लीना पॉलोस की जमानत याचिका: सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया, 27 जुलाई को अगली सुनवाई
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय ने 17 जून 2026 को ₹200 करोड़ की कथित ठगी और महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) से जुड़े हाई-प्रोफाइल मामले में आरोपी सुकेश चंद्रशेखर की पत्नी लीना मारिया पॉलोस की जमानत याचिका पर दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया है। अदालत ने पुलिस को 27 जुलाई 2026 तक अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है और अगली सुनवाई की तारीख भी उसी दिन निर्धारित की है।
मामले की पृष्ठभूमि
इस मामले की जड़ें 2021 में जाती हैं, जब आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने लीना पॉलोस को गिरफ्तार किया था। उन पर आरोप है कि वह एक बड़े ठगी नेटवर्क का अभिन्न हिस्सा थीं, जिसमें कथित तौर पर ₹200 करोड़ से अधिक की हेराफेरी की गई। इसके बाद प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों में अलग से गिरफ्तार किया।
जाँच के दौरान यह भी सामने आया कि कथित ठगी से जुटाई गई राशि का उपयोग लग्जरी सामान, ब्रांडेड वस्तुओं और प्रभावशाली व्यक्तियों को प्रभावित करने में किया गया। ED की सप्लीमेंट्री चार्जशीट में बॉलीवुड अभिनेत्री जैकलीन फर्नांडिस को भी आरोपी बनाया गया है। ED का दावा है कि सुकेश चंद्रशेखर ने वसूली की रकम का एक बड़ा हिस्सा जैकलीन फर्नांडिस और उनके परिवार पर खर्च किया, जिसमें लग्जरी गाड़ियाँ, महंगे ब्रांडेड बैग, कपड़े, आभूषण और पालतू जानवर शामिल थे।
दिल्ली हाईकोर्ट का पूर्व निर्णय
इससे पहले दिल्ली उच्च न्यायालय ने मकोका से जुड़े मामले में लीना पॉलोस को जमानत देने से स्पष्ट रूप से इनकार कर दिया था। उच्च न्यायालय ने माना था कि मामला गंभीर प्रकृति का है और इसमें संगठित अपराध की संलिप्तता की आशंका को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। हालाँकि, उसी दौर में मनी लॉन्ड्रिंग मामले में उन्हें राहत मिली थी और जमानत का आदेश जारी किया गया था।
मनी लॉन्ड्रिंग मामले में लीना पॉलोस की ओर से उच्च न्यायालय में यह तर्क दिया गया था कि इस अपराध में अधिकतम सजा सात वर्ष है और वह अब तक लगभग साढ़े चार वर्ष कारावास में बिता चुकी हैं। यह ऐसे समय में आया है जब न्यायालयों में लंबे विचाराधीन कारावास पर व्यापक बहस जारी है।
आरोपों का स्वरूप
लीना पॉलोस पर आरोप है कि उन्होंने इस पूरे नेटवर्क में फर्जी लेनदेन और धन के गबन में अहम भूमिका निभाई। गौरतलब है कि यह मामला महज वित्तीय अपराध तक सीमित नहीं है — मकोका के तहत आरोप इसे संगठित अपराध की श्रेणी में रखते हैं, जो जमानत की राह को कहीं अधिक कठिन बनाता है।
आगे क्या होगा
अब सभी की निगाहें 27 जुलाई 2026 की सुनवाई पर टिकी हैं, जब दिल्ली पुलिस अपना जवाब दाखिल करेगी और सर्वोच्च न्यायालय आगे की कार्यवाही तय करेगा। मकोका मामले में जमानत मिलती है या नहीं, यह फैसला इस पूरे प्रकरण की दिशा निर्धारित करेगा।