मारुति सुजुकी ने खरखौदा प्लांट में 1 MWh बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम चालू किया, सालाना 54 टन CO₂ उत्सर्जन घटेगा
सारांश
मुख्य बातें
देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया ने 8 जुलाई 2026 को हरियाणा के खरखौदा विनिर्माण संयंत्र में 1 मेगावाट-घंटा (MWh) क्षमता का बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) चालू करने की घोषणा की। कंपनी के अनुसार, यह प्रणाली प्रत्येक वर्ष लगभग 54 टन कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) उत्सर्जन में कटौती करेगी और नवीकरणीय ऊर्जा के अधिकतम उपयोग को सुनिश्चित करेगी।
BESS कैसे काम करेगा
इस बैटरी स्टोरेज सिस्टम को पायलट प्रोजेक्ट के तहत संयंत्र के आंतरिक बिजली वितरण नेटवर्क से जोड़ा गया है। मारुति सुजुकी ने वर्ष 2025 में खरखौदा संयंत्र में 20 मेगावाट-पीक (MWp) क्षमता की सौर ऊर्जा परियोजना स्थापित की थी। हालाँकि, संयंत्र की छुट्टियों या कम उत्पादन वाले दिनों में सोलर प्लांट से उत्पन्न अतिरिक्त बिजली का पूरा उपयोग नहीं हो पाता था।
नया BESS इसी अतिरिक्त सौर ऊर्जा को संग्रहीत करेगा और आवश्यकता पड़ने पर उसे संयंत्र में उपयोग में लाएगा। इससे न केवल सौर ऊर्जा की बर्बादी रुकेगी, बल्कि बिजली ग्रिड की स्थिरता भी मज़बूत होगी।
कंपनी प्रमुख का बयान
मारुति सुजुकी इंडिया के प्रबंध निदेशक एवं सीईओ हिसाशी ताकेउची ने कहा, "खरखौदा संयंत्र में बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम की शुरुआत इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। लगभग 15 वर्ष के जीवनकाल वाले इस सिस्टम से हर साल करीब 54 टन CO₂ उत्सर्जन में कमी आएगी।" उन्होंने यह भी कहा कि कंपनी भारत में आत्मनिर्भर हरित ऊर्जा पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने के प्रयासों में निरंतर योगदान दे रही है।
दीर्घकालिक कार्बन कटौती लक्ष्य
ताकेउची ने स्पष्ट किया कि आने वाले वर्षों में कंपनी का उत्पादन बढ़ने की उम्मीद है, लेकिन इसके साथ ही वह विनिर्माण गतिविधियों से होने वाले स्कोप-1 और स्कोप-2 कार्बन उत्सर्जन को कार्बन इंटेंसिटी और कुल उत्सर्जन — दोनों स्तरों पर — घटाने के लिए प्रतिबद्ध है। यह रणनीति मूल कंपनी सुजुकी मोटर कॉर्पोरेशन के पर्यावरणीय विजन के अनुरूप है, जिसके तहत वित्त वर्ष 2030-31 तक वित्त वर्ष 2023 की तुलना में स्कोप-1 और स्कोप-2 उत्सर्जन में 42 प्रतिशत कटौती का लक्ष्य रखा गया है।
खरखौदा संयंत्र की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि जुलाई की शुरुआत में हरियाणा के आईएमटी खरखौदा में मारुति सुजुकी के सबसे आधुनिक वाहन विनिर्माण संयंत्र का उद्घाटन किया गया था। इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने भारत-जापान संयुक्त आर्थिक मंच के दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए राष्ट्र को समर्पित किया था। करीब 800 एकड़ में फैला यह एकीकृत विनिर्माण परिसर सप्लायर पार्क के साथ विकसित किया गया है, और पूरी क्षमता से संचालन शुरू होने पर इसे दुनिया के सबसे बड़े वाहन निर्माण केंद्रों में शामिल किया जाएगा।
आगे की राह
यह BESS पहल ऐसे समय में आई है जब भारत का ऑटोमोबाइल उद्योग अपने कार्बन फुटप्रिंट को कम करने के लिए नवीकरणीय ऊर्जा एकीकरण की ओर तेज़ी से बढ़ रहा है। मारुति सुजुकी का यह पायलट प्रोजेक्ट भविष्य में कंपनी के अन्य संयंत्रों में इसी तकनीक को विस्तार देने की दिशा में एक परीक्षण आधार के रूप में काम करेगा।