8 जुलाई 2026
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मारुति सुजुकी ने खरखौदा प्लांट में 1 MWh बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम चालू किया, सालाना 54 टन CO₂ उत्सर्जन घटेगा

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मारुति सुजुकी ने खरखौदा प्लांट में 1 MWh बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम चालू किया, सालाना 54 टन CO₂ उत्सर्जन घटेगा

सारांश

मारुति सुजुकी ने खरखौदा प्लांट में 1 MWh BESS चालू किया — यह सिर्फ एक तकनीकी अपग्रेड नहीं, बल्कि 2025 में स्थापित 20 MWp सोलर प्रोजेक्ट की बर्बाद होती अतिरिक्त ऊर्जा को बचाने की रणनीति है। लक्ष्य: सालाना 54 टन CO₂ कम और 2031 तक 42% उत्सर्जन कटौती।

मुख्य बातें

मारुति सुजुकी इंडिया ने 8 जुलाई 2026 को खरखौदा संयंत्र में 1 MWh क्षमता का बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) चालू किया।
यह सिस्टम 20 MWp सौर ऊर्जा परियोजना की अतिरिक्त बिजली संग्रहीत करेगा, जो पहले कम माँग के दौरान बर्बाद हो जाती थी।
BESS का जीवनकाल लगभग 15 वर्ष है और यह प्रतिवर्ष करीब 54 टन CO₂ उत्सर्जन में कमी लाएगा।
सुजुकी मोटर कॉर्पोरेशन का लक्ष्य वित्त वर्ष 2030-31 तक स्कोप-1 और स्कोप-2 उत्सर्जन में 42% कटौती करना है।
800 एकड़ में फैले खरखौदा संयंत्र का उद्घाटन PM नरेंद्र मोदी और जापान की PM साने ताकाइची ने संयुक्त रूप से किया था।

देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया ने 8 जुलाई 2026 को हरियाणा के खरखौदा विनिर्माण संयंत्र में 1 मेगावाट-घंटा (MWh) क्षमता का बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) चालू करने की घोषणा की। कंपनी के अनुसार, यह प्रणाली प्रत्येक वर्ष लगभग 54 टन कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) उत्सर्जन में कटौती करेगी और नवीकरणीय ऊर्जा के अधिकतम उपयोग को सुनिश्चित करेगी।

BESS कैसे काम करेगा

इस बैटरी स्टोरेज सिस्टम को पायलट प्रोजेक्ट के तहत संयंत्र के आंतरिक बिजली वितरण नेटवर्क से जोड़ा गया है। मारुति सुजुकी ने वर्ष 2025 में खरखौदा संयंत्र में 20 मेगावाट-पीक (MWp) क्षमता की सौर ऊर्जा परियोजना स्थापित की थी। हालाँकि, संयंत्र की छुट्टियों या कम उत्पादन वाले दिनों में सोलर प्लांट से उत्पन्न अतिरिक्त बिजली का पूरा उपयोग नहीं हो पाता था।

नया BESS इसी अतिरिक्त सौर ऊर्जा को संग्रहीत करेगा और आवश्यकता पड़ने पर उसे संयंत्र में उपयोग में लाएगा। इससे न केवल सौर ऊर्जा की बर्बादी रुकेगी, बल्कि बिजली ग्रिड की स्थिरता भी मज़बूत होगी।

कंपनी प्रमुख का बयान

मारुति सुजुकी इंडिया के प्रबंध निदेशक एवं सीईओ हिसाशी ताकेउची ने कहा, "खरखौदा संयंत्र में बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम की शुरुआत इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। लगभग 15 वर्ष के जीवनकाल वाले इस सिस्टम से हर साल करीब 54 टन CO₂ उत्सर्जन में कमी आएगी।" उन्होंने यह भी कहा कि कंपनी भारत में आत्मनिर्भर हरित ऊर्जा पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने के प्रयासों में निरंतर योगदान दे रही है।

दीर्घकालिक कार्बन कटौती लक्ष्य

ताकेउची ने स्पष्ट किया कि आने वाले वर्षों में कंपनी का उत्पादन बढ़ने की उम्मीद है, लेकिन इसके साथ ही वह विनिर्माण गतिविधियों से होने वाले स्कोप-1 और स्कोप-2 कार्बन उत्सर्जन को कार्बन इंटेंसिटी और कुल उत्सर्जन — दोनों स्तरों पर — घटाने के लिए प्रतिबद्ध है। यह रणनीति मूल कंपनी सुजुकी मोटर कॉर्पोरेशन के पर्यावरणीय विजन के अनुरूप है, जिसके तहत वित्त वर्ष 2030-31 तक वित्त वर्ष 2023 की तुलना में स्कोप-1 और स्कोप-2 उत्सर्जन में 42 प्रतिशत कटौती का लक्ष्य रखा गया है।

