14 सितंबर 2026
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भरतपुर निकाय चुनाव 2026: 235 में से 152 वार्डों पर निर्दलीयों का कब्जा, भाजपा 66 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी

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भरतपुर निकाय चुनाव 2026: 235 में से 152 वार्डों पर निर्दलीयों का कब्जा, भाजपा 66 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी

सारांश

भरतपुर में निकाय चुनाव के नतीजों ने सियासी समीकरण पलट दिए — 235 में से 152 वार्डों पर निर्दलीयों का कब्जा, भाजपा महज 66 सीटों पर सिमटी। अब हर निकाय में बोर्ड गठन के लिए निर्दलीय 'किंगमेकर' बन गए हैं।

मुख्य बातें

भरतपुर जिले के 235 वार्डों में 152 पर निर्दलीय प्रत्याशी विजयी हुए — जो कुल सीटों का 64% से अधिक है।
भारतीय जनता पार्टी (BJP) 66 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी, लेकिन किसी भी निकाय में स्पष्ट बहुमत नहीं।
कांग्रेस को 15 , बसपा और आरएलपी को 1-1 वार्ड मिला; नदबई में कांग्रेस का खाता भी नहीं खुला।
भुसावर नगर पालिका में सबसे एकतरफा नतीजे — 25 में से 22 वार्ड निर्दलीयों के पास।
बोर्ड गठन के लिए भाजपा और कांग्रेस दोनों को निर्दलीय पार्षदों का समर्थन लेना होगा।
जिला निर्वाचन अधिकारी कमर चौधरी ने मतगणना शांतिपूर्ण संपन्न होने की पुष्टि की।

राजस्थान के भरतपुर जिले में नगर निकाय आम चुनाव 2026 की मतगणना 14 सितंबर 2026 को शांतिपूर्वक संपन्न हुई। जिले की 1 नगर निगम और 6 नगर पालिकाओं के कुल 235 वार्डों में से 152 पर निर्दलीय प्रत्याशियों ने बाजी मारी, जबकि भारतीय जनता पार्टी (BJP) 66 सीटें जीतकर सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बनी। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) को केवल 15 वार्डों में जीत मिली, जबकि बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) को 1-1 वार्ड से संतोष करना पड़ा।

मुख्य घटनाक्रम

जिला निर्वाचन अधिकारी कमर चौधरी ने बताया कि राज्य निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के तहत सभी निकाय मुख्यालयों पर स्थापित मतगणना केंद्रों पर वोटों की गिनती निर्विघ्न संपन्न हुई। नतीजों ने साफ कर दिया कि जिले में किसी भी राजनीतिक दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है।

भरतपुर नगर निगम के 65 वार्डों में 36 पर निर्दलीय, 20 पर भाजपा, 7 पर कांग्रेस, 1 पर बसपा और 1 पर आरएलपी के उम्मीदवार विजयी हुए। निर्दलीय विजेताओं में वार्ड 1 से करण सिंह, वार्ड 2 से अम्बिका सैनी, वार्ड 3 से आकाश निराला और वार्ड 4 से अरविन्द शामिल हैं। भाजपा के विजेताओं में वार्ड 8 से जीतेंद्र सिंह, वार्ड 12 से सुधा शर्मा, वार्ड 19 से मनोज सिंह, वार्ड 22 से नीतू सिंह और वार्ड 23 से किरण प्रमुख हैं।

नगर पालिकाओं में निर्दलीयों का दबदबा

नगर पालिका नदबई के 35 वार्डों में 25 पर निर्दलीय और 10 पर भाजपा जीती। यहाँ कांग्रेस का खाता तक नहीं खुल सका — जो पार्टी के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।

नगर पालिका वैर के 25 वार्डों में 20 पर निर्दलीय, 3 पर भाजपा और 2 पर कांग्रेस विजयी रही। वार्ड 1 से राजवती सैनी और वार्ड 2 से मोनिका समेत अधिकांश सीटें निर्दलीयों के हाथ रहीं।

नगर पालिका बयाना के 35 वार्डों में 22 पर निर्दलीय, 11 पर भाजपा और 2 पर कांग्रेस जीती। नगर पालिका रूपवास के 25 वार्डों में निर्दलीय 14, भाजपा 9 और कांग्रेस 2 वार्ड जीतने में सफल रही — यहाँ वार्ड 1 से अमन कुमार निर्दलीय और वार्ड 2 से राममूर्ति कांग्रेस से विजयी हुए।

