31 जुलाई 2026
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₹200 करोड़ वसूली: मकोका आरोपों को चुनौती देने वाली सुकेश चंद्रशेखर की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने पुलिस से माँगा जवाब

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₹200 करोड़ वसूली: मकोका आरोपों को चुनौती देने वाली सुकेश चंद्रशेखर की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने पुलिस से माँगा जवाब

सारांश

₹200 करोड़ की कथित ठगी में आरोपी सुकेश चंद्रशेखर ने दिल्ली हाईकोर्ट में मकोका आरोपों को चुनौती दी है। हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस से जवाब माँगा है और 23 सितंबर को अगली सुनवाई तय की है। जाँच एजेंसियों का दावा है कि सुकेश जेल के भीतर से भी गिरोह चला रहा था।

मुख्य बातें

दिल्ली हाईकोर्ट ने 31 जुलाई 2026 को सुकेश चंद्रशेखर की मकोका-विरोधी याचिका पर दिल्ली पुलिस से जवाब माँगा।
अगली सुनवाई 23 सितंबर को निर्धारित।
मामला कथित तौर पर ₹217 करोड़ तक की ठगी और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है।
शिकायत फोर्टिस के पूर्व प्रमोटर शिविंदर सिंह की पत्नी अदिति सिंह ने दर्ज कराई थी।
पुलिस का दावा — सुकेश जेल के भीतर से गतिविधियाँ चला रहा था; मोबाइल फोन भी बरामद।
मकोका के तहत आरोप इसलिए लगाए गए क्योंकि पुलिस ने इसे एक संगठित गिरोह का काम बताया।

दिल्ली हाईकोर्ट ने 31 जुलाई 2026 को सुकेश चंद्रशेखर की उस याचिका पर दिल्ली पुलिस से जवाब माँगा है, जिसमें उसने महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) के तहत निचली अदालत द्वारा तय किए गए आरोपों को चुनौती दी है। यह मामला कथित तौर पर ₹200 करोड़ से अधिक की ठगी और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है। अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 23 सितंबर की तारीख निर्धारित की है।

मामले की पृष्ठभूमि

जाँच एजेंसियों के अनुसार, सुकेश चंद्रशेखर पर आरोप है कि उसने खुद को केंद्र सरकार का वरिष्ठ अधिकारी बताकर एक कारोबारी परिवार से करोड़ों रुपए वसूले। शिकायत फोर्टिस हेल्थकेयर के पूर्व प्रमोटर शिविंदर सिंह की पत्नी अदिति सिंह ने दर्ज कराई थी। उनका आरोप है कि एक व्यक्ति ने फोन कर खुद को सरकारी अधिकारी बताया और उनके पति से जुड़े कानूनी मामलों में सहायता का भरोसा दिलाकर भारी रकम माँगी।

जाँच में क्या सामने आया

जाँच एजेंसियों के मुताबिक, इस कथित साजिश में कई लोग शामिल थे और सरकारी पहचान का दुरुपयोग किया गया। जाँच में यह आरोप लगाया गया कि अलग-अलग माध्यमों से कुल ₹217 करोड़ तक की रकम ली गई। इसी आधार पर दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने मामला दर्ज कर जाँच शुरू की।

मकोका के तहत कार्रवाई

जाँच के दौरान सुकेश चंद्रशेखर की कथित भूमिका उजागर होने पर उसे गिरफ्तार किया गया। पुलिस का दावा था कि सुकेश जेल के भीतर से भी अपनी गतिविधियाँ संचालित कर रहा था और उसके पास से मोबाइल फोन बरामद हुए थे। इन्हीं आरोपों के आधार पर पुलिस ने उसके विरुद्ध मकोका — यानी संगठित अपराध से निपटने वाले कानून — के तहत कार्रवाई की। पुलिस का कहना है कि यह अपराध अकेले नहीं, बल्कि एक सुनियोजित गिरोह के साथ मिलकर अंजाम दिया गया।

हाईकोर्ट में सुकेश की दलील

सुकेश चंद्रशेखर ने अपनी याचिका में तर्क दिया है कि उसके खिलाफ लगाए गए मकोका के आरोपों पर पुनर्विचार होना चाहिए। दिल्ली हाईकोर्ट ने इस याचिका को संज्ञान में लेते हुए दिल्ली पुलिस को अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है। यह ऐसे समय में आया है जब मामला पहले से ही कई कानूनी मोर्चों पर विचाराधीन है।

आगे क्या होगा

अब 23 सितंबर को दिल्ली पुलिस के जवाब के बाद हाईकोर्ट में आगे की सुनवाई होगी। इस मामले का फैसला न केवल सुकेश चंद्रशेखर के भविष्य को, बल्कि मकोका के प्रयोग की सीमाओं को लेकर कानूनी नज़ीर को भी प्रभावित कर सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

अगर साबित होता है तो यह जेल प्रशासन की गंभीर विफलता को भी उजागर करता है। हाईकोर्ट का यह फैसला कि मकोका आरोप टिकते हैं या नहीं, भविष्य में ऐसे मामलों में इस कानून के उपयोग की सीमाएँ तय करेगा।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुकेश चंद्रशेखर पर मकोका के तहत आरोप क्यों लगाए गए?
दिल्ली पुलिस का आरोप है कि सुकेश ने यह ठगी अकेले नहीं, बल्कि एक सुनियोजित गिरोह के साथ मिलकर अंजाम दी। संगठित अपराध में गिरोह की संलिप्तता होने पर मकोका लागू किया जाता है। पुलिस ने यह भी दावा किया कि सुकेश जेल के भीतर से भी अपनी गतिविधियाँ चला रहा था।
दिल्ली हाईकोर्ट में सुकेश की याचिका पर अगली सुनवाई कब होगी?
दिल्ली हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 23 सितंबर की तारीख तय की है। उस दिन दिल्ली पुलिस का जवाब आने के बाद आगे की कार्यवाही होगी।
₹200 करोड़ वसूली मामला क्या है?
यह मामला कथित तौर पर फोर्टिस के पूर्व प्रमोटर शिविंदर सिंह की पत्नी अदिति सिंह की शिकायत पर दर्ज हुआ था। आरोप है कि एक व्यक्ति ने खुद को सरकारी अधिकारी बताकर उनके पति के कानूनी मामलों में मदद का भरोसा दिलाया और करोड़ों रुपए माँगे। जाँच में कुल ₹217 करोड़ तक की रकम लेने का आरोप लगाया गया है।
मकोका कानून क्या है और यह कब लागू होता है?
महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) एक विशेष कानून है जो संगठित अपराध और गिरोह-आधारित गतिविधियों से निपटने के लिए बनाया गया है। इसके तहत आरोप तय होने पर जमानत मिलना अत्यंत कठिन हो जाता है, यही कारण है कि इसके प्रयोग को अक्सर अदालतों में चुनौती दी जाती है।
क्या सुकेश चंद्रशेखर पहले भी किसी आपराधिक मामले में शामिल रहा है?
रिपोर्टों के अनुसार, सुकेश चंद्रशेखर पहले से ही कई आपराधिक मामलों में आरोपी रहा है और वह न्यायिक हिरासत में है। पुलिस का दावा है कि उसने हिरासत में रहते हुए भी मोबाइल फोन के ज़रिए अपनी गतिविधियाँ जारी रखीं, जो जेल प्रशासन के लिए भी जाँच का विषय बना।
राष्ट्र प्रेस
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