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मारुति सुजुकी का ₹150 करोड़ का बायोगैस निवेश, खरखोदा और मानेसर में ग्रीन एनर्जी को मिलेगी रफ्तार

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मारुति सुजुकी का ₹150 करोड़ का बायोगैस निवेश, खरखोदा और मानेसर में ग्रीन एनर्जी को मिलेगी रफ्तार

सारांश

मारुति सुजुकी ने ₹150 करोड़ के बायोगैस निवेश से साफ़ संकेत दिया है कि देश की सबसे बड़ी कार कंपनी अब सिर्फ गाड़ियाँ नहीं, बल्कि हरित ऊर्जा का भविष्य भी बना रही है। खरखोदा और मानेसर के दोनों प्लांट मिलकर सालाना हज़ारों टन कार्बन उत्सर्जन घटाएंगे — यह भारतीय ऑटो सेक्टर की ESG यात्रा में एक उल्लेखनीय पड़ाव है।

मुख्य बातें

मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड ने 5 जून 2025 को दो बायोगैस परियोजनाओं में ₹150 करोड़ निवेश की घोषणा की।
हरियाणा के खरखोदा में 10 टन प्रति दिन क्षमता का नया बायोगैस प्लांट स्थापित होगा, जो चालू वित्त वर्ष में शुरू होने की उम्मीद है।
खरखोदा प्लांट से प्रति वर्ष 9,490 टन CO₂ उत्सर्जन में कटौती और मैन्युफैक्चरिंग यूनिट की 20% गैस ज़रूरत पूरी होगी।
मानेसर प्लांट की क्षमता 0.2 टन से बढ़ाकर 0.7 टन प्रति दिन की गई; सालाना 664 टन कार्बन कटौती का अनुमान।
MD एवं CEO हिसाशी ताकेउची ने इसे सरकार के जीवाश्म ईंधन निर्भरता घटाने के आह्वान के अनुरूप बताया।

मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड ने 5 जून 2025 को दो बायोगैस परियोजनाओं में कुल ₹150 करोड़ के निवेश की घोषणा की, जिसका उद्देश्य देश में सस्टेनेबल मैन्युफैक्चरिंग और क्लीन एनर्जी को बढ़ावा देना है। इस निवेश के तहत हरियाणा के खरखोदा में एक नया बायोगैस प्लांट स्थापित किया जाएगा और मानेसर के मौजूदा प्लांट का विस्तार किया जाएगा। भारत की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी का यह कदम जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता घटाने की दिशा में एक ठोस प्रयास माना जा रहा है।

खरखोदा में नया बायोगैस प्लांट

कंपनी के अनुसार, खरखोदा स्थित मैन्युफैक्चरिंग प्लांट में 10 टन प्रति दिन की क्षमता वाला नया बायोगैस प्लांट स्थापित किया जाएगा। यह परियोजना चालू वित्त वर्ष में शुरू होने की उम्मीद है। पूरी क्षमता पर संचालन के बाद यह प्लांट प्रति वर्ष लगभग 9,490 टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कटौती करने में सहायक होगा। साथ ही, यह खरखोदा मैन्युफैक्चरिंग यूनिट की कुल गैस आवश्यकता का लगभग 20 प्रतिशत पूरा करेगा।

मानेसर प्लांट का विस्तार

मानेसर स्थित मौजूदा बायोगैस प्लांट की क्षमता 0.2 टन प्रति दिन से बढ़ाकर 0.7 टन प्रति दिन कर दी गई है। विस्तारित प्लांट से प्रति वर्ष लगभग 3.6 लाख मानक घन मीटर बायोगैस उत्पन्न होने का अनुमान है। कंपनी के मुताबिक इससे प्रति वर्ष लगभग 664 टन कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी। इस प्लांट में खाद्य अपशिष्ट, नेपियर घास और धान के भूसे को कच्चे माल के रूप में उपयोग किया जाता है, और पशुओं के गोबर से उत्पादन को और बढ़ाया जा सकता है।

सरकार की नीतियों से तालमेल

मारुति सुजुकी ने कहा है कि ये दोनों पहलें सरकार के 'वेस्ट टू वेल्थ' मिशन के अनुरूप हैं। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार रिन्यूएबल एनर्जी और ग्रीन हाइड्रोजन सहित स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देने पर ज़ोर दे रही है। गौरतलब है कि ऑटोमोबाइल क्षेत्र भारत के कुल औद्योगिक कार्बन उत्सर्जन में एक महत्वपूर्ण हिस्सेदार है, और इस तरह की पहलें उद्योग की ESG प्रतिबद्धताओं को मज़बूत करती हैं।