सर्वाधिक एकतरफा परिणाम भुसावर नगर पालिका में आए, जहाँ 25 में से 22 वार्डों पर निर्दलीयों ने कब्जा किया, भाजपा को 2 और कांग्रेस को केवल 1 सीट मिली। उच्चैन नगर पालिका के 25 वार्डों में 13 निर्दलीय, 11 भाजपा और 1 कांग्रेस के उम्मीदवार जीते।

बोर्ड गठन की चुनौती

भरतपुर नगर निगम सहित सभी 6 नगर पालिकाओं में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है। निगम में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी अवश्य बनी, किंतु बोर्ड गठन के लिए उसे निर्दलीय पार्षदों के समर्थन की अनिवार्य रूप से ज़रूरत होगी। यह ऐसे समय में आया है जब राजस्थान में भाजपा की सरकार है और पार्टी नेतृत्व स्थानीय निकायों पर पकड़ मजबूत करने की कोशिश में है।

गौरतलब है कि 152 निर्दलीय विजेता किसी एक दल की विचारधारा से बंधे नहीं हैं, इसलिए भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए उन्हें साधना आसान नहीं होगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अध्यक्ष पद के लिए जोड़-तोड़ और सौदेबाजी की राजनीति आने वाले दिनों में तेज होगी।

क्या होगा आगे

नतीजे घोषित होने के साथ ही सभी निकायों में बोर्ड गठन की प्रक्रिया शुरू होगी। चूँकि कोई दल बहुमत के करीब भी नहीं है, निर्दलीय पार्षद 'किंगमेकर' की भूमिका में आ गए हैं। भाजपा और कांग्रेस, दोनों के लिए यह परीक्षा है कि वे स्थानीय स्तर पर गठबंधन की राजनीति को किस तरह आकार देती हैं। आने वाले हफ्तों में अध्यक्ष पद का चुनाव इस चुनावी समर का अगला अहम पड़ाव होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

तब भी स्थानीय निकायों में मतदाताओं ने दलीय उम्मीदवारों को नकारकर निर्दलीयों को प्राथमिकता दी। यह पैटर्न बताता है कि स्थानीय मुद्दों और व्यक्तिगत विश्वसनीयता के सामने पार्टी का झंडा कमज़ोर पड़ रहा है। दूसरी ओर, 152 निर्दलीय पार्षदों का कोई साझा एजेंडा नहीं है — इससे बोर्ड गठन में अवसरवादी सौदेबाजी का खतरा है, जो स्थानीय शासन की स्थिरता के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है।
RashtraPress
14 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भरतपुर नगर निकाय चुनाव 2026 में किसकी जीत हुई?
भरतपुर जिले के 235 वार्डों में सबसे अधिक 152 वार्ड निर्दलीय प्रत्याशियों ने जीते। भाजपा 66 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी, जबकि कांग्रेस को केवल 15 वार्डों में जीत मिली।
भरतपुर नगर निगम में किस पार्टी का बोर्ड बनेगा?
भरतपुर नगर निगम में भाजपा 20 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी है, लेकिन उसे बोर्ड गठन के लिए निर्दलीय पार्षदों के समर्थन की जरूरत होगी। किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है, इसलिए जोड़-तोड़ की राजनीति तेज होने की संभावना है।
नदबई नगर पालिका में कांग्रेस का खाता क्यों नहीं खुला?
नगर पालिका नदबई के 35 वार्डों में 25 पर निर्दलीय और 10 पर भाजपा जीती। कांग्रेस एक भी वार्ड जीतने में सफल नहीं हो सकी, जो पार्टी की स्थानीय स्तर पर कमज़ोर पकड़ को दर्शाता है।
भरतपुर में किस नगर पालिका में निर्दलीयों का सबसे ज्यादा दबदबा रहा?
भुसावर नगर पालिका में निर्दलीयों का सबसे अधिक दबदबा रहा, जहाँ 25 में से 22 वार्ड निर्दलीय प्रत्याशियों ने जीते। भाजपा को केवल 2 और कांग्रेस को 1 वार्ड मिला।
भरतपुर नगर निकाय चुनाव 2026 की मतगणना कैसे हुई?
जिला निर्वाचन अधिकारी कमर चौधरी के अनुसार, राज्य निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के तहत सभी निकाय मुख्यालयों पर बनाए गए मतगणना केंद्रों पर 14 सितंबर 2026 को शांतिपूर्वक वोटों की गिनती हुई।
राष्ट्र प्रेस
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