30 अगस्त 2026
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जल्लीकट्टू विवाद: टीवीके विधायक करुपैया ने जताया खेद, बोले — बदनाम करने का इरादा नहीं था

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जल्लीकट्टू विवाद: टीवीके विधायक करुपैया ने जताया खेद, बोले — बदनाम करने का इरादा नहीं था

सारांश

टीवीके विधायक करुपैया का जल्लीकट्टू अखाड़े पर दिया गया बयान विवाद में घिरा — उन्होंने खेद जताया, लेकिन सवाल कायम रखा: क्या ₹63 करोड़ का अखाड़ा उस क्षेत्र की बंद चीनी मिल से ज़्यादा ज़रूरी था जहाँ रोज़गार की दरकार है?

मुख्य बातें

टीवीके विधायक करुपैया ने 30 अगस्त 2026 को जल्लीकट्टू पर अपने बयान पर खेद व्यक्त किया।
विधायक ने कहा कि अलंगनल्लूर जल्लीकट्टू मैदान पर कथित तौर पर खर्च ₹63 करोड़ से बंद राष्ट्रीय सहकारी चीनी मिल को पुनर्जीवित किया जा सकता था।
मिल को फिर से खोलने के लिए अनुमानित ₹50 करोड़ की आवश्यकता बताई गई।
करुपैया ने जल्लीकट्टू को तमिल संस्कृति का अभिन्न हिस्सा बताया, लेकिन यूरोपीय स्टेडियम शैली के अखाड़े पर सवाल उठाए।
उन्होंने छात्रों की कक्षाओं से अनुपस्थिति की चिंता जताते हुए कहा कि उनका उद्देश्य युवाओं के शैक्षिक हितों की रक्षा करना था।

तमिलनाडु विधानसभा में जल्लीकट्टू अखाड़े पर दिए गए बयान को लेकर घिरे शोलावंदन निर्वाचन क्षेत्र के टीवीके विधायक करुपैया ने 30 अगस्त 2026 को स्पष्ट किया कि उनका कभी भी इस पारंपरिक तमिल खेल को बदनाम करने का इरादा नहीं था। उन्होंने कहा कि यदि उनकी टिप्पणियों से युवाओं और जल्लीकट्टू समर्थकों की भावनाएं आहत हुई हैं, तो वे खेद व्यक्त करते हैं।

विवाद की पृष्ठभूमि

मदुरै जिले के अलंगनल्लूर के निकट स्थित जल्लीकट्टू मैदान के संबंध में तमिलनाडु विधानसभा में दिए गए भाषण की आलोचना के बाद विधायक ने यह सफाई जारी की। करुपैया ने कहा कि उनके बयान को गलत संदर्भ में समझा गया — उन्होंने खेल पर नहीं, बल्कि सार्वजनिक धन की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाया था।

₹63 करोड़ बनाम बंद चीनी मिल

विधायक के अनुसार, अलंगनल्लूर क्षेत्र में स्थित राष्ट्रीय सहकारी चीनी मिल धन की कमी के चलते बंद पड़ी है। उन्होंने तर्क दिया कि मिल को पुनर्जीवित करने के लिए लगभग ₹50 करोड़ की आवश्यकता है, जबकि जल्लीकट्टू मैदान के निर्माण पर कथित तौर पर ₹63 करोड़ खर्च किए गए। उनका कहना था कि यह राशि मिल को फिर से खोलने में लगाई जाती तो स्थानीय रोज़गार और आर्थिक गतिविधियाँ बहाल होतीं।

सांस्कृतिक स्वरूप पर सवाल

करुपैया ने यह भी पूछा कि क्या स्पेन जैसे यूरोपीय देशों के स्टेडियमों की तर्ज पर बने अखाड़े में जल्लीकट्टू आयोजित करना तमिल सांस्कृतिक परंपराओं के अनुकूल है। उन्होंने कहा कि जल्लीकट्टू को अपना स्वदेशी स्वरूप बनाए रखना चाहिए और उन गाँवों तथा समुदायों से जुड़ा रहना चाहिए जिन्होंने पीढ़ियों से इस खेल को जीवित रखा है।

