8 जुलाई 2026
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झारखंड 'माइन्स' से 'माइंड' की ओर: हेमंत सोरेन ने दिल्ली में IT-AI निवेश सम्मेलन का उद्घाटन किया

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झारखंड 'माइन्स' से 'माइंड' की ओर: हेमंत सोरेन ने दिल्ली में IT-AI निवेश सम्मेलन का उद्घाटन किया

सारांश

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने दिल्ली में स्पष्ट संदेश दिया — राज्य अब सिर्फ खदानों का नहीं, दिमाग का भी केंद्र बनेगा। IT, AI और समावेशी विकास को आधार बनाकर झारखंड अपनी वैश्विक पहचान फिर से गढ़ने की तैयारी में है।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 8 जुलाई 2026 को नई दिल्ली के होटल ताज पैलेस में दो दिवसीय 'नेशनल स्टेकहोल्डर्स कंसल्टेशन' का उद्घाटन किया।
झारखंड को 'माइन्स' से 'माइंड' , 'रिसोर्स' से 'रिसर्च' और 'ग्रोथ' से 'इंक्लूसिव ग्रोथ' की ओर ले जाने का संकल्प।
राज्य के 14 जिलों में खनन गतिविधियाँ अब वैज्ञानिक तरीके से संचालित होंगी; यूरेनियम और माइका भंडारों का रणनीतिक उपयोग प्राथमिकता।
वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) में पहली बार झारखंड की संभावनाएँ वैश्विक मंच पर प्रस्तुत की गईं।
गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, केपीएमजी, ऑरेकल सहित बहुराष्ट्रीय कंपनियों के प्रतिनिधि सम्मेलन में उपस्थित।
सरकार का जोर केवल एमओयू पर नहीं, बल्कि दीर्घकालिक औद्योगिक साझेदारी और IT-AI आधारित रोज़गार सृजन पर।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 8 जुलाई 2026 को नई दिल्ली के होटल ताज पैलेस में आयोजित दो दिवसीय 'नेशनल स्टेकहोल्डर्स कंसल्टेशन' के उद्घाटन सत्र में स्पष्ट किया कि झारखंड अब केवल खनिज संपदा पर निर्भर अर्थव्यवस्था नहीं रहेगा — राज्य सूचना प्रौद्योगिकी (IT), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और नवाचार आधारित उद्योगों की ओर रणनीतिक बदलाव कर रहा है। इस सम्मेलन का उद्देश्य झारखंड में औद्योगिक निवेश के लिए वैश्विक और घरेलू निवेशकों को एक मंच पर लाना है।

मुख्यमंत्री का विज़न: 'माइन्स' से 'माइंड' तक

उद्घाटन सत्र को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए सोरेन ने कहा कि राज्य की नई पहचान अब सिर्फ 'माइन्स' से नहीं, बल्कि 'माइंड' से; सिर्फ 'रिसोर्स' से नहीं, बल्कि 'रिसर्च' से; और सिर्फ 'ग्रोथ' से नहीं, बल्कि 'इंक्लूसिव ग्रोथ' से होगी। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल आर्थिक वृद्धि के आँकड़े बढ़ाना नहीं, बल्कि ऐसा समावेशी विकास सुनिश्चित करना है जिसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे।

वैश्विक मंच पर झारखंड की उपस्थिति

मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) में झारखंड की उपस्थिति दर्ज होने के बाद राज्य अब 'टेक्नोलॉजी गवर्नेंस' के अपने मॉडल के साथ आगे बढ़ने को तैयार है। यह पहली बार था जब WEF जैसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर झारखंड की संभावनाओं और प्राथमिकताओं को वैश्विक दर्शकों के सामने रखा गया। सोरेन ने स्पष्ट किया कि विकास के लिए दूसरे राज्यों की नकल करने के बजाय स्थानीय परिस्थितियों और संसाधनों के अनुरूप नीतियाँ तैयार की जाएंगी।

खनिज संपदा और बौद्धिक पूँजी का संतुलन

सोरेन ने यूरेनियम और माइका जैसे रणनीतिक महत्व के खनिजों का उल्लेख करते हुए कहा कि झारखंड के पास यूरेनियम का इतना बड़ा भंडार है कि देश की दीर्घकालिक ऊर्जा जरूरतों को पूरा किया जा सकता है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि राज्य ने देश को केवल खनिज संपदा ही नहीं, बल्कि बड़ी संख्या में वैज्ञानिक, तकनीकी विशेषज्ञ और प्रशासनिक अधिकारी भी दिए हैं। 14 जिलों में संचालित खनन गतिविधियों को अब वैज्ञानिक तरीके से संचालित करने और 'जल, जंगल और जमीन' के संरक्षण के साथ प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित उपयोग सुनिश्चित करने की बात उन्होंने कही।

