दिल्ली हाईकोर्ट ने सुकेश चंद्रशेखर के सहयोगी वकील मोहनराज को ₹200 करोड़ रंगदारी मामले में दी जमानत
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली हाईकोर्ट ने 8 जुलाई 2026 को ठग सुकेश चंद्रशेखर से जुड़े ₹200 करोड़ के रंगदारी मामले में आरोपी वकील बी. मोहनराज को नियमित जमानत प्रदान कर दी। न्यायालय ने माना कि महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) की कठोर शर्तों के बावजूद, मुकदमे के शीघ्र समाप्त होने की कोई संभावना नहीं दिखती, इसलिए मोहनराज को अंडरट्रायल के रूप में जेल में रखना न्यायसंगत नहीं है।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला अगस्त 2021 में दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल द्वारा दर्ज की गई एफआईआर से उत्पन्न हुआ है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, चंद्रशेखर और उनके सहयोगियों ने एक व्यवसायी की पत्नी से उसके पति को कानूनी राहत दिलाने का झाँसा देकर कथित तौर पर लगभग ₹217 करोड़ की वसूली की। आरोप है कि चंद्रशेखर ने जेल से ही भ्रष्ट अधिकारियों और सहयोगियों की मदद से यह रंगदारी सिंडिकेट संचालित किया।
वकील मोहनराज पर आरोप है कि उन्होंने कथित तौर पर अपराध से अर्जित धन को तीसरे पक्षों के माध्यम से चेन्नई में लग्जरी कारें और अचल संपत्ति खरीदने में लगाया तथा इन लेनदेन पर कमीशन भी लिया। अभियोजन पक्ष के अनुसार, मोहनराज चंद्रशेखर और उनकी पत्नी लीना मारिया पॉल के करीबी सहयोगी रहे हैं।
न्यायालय की टिप्पणियाँ
जस्टिस प्रतीक जालान की एकल पीठ ने जमानत याचिका स्वीकार करते हुए रेखांकित किया कि मोहनराज 4 साल और 10 महीने से अधिक समय से अंडरट्रायल के रूप में जेल में हैं। न्यायालय ने कहा, "याचिकाकर्ता पहले ही अंडरट्रायल के तौर पर लगभग 4 साल और 10 महीने जेल में बिता चुका है... आरोपियों की संख्या (24), गवाहों की संख्या (403) और मामले की जटिलता यह बताती है कि कार्यवाही के जल्द पूरा होने की संभावना कम है।"
जस्टिस जालान ने यह भी कहा, "अभियोजन पक्ष द्वारा याचिकाकर्ता की भूमिका को देखते हुए, मेरा मानना है कि अंडरट्रायल के तौर पर उन्हें और जेल में रखना उचित नहीं है।" न्यायालय ने स्पष्ट किया कि ये टिप्पणियाँ केवल जमानत अर्जी तक सीमित हैं और मामले के गुण-दोष पर चलने वाले मुकदमे को प्रभावित नहीं करेंगी।
जमानत की शर्तें
फैसले के अनुसार, मोहनराज को ₹2.5 लाख का पर्सनल बॉन्ड और उतनी ही राशि की दो जमानत राशि जमा करनी होगी। इसके अतिरिक्त उन्हें अपना पासपोर्ट जमा करना होगा, प्रत्येक सुनवाई की तिथि पर ट्रायल कोर्ट में उपस्थित रहना होगा और गवाहों को प्रभावित करने या साक्ष्यों से छेड़छाड़ करने से बचना होगा।
संवैधानिक आधार
न्यायालय ने अनुच्छेद 21 के तहत व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार और मकोका जैसे विशेष कानूनों के तहत जमानत पर लगाए गए कानूनी प्रतिबंधों के बीच संतुलन का प्रश्न उठाया। सर्वोच्च न्यायालय के दीर्घकालिक विचाराधीन कैद पर दिए गए हालिया फैसलों का हवाला देते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि कानूनी प्रतिबंध संवैधानिक सुरक्षा को पूर्णतः समाप्त नहीं कर सकते, विशेषकर जब मुकदमे के शीघ्र समाप्त होने की संभावना न हो।
व्यापक मामले की स्थिति
गौरतलब है कि यह आदेश इसी मकोका मामले में लीना मारिया पॉल की जमानत अर्जी खारिज होने के कुछ सप्ताह बाद आया है। हाईकोर्ट ने पॉल के मामले में कहा था कि रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री कथित सिंडिकेट में उनकी संलिप्तता का प्रारंभिक संकेत देती है। इसके बाद सर्वोच्च न्यायालय ने पॉल की ओर से दायर स्पेशल लीव पिटिशन (एसएलपी) पर दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया है।
समानांतर मनी लॉन्ड्रिंग मामले में — जिसकी जाँच प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) कर रहा है — पॉल को पहले ही जमानत मिल चुकी है। इस मामले में चंद्रशेखर, पॉल और अन्य आरोपियों के विरुद्ध आरोप तय करने की प्रक्रिया चल रही है, जबकि बॉलीवुड अभिनेत्री जैकलीन फर्नांडीज ने स्वयं को निर्दोष बताते हुए मुकदमे का सामना करने का निर्णय लिया है।