जयपुर निकाय चुनाव: पूर्व मेयर ज्योति खंडेलवाल हारीं, भाजपा 69 वार्ड जीतकर आगे
सारांश
मुख्य बातें
जयपुर नगर निगम चुनाव में 14 सितंबर 2026 को मतगणना के दौरान एक बड़ा उलटफेर सामने आया, जब कांग्रेस छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हुईं पूर्व मेयर ज्योति खंडेलवाल अपना वार्ड गँवा बैठीं। जयपुर के सभी 150 वार्डों में 11 सितंबर 2026 को हुई वोटिंग के बाद मतगणना श्री भवानी निकेतन कॉलेज, सीकर रोड पर स्थित काउंटिंग सेंटर पर जारी है।
चुनाव परिणामों का ताज़ा ब्यौरा
अब तक घोषित 132 वार्डों के नतीजों में भाजपा ने 69 वार्ड जीते हैं, जबकि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) को 49 सीटें और निर्दलीय उम्मीदवारों को 14 वार्ड मिले हैं। बहुमत के लिए 76 सीटों की आवश्यकता है। शेष 18 वार्डों की गिनती अभी जारी है, जिनके नतीजे निर्णायक तस्वीर स्पष्ट करेंगे। जिला चुनाव आयोग ने गिनती के लिए 15 कंट्रोल रूम और 150 से अधिक काउंटिंग टेबल तैयार किए हैं।
ज्योति खंडेलवाल की हार — सबसे बड़ा उलटफेर
ज्योति खंडेलवाल को भाजपा का प्रमुख चेहरा माना जा रहा था और पार्टी को बहुमत मिलने की स्थिति में उन्हें मेयर पद की प्रबल दावेदार समझा जाता था। उनकी हार ने भाजपा की मेयर पद की रणनीति को गहरा झटका दिया है। राजनीतिक जानकारों के अनुसार, उनकी उम्मीदवारी को लेकर पार्टी के भीतर अंदरूनी असंतोष, स्थानीय स्तर पर विरोध और कांग्रेस की मज़बूत चुनावी चुनौती — इन तीनों कारकों का मिला-जुला असर उनकी पराजय का कारण हो सकता है।
गौरतलब है कि खंडेलवाल ने कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थामा था, और दलबदल के बाद जीत की उम्मीद पार्टी के साथ-साथ खुद उनकी भी थी। इस हार से भाजपा के अंदर गुटीय मतभेद और उजागर हो सकते हैं।
मतदान और उम्मीदवारों का आँकड़ा
150 वार्डों के लिए 11 सितंबर 2026 को हुई वोटिंग में जयपुर ने 63.55 प्रतिशत मतदान दर्ज किया। कुल 723 उम्मीदवार मैदान में थे। दोनों प्रमुख दलों — भाजपा और कांग्रेस — ने मतगणना से पहले स्पष्ट बहुमत के साथ नगर निकाय बनाने का दावा किया था।
हालाँकि, कई वार्डों में निर्दलीय उम्मीदवारों और पार्टी के बागी नेताओं की मौजूदगी ने अंतिम नतीजों को लेकर अनिश्चितता की स्थिति बनाए रखी है।
राजस्थान की राजनीति पर असर
जयपुर नगर निगम राजस्थान के सबसे महत्वपूर्ण शहरी केंद्रों में से एक है। इस चुनाव के नतीजे न केवल 'पिंक सिटी' के शहरी प्रशासन का भविष्य तय करेंगे, बल्कि राज्य में दोनों प्रमुख दलों की साख का भी पैमाना बनेंगे। यह ऐसे समय में आया है जब राजस्थान में भाजपा सरकार है और निकाय चुनाव में बेहतर प्रदर्शन उसकी राजनीतिक पकड़ को और मज़बूत कर सकता था।
आगे क्या होगा
शेष वार्डों की मतगणना पूरी होने के बाद यह स्पष्ट होगा कि भाजपा अपने दम पर 76 सीटों का बहुमत छू पाती है या निर्दलीय उम्मीदवार किंगमेकर की भूमिका निभाएंगे। अंतिम परिणाम घोषित होने के बाद मेयर पद की दावेदारी की तस्वीर और साफ होगी, और भाजपा को अपनी आंतरिक रणनीति पर नए सिरे से विचार करना पड़ सकता है।