मणिपुर CM युमनाम खेमचंद सिंह की अपील: संविदा कर्मचारी नियमितीकरण में रिश्वत बंद हो
सारांश
मुख्य बातें
मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने सोमवार, 14 सितंबर 2026 को इंफाल में संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण के लिए रिश्वतखोरी की प्रथा को तत्काल समाप्त करने का आह्वान किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि कर्मचारियों की वास्तविक सेवा, समर्पण और योगदान ही उनके वैध दावों का आधार होना चाहिए — न कि अनुचित साधन।
किस मंच पर हुई यह अपील
मुख्यमंत्री ने यह संबोधन पोरोमपत स्थित सरकारी जवाहरलाल नेहरू आयुर्वेद संस्थान (JNIMS) में विभिन्न परियोजनाओं के उद्घाटन, शुभारंभ और आधारशिला रखने के अवसर पर दिया। यह कार्यक्रम स्वास्थ्य क्षेत्र में बुनियादी ढाँचे को मजबूत करने की दिशा में आयोजित किया गया था।
उन्होंने मीडिया में नर्सों के नियमितीकरण से जुड़ी कथित रिश्वतखोरी की खबरों पर चिंता जताई और इस मुद्दे को सार्वजनिक रूप से संबोधित करना ज़रूरी समझा।
200 से अधिक संविदा नर्सें — क्यों हुई यह नियुक्ति
खेमचंद सिंह ने बताया कि कोविड-19 महामारी के दौरान स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र की बढ़ती जिम्मेदारियों और माँग को देखते हुए राज्य में 200 से अधिक नर्सों को संविदा आधार पर नियुक्त किया गया। उन्होंने स्वीकार किया कि इन स्वास्थ्य कर्मियों ने महामारी के कठिन दौर में अपार जिम्मेदारियाँ निभाईं।
गौरतलब है कि मणिपुर आर्थिक कठिनाइयों के कारण कुछ समय से सरकारी विभागों में भर्ती संविदात्मक व्यवस्था के माध्यम से करता रहा है। यह स्थिति देश के कई राज्यों में एक आम चुनौती बन चुकी है, जहाँ स्थायी भर्ती की जगह संविदा नियुक्तियाँ बढ़ रही हैं।
सरकार का रुख — पारदर्शिता और गरिमा
मुख्यमंत्री ने नर्सों और अन्य संविदा कर्मचारियों से आग्रह किया कि वे उचित, पारदर्शी और वैध माध्यमों से सरकार के समक्ष अपनी सेवा और योगदान प्रस्तुत करें। उन्होंने आश्वासन दिया कि नियमितीकरण से संबंधित वैध चिंताओं पर उचित प्रक्रिया के माध्यम से विचार किया जाएगा।
खेमचंद सिंह ने कहा, 'रिश्वत के माध्यम से नियमितीकरण प्राप्त करने का तरीका आज से ही समाप्त होना चाहिए।' उन्होंने जोड़ा कि सरकार ईमानदारी, समर्पण और गरिमा के साथ कर्तव्य निभाने वाले कर्मचारियों का समर्थन करेगी।
स्वास्थ्य विभाग के कार्यों की सराहना
मुख्यमंत्री ने डॉक्टरों, नर्सों और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा कोविड-19 महामारी के दौरान निभाई गई भूमिका को विशेष रूप से रेखांकित किया। साथ ही, उन्होंने पिछले चार महीनों में स्वास्थ्य क्षेत्र को मजबूत करने में स्वास्थ्य विभाग के प्रयासों की सराहना की।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब मणिपुर में प्रशासनिक सुधार और पारदर्शिता को लेकर सरकार पर दबाव बना हुआ है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण के लिए सरकार कोई ठोस नीतिगत ढाँचा तैयार करती है या नहीं।