कार्बी शांति समझौते की तीसरी वर्षगांठ: हिमंत सरमा बोले — संघर्ष से सद्भाव की ओर बढ़ा कार्बी आंगलोंग
सारांश
मुख्य बातें
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने 4 सितंबर 2024 को ऐतिहासिक कार्बी शांति समझौते की वर्षगांठ पर कहा कि इस समझौते ने राज्य के सामाजिक और राजनीतिक परिदृश्य को स्थायी रूप से बदल दिया है। उन्होंने कार्बी आंगलोंग में दशकों से जारी उग्रवाद और अशांति के अंत को इस समझौते की सबसे बड़ी उपलब्धि बताया।
मुख्यमंत्री का संदेश
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए सरमा ने कहा, 'आज हम कार्बी शांति समझौते पर ऐतिहासिक हस्ताक्षर का जश्न मना रहे हैं। यह एक ऐसा अहम पड़ाव जिसने असम के सामाजिक-राजनीतिक परिदृश्य को हमेशा के लिए बदल दिया और संघर्ष से स्थायी सद्भाव की ओर एक नया अध्याय शुरू किया।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि यह समझौता असम की क्षेत्रीय अखंडता से समझौता किए बिना कार्बी लोगों की दीर्घकालिक आकांक्षाओं को पूरा करने में सफल रहा।
समझौते की पृष्ठभूमि
4 सितंबर 2021 को नई दिल्ली में केंद्र सरकार, असम सरकार और कार्बी सशस्त्र समूहों के प्रतिनिधियों के बीच इस समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे। यह ऐसे समय में आया जब कार्बी आंगलोंग के पहाड़ी जिले वर्षों से उग्रवाद और हिंसा की चपेट में थे। गौरतलब है कि इस समझौते को बातचीत और संवैधानिक तंत्र के ज़रिए कार्बी समुदाय की पुरानी माँगों को पूरा करने की दिशा में एक निर्णायक कदम माना गया था।
समझौते के प्रमुख प्रावधान
इस समझौते में सशस्त्र कैडरों का पुनर्वास, कार्बी आंगलोंग स्वायत्त परिषद को अधिक प्रशासनिक और राजनीतिक अधिकार, तथा क्षेत्र के लिए एक विशेष विकास पैकेज शामिल थे। समझौते के बाद विभिन्न कार्बी सशस्त्र समूहों से जुड़े सैकड़ों कैडरों ने हथियार डाल दिए और मुख्यधारा में शामिल हो गए।
विकास की नई राह
सरमा के अनुसार, समझौते के बाद से कार्बी आंगलोंग में बुनियादी ढाँचे का विकास, लक्षित आदिवासी कल्याण कार्यक्रम, युवाओं के लिए अवसर, स्थानीय कला और उद्यमिता को बढ़ावा देने जैसे कदम उठाए गए हैं। उन्होंने कहा कि असम सरकार क्षेत्र के तेज़ विकास और वहाँ के लोगों की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान की रक्षा के प्रति प्रतिबद्ध है।
आगे की राह
मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि बातचीत और संवाद ही एक मज़बूत भविष्य की नींव रखते हैं और कार्बी शांति समझौता इसका 'शानदार उदाहरण' है। यह वर्षगांठ उस भावना को याद दिलाती है जिसने संघर्ष को सद्भाव में बदला — और जो आने वाले वर्षों में क्षेत्र के विकास की प्रेरणा बनी रहेगी।