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कार्बी शांति समझौते की तीसरी वर्षगांठ: हिमंत सरमा बोले — संघर्ष से सद्भाव की ओर बढ़ा कार्बी आंगलोंग

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कार्बी शांति समझौते की तीसरी वर्षगांठ: हिमंत सरमा बोले — संघर्ष से सद्भाव की ओर बढ़ा कार्बी आंगलोंग

सारांश

4 सितंबर 2021 को नई दिल्ली में हस्ताक्षरित कार्बी शांति समझौते की वर्षगांठ पर CM हिमंत सरमा ने इसे असम के सामाजिक-राजनीतिक परिदृश्य का सबसे बड़ा बदलाव बताया। सैकड़ों कैडरों के हथियार डालने से लेकर बुनियादी ढाँचे और आदिवासी कल्याण तक — कार्बी आंगलोंग संघर्ष से सद्भाव की ओर बढ़ा।

मुख्य बातें

CM हिमंत बिस्वा सरमा ने 4 सितंबर 2024 को कार्बी शांति समझौते की वर्षगांठ पर इसे राज्य का ऐतिहासिक मील का पत्थर बताया।
समझौते पर 4 सितंबर 2021 को नई दिल्ली में केंद्र, असम सरकार और कार्बी सशस्त्र समूहों के बीच हस्ताक्षर हुए थे।
समझौते में कार्बी आंगलोंग स्वायत्त परिषद को अधिक अधिकार, सशस्त्र कैडरों का पुनर्वास और विशेष विकास पैकेज शामिल हैं।
समझौते के बाद विभिन्न कार्बी सशस्त्र समूहों के सैकड़ों कैडरों ने हथियार डालकर मुख्यधारा में वापसी की।
सरमा ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि असम सरकार क्षेत्र के विकास और कार्बी सांस्कृतिक पहचान की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने 4 सितंबर 2024 को ऐतिहासिक कार्बी शांति समझौते की वर्षगांठ पर कहा कि इस समझौते ने राज्य के सामाजिक और राजनीतिक परिदृश्य को स्थायी रूप से बदल दिया है। उन्होंने कार्बी आंगलोंग में दशकों से जारी उग्रवाद और अशांति के अंत को इस समझौते की सबसे बड़ी उपलब्धि बताया।

मुख्यमंत्री का संदेश

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए सरमा ने कहा, 'आज हम कार्बी शांति समझौते पर ऐतिहासिक हस्ताक्षर का जश्न मना रहे हैं। यह एक ऐसा अहम पड़ाव जिसने असम के सामाजिक-राजनीतिक परिदृश्य को हमेशा के लिए बदल दिया और संघर्ष से स्थायी सद्भाव की ओर एक नया अध्याय शुरू किया।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि यह समझौता असम की क्षेत्रीय अखंडता से समझौता किए बिना कार्बी लोगों की दीर्घकालिक आकांक्षाओं को पूरा करने में सफल रहा।

समझौते की पृष्ठभूमि

4 सितंबर 2021 को नई दिल्ली में केंद्र सरकार, असम सरकार और कार्बी सशस्त्र समूहों के प्रतिनिधियों के बीच इस समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे। यह ऐसे समय में आया जब कार्बी आंगलोंग के पहाड़ी जिले वर्षों से उग्रवाद और हिंसा की चपेट में थे। गौरतलब है कि इस समझौते को बातचीत और संवैधानिक तंत्र के ज़रिए कार्बी समुदाय की पुरानी माँगों को पूरा करने की दिशा में एक निर्णायक कदम माना गया था।

समझौते के प्रमुख प्रावधान

इस समझौते में सशस्त्र कैडरों का पुनर्वास, कार्बी आंगलोंग स्वायत्त परिषद को अधिक प्रशासनिक और राजनीतिक अधिकार, तथा क्षेत्र के लिए एक विशेष विकास पैकेज शामिल थे। समझौते के बाद विभिन्न कार्बी सशस्त्र समूहों से जुड़े सैकड़ों कैडरों ने हथियार डाल दिए और मुख्यधारा में शामिल हो गए।

