₹200 करोड़ वसूली: मकोका आरोपों को चुनौती देने वाली सुकेश चंद्रशेखर की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने पुलिस से माँगा जवाब
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली हाईकोर्ट ने 31 जुलाई 2026 को सुकेश चंद्रशेखर की उस याचिका पर दिल्ली पुलिस से जवाब माँगा है, जिसमें उसने महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) के तहत निचली अदालत द्वारा तय किए गए आरोपों को चुनौती दी है। यह मामला कथित तौर पर ₹200 करोड़ से अधिक की ठगी और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है। अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 23 सितंबर की तारीख निर्धारित की है।
मामले की पृष्ठभूमि
जाँच एजेंसियों के अनुसार, सुकेश चंद्रशेखर पर आरोप है कि उसने खुद को केंद्र सरकार का वरिष्ठ अधिकारी बताकर एक कारोबारी परिवार से करोड़ों रुपए वसूले। शिकायत फोर्टिस हेल्थकेयर के पूर्व प्रमोटर शिविंदर सिंह की पत्नी अदिति सिंह ने दर्ज कराई थी। उनका आरोप है कि एक व्यक्ति ने फोन कर खुद को सरकारी अधिकारी बताया और उनके पति से जुड़े कानूनी मामलों में सहायता का भरोसा दिलाकर भारी रकम माँगी।
जाँच में क्या सामने आया
जाँच एजेंसियों के मुताबिक, इस कथित साजिश में कई लोग शामिल थे और सरकारी पहचान का दुरुपयोग किया गया। जाँच में यह आरोप लगाया गया कि अलग-अलग माध्यमों से कुल ₹217 करोड़ तक की रकम ली गई। इसी आधार पर दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने मामला दर्ज कर जाँच शुरू की।
मकोका के तहत कार्रवाई
जाँच के दौरान सुकेश चंद्रशेखर की कथित भूमिका उजागर होने पर उसे गिरफ्तार किया गया। पुलिस का दावा था कि सुकेश जेल के भीतर से भी अपनी गतिविधियाँ संचालित कर रहा था और उसके पास से मोबाइल फोन बरामद हुए थे। इन्हीं आरोपों के आधार पर पुलिस ने उसके विरुद्ध मकोका — यानी संगठित अपराध से निपटने वाले कानून — के तहत कार्रवाई की। पुलिस का कहना है कि यह अपराध अकेले नहीं, बल्कि एक सुनियोजित गिरोह के साथ मिलकर अंजाम दिया गया।
हाईकोर्ट में सुकेश की दलील
सुकेश चंद्रशेखर ने अपनी याचिका में तर्क दिया है कि उसके खिलाफ लगाए गए मकोका के आरोपों पर पुनर्विचार होना चाहिए। दिल्ली हाईकोर्ट ने इस याचिका को संज्ञान में लेते हुए दिल्ली पुलिस को अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है। यह ऐसे समय में आया है जब मामला पहले से ही कई कानूनी मोर्चों पर विचाराधीन है।
आगे क्या होगा
अब 23 सितंबर को दिल्ली पुलिस के जवाब के बाद हाईकोर्ट में आगे की सुनवाई होगी। इस मामले का फैसला न केवल सुकेश चंद्रशेखर के भविष्य को, बल्कि मकोका के प्रयोग की सीमाओं को लेकर कानूनी नज़ीर को भी प्रभावित कर सकता है।