प्रबंधन की प्रतिक्रिया

इन परियोजनाओं पर टिप्पणी करते हुए कंपनी के प्रबंध निदेशक एवं सीईओ हिसाशी ताकेउची ने कहा कि कंपनी जीवाश्म ईंधन की खपत और आयातित तेल पर निर्भरता कम करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने कहा, "ऐसे समय में जब दुनिया ऊर्जा के बढ़ते अनिश्चित परिदृश्य का सामना कर रही है, ऐसी पहल का महत्व और भी बढ़ जाता है।" ताकेउची ने यह भी कहा, "भारत के प्रधानमंत्री द्वारा जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने के आह्वान के मद्देनजर, हमारे द्वारा बायोगैस प्रोजेक्ट को चालू करने का यह एक सही समय है। यह हमें कई अन्य चल रहे प्रयासों के साथ-साथ वर्तमान राष्ट्रीय प्राथमिकता में एक छोटा लेकिन सार्थक योगदान देने में सक्षम बनाता है।"

आगे की राह

खरखोदा प्लांट के चालू वित्त वर्ष में संचालन शुरू होने की उम्मीद के साथ, मारुति सुजुकी का यह निवेश भारत के ऑटो सेक्टर में हरित ऊर्जा अपनाने की बड़ी प्रवृत्ति का हिस्सा है। विश्लेषकों के अनुसार, यदि यह मॉडल सफल रहा तो कंपनी इसे अपने अन्य उत्पादन केंद्रों तक भी विस्तारित कर सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसे संदर्भ में रखना ज़रूरी है — कंपनी का वार्षिक पूंजीगत व्यय हज़ारों करोड़ में है, इसलिए यह राशि प्रतीकात्मक अधिक और परिवर्तनकारी कम है। असली सवाल यह है कि क्या यह बायोगैस मॉडल कंपनी के सभी उत्पादन केंद्रों तक विस्तारित होगा या सिर्फ दो प्लांट तक सीमित रहेगा। भारतीय ऑटो उद्योग पर EV संक्रमण का दबाव बढ़ रहा है, और ऐसे में मैन्युफैक्चरिंग-स्तर की हरित पहलें ESG रेटिंग सुधारने का एक व्यावहारिक तरीका भी हैं। 'वेस्ट टू वेल्थ' मिशन से जुड़ाव नीतिगत दृष्टि से चतुर है, पर क्रियान्वयन की गति और पारदर्शी कार्बन-लेखांकन ही इस प्रतिबद्धता की असली कसौटी होगी।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मारुति सुजुकी के ₹150 करोड़ के बायोगैस निवेश में क्या शामिल है?
इस निवेश के तहत हरियाणा के खरखोदा में 10 टन प्रति दिन क्षमता का नया बायोगैस प्लांट स्थापित किया जाएगा और मानेसर के मौजूदा प्लांट की क्षमता 0.2 टन से बढ़ाकर 0.7 टन प्रति दिन की जाएगी। दोनों परियोजनाएं मिलकर सालाना हज़ारों टन कार्बन उत्सर्जन कम करने में सहायक होंगी।
खरखोदा बायोगैस प्लांट कब तक शुरू होगा?
कंपनी के अनुसार खरखोदा बायोगैस प्लांट के चालू वित्त वर्ष में शुरू होने की उम्मीद है। पूरी क्षमता पर चलने के बाद यह प्लांट मैन्युफैक्चरिंग यूनिट की कुल गैस आवश्यकता का लगभग 20 प्रतिशत पूरा करेगा।
मारुति सुजुकी के बायोगैस प्लांट से कितना कार्बन उत्सर्जन कम होगा?
खरखोदा प्लांट से प्रति वर्ष लगभग 9,490 टन CO₂ उत्सर्जन में कटौती होने का अनुमान है। मानेसर के विस्तारित प्लांट से अतिरिक्त 664 टन कार्बन उत्सर्जन प्रति वर्ष कम होने की उम्मीद है।
मानेसर बायोगैस प्लांट में किस कच्चे माल का उपयोग होता है?
मानेसर प्लांट में खाद्य अपशिष्ट, नेपियर घास और धान के भूसे को कच्चे माल के रूप में उपयोग किया जाता है। पशुओं के गोबर का उपयोग करके उत्पादन को और बढ़ाया जा सकता है।
मारुति सुजुकी की यह पहल सरकारी नीति से कैसे जुड़ी है?
कंपनी ने इन परियोजनाओं को सरकार के 'वेस्ट टू वेल्थ' मिशन के अनुरूप बताया है। MD एवं CEO हिसाशी ताकेउची ने प्रधानमंत्री के जीवाश्म ईंधन निर्भरता घटाने के आह्वान का हवाला देते हुए इसे राष्ट्रीय प्राथमिकता में योगदान बताया।
राष्ट्र प्रेस
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