विकास की नई राह

सरमा के अनुसार, समझौते के बाद से कार्बी आंगलोंग में बुनियादी ढाँचे का विकास, लक्षित आदिवासी कल्याण कार्यक्रम, युवाओं के लिए अवसर, स्थानीय कला और उद्यमिता को बढ़ावा देने जैसे कदम उठाए गए हैं। उन्होंने कहा कि असम सरकार क्षेत्र के तेज़ विकास और वहाँ के लोगों की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान की रक्षा के प्रति प्रतिबद्ध है।

आगे की राह

मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि बातचीत और संवाद ही एक मज़बूत भविष्य की नींव रखते हैं और कार्बी शांति समझौता इसका 'शानदार उदाहरण' है। यह वर्षगांठ उस भावना को याद दिलाती है जिसने संघर्ष को सद्भाव में बदला — और जो आने वाले वर्षों में क्षेत्र के विकास की प्रेरणा बनी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन वर्षगांठ के भाषण अक्सर ज़मीनी हकीकत से आगे निकल जाते हैं। असली सवाल यह है कि विशेष विकास पैकेज के तहत आवंटित राशि का कितना हिस्सा वास्तव में कार्बी आंगलोंग के दूरदराज़ इलाकों तक पहुँचा और पुनर्वासित कैडरों में से कितने स्थायी रोज़गार से जुड़ पाए। स्वायत्त परिषद को दिए गए नए अधिकारों का व्यावहारिक क्रियान्वयन और केंद्र-राज्य समन्वय की निरंतरता ही इस समझौते की दीर्घकालिक सफलता तय करेगी।
RashtraPress
4 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कार्बी शांति समझौता क्या है?
कार्बी शांति समझौता 4 सितंबर 2021 को नई दिल्ली में केंद्र सरकार, असम सरकार और कार्बी सशस्त्र समूहों के बीच हस्ताक्षरित एक ऐतिहासिक शांति करार है। इसका उद्देश्य कार्बी आंगलोंग में वर्षों से जारी उग्रवाद और हिंसा को समाप्त कर क्षेत्र में स्थायी शांति और विकास स्थापित करना था।
कार्बी शांति समझौते में क्या प्रावधान हैं?
इस समझौते में सशस्त्र कैडरों का पुनर्वास और बसावट, कार्बी आंगलोंग स्वायत्त परिषद को अधिक प्रशासनिक और राजनीतिक अधिकार, तथा क्षेत्र के लिए एक विशेष विकास पैकेज शामिल हैं। समझौते का लक्ष्य कार्बी समुदाय की दीर्घकालिक माँगों को संवैधानिक तंत्र के ज़रिए पूरा करना था।
समझौते के बाद कार्बी आंगलोंग में क्या बदलाव आया?
समझौते के बाद विभिन्न कार्बी सशस्त्र समूहों के सैकड़ों कैडरों ने हथियार डाल दिए और शांति प्रक्रिया में शामिल हो गए। क्षेत्र में बुनियादी ढाँचे का विकास, आदिवासी कल्याण कार्यक्रम और युवाओं के लिए नए अवसर खुले हैं।
हिमंत बिस्वा सरमा ने वर्षगांठ पर क्या कहा?
CM हिमंत बिस्वा सरमा ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि यह समझौता असम के सामाजिक-राजनीतिक परिदृश्य को हमेशा के लिए बदलने वाला मील का पत्थर है। उन्होंने असम सरकार की कार्बी आंगलोंग के विकास और कार्बी समुदाय की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान की रक्षा के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई।
कार्बी आंगलोंग स्वायत्त परिषद की भूमिका क्या है?
कार्बी आंगलोंग स्वायत्त परिषद कार्बी आंगलोंग क्षेत्र का प्रशासनिक निकाय है। शांति समझौते के तहत इसे अतिरिक्त प्रशासनिक और राजनीतिक अधिकार दिए गए, जिससे कार्बी समुदाय को अपने क्षेत्र के शासन में अधिक स्वायत्तता मिली।
राष्ट्र प्रेस
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