल अध्यक्ष महेश निहलानी शामिल हैं, अपना इस्तीफा दिया है। यह मंडल 16 वार्डों का प्रतिनिधित्व करता है। इस प्रकार दोनों मंडलों के अंतर्गत आने वाले कुल 33 वार्ड — अलवर के आधे से अधिक — इस विद्रोह की परिधि में हैं।
टिकट वितरण पर क्या हैं आरोप
मंडल अध्यक्ष जितेंद्र सिंह राठौर ने बताया कि उन्होंने वार्ड 25 से अपनी पत्नी हुकम कंवर के लिए भाजपा का टिकट माँगा था। रिपोर्टों के अनुसार पार्टी ने यह टिकट रमाकांत यादव को दिया, जो पहले किसी अन्य वार्ड से चुनाव लड़ चुके हैं। राठौर ने यह भी आरोप लगाया कि वार्ड 25 सामान्य श्रेणी की महिला के लिए आरक्षित है, फिर भी टिकट एक ओबीसी उम्मीदवार को दिया गया — जो उनके अनुसार आरक्षण नियमों के विरुद्ध है।
श्री केशव मंडल के पदाधिकारियों का कहना है कि पार्टी की बैठकों में यह आश्वासन दिया गया था कि उम्मीदवारों को अंतिम रूप देने से पहले मंडल अध्यक्षों और कार्यकारी समितियों से विधिवत परामर्श किया जाएगा। उनके अनुसार इस प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ और टिकट एकतरफा तरीके से वितरित किए गए।
वरिष्ठ नेताओं की नाराजगी और सोशल मीडिया पर विरोध
भाजपा के वरिष्ठ नेता सुरेश मेहता — जिन्हें राज्य के वन राज्य मंत्री संजय शर्मा का करीबी माना जाता है — ने भी सोशल मीडिया पर अपनी नाराजगी सार्वजनिक की। उनकी पोस्ट में कहा गया कि ऐसा लगता है पार्टी को अब अनुभवी और पुराने नेताओं की जरूरत नहीं रही; उनकी जगह स्वार्थी लोगों और चापलूसों को मिल रही है। हालाँकि मेहता ने अपनी नाराजगी का स्पष्ट कारण नहीं बताया, इस पोस्ट को आगामी नगर निगम चुनावों के संदर्भ में देखा जा रहा है।
ओबीसी मोर्चा नेता ने प्राथमिक सदस्यता भी छोड़ी
भाजपा ओबीसी मोर्चा के जिला महासचिव विजेंद्र गुर्जर ने अपना संगठनात्मक पद और पार्टी की प्राथमिक सदस्यता — दोनों से इस्तीफा दे दिया है। गुर्जर ने अपने इस्तीफे में संगठन के मौजूदा कामकाज को लेकर कार्यकर्ताओं में बढ़ती असंतोष की भावना और वर्षों से पार्टी की सेवा करने वाले समर्पित जमीनी कार्यकर्ताओं की लगातार अनदेखी का उल्लेख किया। उन्होंने कहा, 'जब पार्टी के भीतर वफादार कार्यकर्ताओं की गरिमा और विचारों की रक्षा नहीं की जा सकती, तो किसी संगठनात्मक पद पर बने रहने का कोई औचित्य नहीं है।'
मनाने की कोशिशें जारी, आगे क्या
खबरों के अनुसार भाजपा के कई नेता देर रात तक इस्तीफा देने वाले पदाधिकारियों को अपने फैसले पर पुनर्विचार करने के लिए मनाने की कोशिश करते रहे। यह विद्रोह ऐसे समय में सामने आया है जब राजस्थान में नगर निगम पार्षद चुनाव नजदीक हैं और पार्टी को एकजुट मोर्चा पेश करने की जरूरत है। गौरतलब है कि अलवर के 33 वार्ड — जो इन दो असंतुष्ट मंडलों के अंतर्गत आते हैं — चुनावी दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, और इस आंतरिक कलह का असर पार्टी की चुनावी तैयारी पर पड़ सकता है।