मारुति सुजुकी का गुजरात में चौथा प्लांट शुरू, हंसलपुर में अब सालाना 10 लाख वाहन; पहले बनेगी ई-विटारा
सारांश
मुख्य बातें
मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड ने 30 जुलाई 2026 को गुजरात के हंसलपुर स्थित अपने चौथे मैन्युफैक्चरिंग प्लांट में व्यावसायिक उत्पादन की शुरुआत की, जिससे इस परिसर की वार्षिक उत्पादन क्षमता 7.5 लाख से बढ़कर 10 लाख वाहन हो गई है। कंपनी के अनुसार, हंसलपुर अब सुजुकी का विश्व का पहला ऐसा मैन्युफैक्चरिंग परिसर बन गया है जहाँ एक ही स्थान पर प्रतिवर्ष 10 लाख वाहन निर्मित किए जा सकते हैं — और साथ ही यह भारत का सबसे बड़ा सिंगल-लोकेशन पैसेंजर व्हीकल मैन्युफैक्चरिंग कॉम्प्लेक्स भी है।
नए प्लांट में क्या होगा उत्पादन
नए चौथे प्लांट में शुरुआती चरण में कंपनी अपनी पहली बैटरी इलेक्ट्रिक व्हीकल (BEV) — 'ई-विटारा' — का उत्पादन करेगी। यह मारुति सुजुकी की भारत के इलेक्ट्रिक पैसेंजर वाहन बाज़ार में औपचारिक एंट्री है। इसके अलावा हंसलपुर परिसर में फ्रॉन्क्स, बलेनो और स्विफ्ट जैसे मॉडल पहले से बनाए जाते हैं।
निवेश और राष्ट्रीय उत्पादन क्षमता
कंपनी ने हंसलपुर परियोजना में अब तक कुल ₹25,288.7 करोड़ का निवेश किया है, जिसमें नए चौथे प्लांट पर अकेले ₹3,900 करोड़ खर्च किए गए हैं। इस नए प्लांट के चालू होने के बाद मारुति सुजुकी की पूरे भारत में कुल वार्षिक उत्पादन क्षमता बढ़कर 29 लाख वाहन हो गई है।
निर्यात और लॉजिस्टिक्स में अग्रणी भूमिका
हंसलपुर संयंत्र कंपनी के लिए एक प्रमुख एक्सपोर्ट हब के रूप में भी उभरा है। वित्त वर्ष 2025-26 में मारुति सुजुकी के कुल वाहन निर्यात का लगभग 47 प्रतिशत हिस्सा इसी संयंत्र से किया गया। यह ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक ऑटोमोबाइल निर्यात में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।
टिकाऊ लॉजिस्टिक्स के मोर्चे पर कंपनी ने प्रधानमंत्री गतिशक्ति कार्यक्रम के तहत मार्च 2024 में हंसलपुर में भारत की पहली इन-प्लांट रेलवे साइडिंग स्थापित की थी। वाहनों की रेल-ढुलाई मार्च 2023 से शुरू हो चुकी थी और तब से अब तक 7.5 लाख से अधिक वाहन रेल नेटवर्क के ज़रिए भेजे जा चुके हैं, जिससे कार्बन उत्सर्जन, ईंधन खपत और सड़क यातायात का दबाव कम करने में मदद मिली है।
गौरतलब है कि फरवरी 2026 में इस इन-प्लांट रेलवे साइडिंग को Verra के वेरिफाइड कार्बन स्टैंडर्ड (VCS) कार्यक्रम के तहत विश्व की पहली मोडल शिफ्ट परिवहन परियोजना के रूप में पंजीकृत किया गया — जो परिवहन क्षेत्र में कार्बन कटौती की दिशा में एक उल्लेखनीय वैश्विक मान्यता है।
कौशल विकास में निवेश
उत्पादन विस्तार के साथ-साथ मारुति सुजुकी ने गुजरात में मानव संसाधन विकास पर भी ध्यान दिया है। भारत और जापान सरकारों के सहयोग से मेहसाणा और गांधीनगर में दो जापान-भारत विनिर्माण संस्थान (JIM) स्थापित किए गए हैं, जिनमें अब तक 1,200 से अधिक छात्रों को ऑटोमोबाइल उद्योग से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
आगे की राह
ई-विटारा के उत्पादन के साथ मारुति सुजुकी भारत के तेज़ी से बढ़ते इलेक्ट्रिक वाहन बाज़ार में उतरने की तैयारी कर चुकी है, जहाँ टाटा मोटर्स और हुंडई जैसी कंपनियाँ पहले से मौजूद हैं। विश्लेषकों के अनुसार, हंसलपुर की विस्तारित क्षमता और निर्यात केंद्र के रूप में इसकी स्थापित भूमिका कंपनी को घरेलू और वैश्विक दोनों बाज़ारों में मज़बूती देगी।