निवेश के लिए आधारभूत तैयारी

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार केवल एमओयू पर हस्ताक्षर करने तक सीमित नहीं रहना चाहती। विश्वसनीय बिजली आपूर्ति, मजबूत आधारभूत संरचना, बेहतर परिवहन व्यवस्था, कुशल मानव संसाधन और उद्योग-अनुकूल नीतिगत वातावरण तैयार किया जा रहा है। उद्घाटन सत्र में झारखंड सरकार के मंत्री सुदिव्य कुमार, दीपिका पांडेय सिंह, संजय यादव और इरफान अंसारी के अलावा गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, केपीएमजी और ऑरेकल सहित विभिन्न बहुराष्ट्रीय कंपनियों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

आगे की राह

यह दो दिवसीय सम्मेलन झारखंड की औद्योगिक नीति को नई दिशा देने का अवसर है। गौरतलब है कि यह आयोजन ऐसे समय में हो रहा है जब कई राज्य IT और AI क्षेत्र में निवेश आकर्षित करने की होड़ में हैं। सोरेन सरकार की यह पहल दर्शाती है कि खनिज-समृद्ध राज्य अब तकनीक-आधारित विकास को अपनी प्राथमिकता बना रहे हैं — और इस बदलाव की असली परीक्षा निवेश प्रतिबद्धताओं के ज़मीनी क्रियान्वयन में होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन झारखंड के लिए असली चुनौती क्रियान्वयन की है — राज्य दशकों से खनिज संपदा के बावजूद औद्योगिक पिछड़ेपन से जूझता रहा है। WEF में उपस्थिति और बहुराष्ट्रीय कंपनियों की सम्मेलन में भागीदारी उत्साहजनक संकेत हैं, परंतु IT और AI निवेश के लिए जिस कुशल कार्यबल और डिजिटल अवसंरचना की ज़रूरत है, उसे बनाने में वर्षों लगते हैं। सोरेन सरकार की परीक्षा इस बात में है कि एमओयू से आगे बढ़कर वास्तविक रोज़गार और राजस्व कब और कैसे झारखंड के आदिवासी और ग्रामीण समुदायों तक पहुँचता है।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नेशनल स्टेकहोल्डर्स कंसल्टेशन क्या है और यह कहाँ आयोजित हुआ?
यह झारखंड सरकार द्वारा आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन है जो 8 जुलाई 2026 को नई दिल्ली के होटल ताज पैलेस में शुरू हुआ। इसका उद्देश्य IT, AI और उभरती तकनीकों में वैश्विक और घरेलू निवेशकों को झारखंड में निवेश के लिए आमंत्रित करना है।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का 'माइन्स से माइंड' विज़न क्या है?
सोरेन ने कहा कि झारखंड की पहचान अब केवल खनिज संपदा ('माइन्स') तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि तकनीक, अनुसंधान, नवाचार और समावेशी विकास ('माइंड') पर आधारित नई अर्थव्यवस्था बनेगी। इसमें IT, AI और 'इंक्लूसिव ग्रोथ' को केंद्र में रखा गया है।
झारखंड में किन बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने इस सम्मेलन में भाग लिया?
सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, केपीएमजी और ऑरेकल सहित विभिन्न बहुराष्ट्रीय कंपनियों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। झारखंड सरकार के मंत्री सुदिव्य कुमार, दीपिका पांडेय सिंह, संजय यादव और इरफान अंसारी भी मौजूद थे।
झारखंड के खनिज संसाधनों को लेकर सरकार की क्या योजना है?
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के 14 जिलों में खनन गतिविधियाँ अब वैज्ञानिक तरीके से संचालित होंगी। यूरेनियम और माइका जैसे रणनीतिक खनिजों का आधुनिक तकनीक से अधिकतम और सुरक्षित उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा, साथ ही 'जल, जंगल और जमीन' का संरक्षण भी प्राथमिकता रहेगी।
वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में झारखंड की भागीदारी का क्या महत्व है?
सोरेन के अनुसार, यह पहली बार था जब WEF जैसे वैश्विक मंच पर झारखंड की संभावनाओं और प्राथमिकताओं को दुनिया के सामने रखा गया। इससे राज्य को 'टेक्नोलॉजी गवर्नेंस' के अपने मॉडल के साथ अंतरराष्ट्रीय निवेशकों का ध्यान आकर्षित करने का अवसर मिला है।
राष्ट्र प्रेस
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