खरखौदा संयंत्र की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि जुलाई की शुरुआत में हरियाणा के आईएमटी खरखौदा में मारुति सुजुकी के सबसे आधुनिक वाहन विनिर्माण संयंत्र का उद्घाटन किया गया था। इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने भारत-जापान संयुक्त आर्थिक मंच के दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए राष्ट्र को समर्पित किया था। करीब 800 एकड़ में फैला यह एकीकृत विनिर्माण परिसर सप्लायर पार्क के साथ विकसित किया गया है, और पूरी क्षमता से संचालन शुरू होने पर इसे दुनिया के सबसे बड़े वाहन निर्माण केंद्रों में शामिल किया जाएगा।

आगे की राह

यह BESS पहल ऐसे समय में आई है जब भारत का ऑटोमोबाइल उद्योग अपने कार्बन फुटप्रिंट को कम करने के लिए नवीकरणीय ऊर्जा एकीकरण की ओर तेज़ी से बढ़ रहा है। मारुति सुजुकी का यह पायलट प्रोजेक्ट भविष्य में कंपनी के अन्य संयंत्रों में इसी तकनीक को विस्तार देने की दिशा में एक परीक्षण आधार के रूप में काम करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन 54 टन की वार्षिक CO₂ कटौती एक ऐसी कंपनी के पैमाने पर बेहद छोटी है जो लाखों वाहन प्रतिवर्ष बनाती है। असली परीक्षा यह है कि क्या यह पायलट खरखौदा तक सीमित रहेगा या गुरुग्राम और मानेसर संयंत्रों में भी विस्तारित होगा। 42% उत्सर्जन कटौती का 2031 का लक्ष्य महत्वाकांक्षी है, परंतु इसकी सत्यापन-योग्य प्रगति रिपोर्ट अभी सार्वजनिक नहीं है — बिना पारदर्शी मापन ढाँचे के, ये घोषणाएँ 'ग्रीनवॉशिंग' के आरोपों से नहीं बच सकतीं।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मारुति सुजुकी का खरखौदा BESS क्या है और यह कैसे काम करता है?
यह 1 MWh क्षमता का बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम है जिसे खरखौदा संयंत्र के आंतरिक बिजली वितरण नेटवर्क से जोड़ा गया है। यह संयंत्र की 20 MWp सौर परियोजना से उत्पन्न अतिरिक्त बिजली को संग्रहीत करता है और कम सौर उत्पादन या अधिक माँग के समय उसका उपयोग करता है।
इस BESS से कार्बन उत्सर्जन में कितनी कमी आएगी?
कंपनी के अनुसार, यह सिस्टम प्रतिवर्ष लगभग 54 टन CO₂ उत्सर्जन में कटौती करेगा। इस सिस्टम का अनुमानित जीवनकाल लगभग 15 वर्ष है।
मारुति सुजुकी का दीर्घकालिक कार्बन कटौती लक्ष्य क्या है?
मूल कंपनी सुजुकी मोटर कॉर्पोरेशन के पर्यावरणीय विजन के तहत वित्त वर्ष 2030-31 तक वित्त वर्ष 2023 की तुलना में स्कोप-1 और स्कोप-2 उत्सर्जन में 42 प्रतिशत कमी लाने का लक्ष्य है। मारुति सुजुकी इंडिया इसी रणनीति के अनुरूप अपने संयंत्रों में हरित ऊर्जा पहलें लागू कर रही है।
खरखौदा विनिर्माण संयंत्र कितना बड़ा है और इसका उद्घाटन कब हुआ?
करीब 800 एकड़ में फैला यह एकीकृत विनिर्माण परिसर सप्लायर पार्क के साथ विकसित किया गया है। जुलाई 2026 की शुरुआत में PM नरेंद्र मोदी और जापान की PM साने ताकाइची ने भारत-जापान संयुक्त आर्थिक मंच के दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से इसे राष्ट्र को समर्पित किया था।
क्या यह BESS पहल मारुति सुजुकी के अन्य संयंत्रों में भी लागू होगी?
फिलहाल इसे पायलट प्रोजेक्ट के रूप में खरखौदा संयंत्र में शुरू किया गया है। कंपनी ने अन्य संयंत्रों में विस्तार को लेकर अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन इस पायलट के परिणामों के आधार पर भविष्य में विस्तार की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
राष्ट्र प्रेस
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