छात्रों की पढ़ाई पर असर का दावा

विधायक ने दावा किया कि डीएमके की पिछली सरकार के दौरान, अलंगनल्लूर और पलामेडु में पोंगल के मौसम में होने वाले जल्लीकट्टू आयोजनों के बाद नवनिर्मित अखाड़े में एक अतिरिक्त कार्यक्रम भी रखा जाता था। उनके अनुसार, इससे कुछ स्कूली और कॉलेज के छात्र लगातार होने वाले आयोजनों में भाग लेने के लिए कक्षाओं से अनुपस्थित रहने लगते थे।

विधायक का स्पष्टीकरण

करुपैया ने जल्लीकट्टू को ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण और वीरतापूर्ण खेल बताया, जिसकी जड़ें तमिल संस्कृति में गहरी हैं। उन्होंने कहा कि यह खेल उस क्षेत्र से जुड़ा है जहाँ उनका जन्म और पालन-पोषण हुआ, इसलिए इसके सांस्कृतिक महत्व पर उनकी ओर से कोई विवाद नहीं है। विधायक ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य युवाओं को पढ़ाई पूरी करने, डिग्री हासिल करने और बेहतर भविष्य बनाने के लिए प्रेरित करना था। यह देखना बाकी है कि इस स्पष्टीकरण के बाद विवाद थमता है या राजनीतिक बहस और तेज़ होती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ सार्वजनिक खर्च पर कोई भी सवाल सांस्कृतिक अपमान के रूप में व्याख्यायित हो जाता है। असली मुद्दा यह है कि ₹63 करोड़ के अखाड़े और बंद पड़ी चीनी मिल के बीच की प्राथमिकता का सवाल वैध है — लेकिन इसे विधानसभा में उठाने का तरीका राजनीतिक रूप से जोखिम भरा साबित हुआ। यह घटना बताती है कि तमिलनाडु की राजनीति में सांस्कृतिक पहचान और आर्थिक विकास के बीच संतुलन साधना कितना नाज़ुक काम है।
RashtraPress
30 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

टीवीके विधायक करुपैया का जल्लीकट्टू पर विवादित बयान क्या था?
करुपैया ने तमिलनाडु विधानसभा में अलंगनल्लूर जल्लीकट्टू मैदान के निर्माण पर कथित तौर पर खर्च ₹63 करोड़ पर सवाल उठाया था। उन्होंने तर्क दिया कि यह राशि क्षेत्र की बंद राष्ट्रीय सहकारी चीनी मिल को पुनर्जीवित करने में लगाई जा सकती थी।
करुपैया ने खेद क्यों जताया?
उनके बयान की आलोचना के बाद युवाओं और जल्लीकट्टू समर्थकों की भावनाएं आहत होने पर उन्होंने खेद व्यक्त किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका इरादा जल्लीकट्टू को बदनाम करना नहीं, बल्कि सार्वजनिक धन की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाना था।
अलंगनल्लूर की बंद चीनी मिल का मामला क्या है?
विधायक के अनुसार, अलंगनल्लूर क्षेत्र में स्थित राष्ट्रीय सहकारी चीनी मिल धन की कमी के कारण बंद हो गई है। इसे फिर से खोलने के लिए लगभग ₹50 करोड़ की ज़रूरत बताई गई है, जिससे स्थानीय रोज़गार बहाल हो सकते थे।
करुपैया ने जल्लीकट्टू के सांस्कृतिक स्वरूप पर क्या कहा?
उन्होंने कहा कि जल्लीकट्टू को अपना स्वदेशी स्वरूप बनाए रखना चाहिए और उन गाँवों व समुदायों से जुड़ा रहना चाहिए जिन्होंने पीढ़ियों से इसे संरक्षित किया है। उन्होंने स्पेन जैसे यूरोपीय देशों के स्टेडियम शैली के अखाड़े में इसके आयोजन पर सवाल उठाया।
विधायक ने छात्रों के बारे में क्या चिंता जताई?
करुपैया ने दावा किया कि पोंगल के मौसम में अलंगनल्लूर और पलामेडु के बाद नवनिर्मित अखाड़े में अतिरिक्त आयोजन होने से कुछ स्कूली और कॉलेज छात्र कक्षाओं से अनुपस्थित रहने लगते थे। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य युवाओं के शैक्षिक हितों की रक्षा करना था।
राष्ट्र प्रेस
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