नरेंद्र कश्यप का अखिलेश पर पलटवार: 'सपा पहले अपने 5 साल का हिसाब दे, फिर गृह मंत्री को सलाह दे'
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री नरेंद्र कश्यप ने 31 अक्टूबर 2026 को लखनऊ में समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की कानून-व्यवस्था, चुनाव आयोग और भारतीय जनता पार्टी (BJP) को लेकर की गई टिप्पणियों पर कड़ा पलटवार किया। कश्यप ने स्पष्ट कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को सपा की किसी सलाह की आवश्यकता नहीं है।
सपा शासनकाल पर कश्यप के आरोप
अखिलेश यादव ने हाल ही में कहा था कि गृह मंत्री अमित शाह को उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था की समीक्षा करनी चाहिए। इस पर मंत्री कश्यप ने पलटकर कहा कि सपा को दूसरों को सलाह देने से पहले अपने पाँच वर्षों के शासनकाल का आत्म-मूल्यांकन करना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा सरकार के दौरान प्रदेश में मुजफ्फरनगर जैसी दंगों की घटनाएँ हुईं, सड़कों पर गुंडाराज चला और महिलाओं की सुरक्षा से खिलवाड़ किया गया।
कश्यप ने कहा कि जब तक सपा अपने कार्यकाल के इन हालात पर जवाब नहीं देती, उसे गृह मंत्री को सलाह देने का नैतिक अधिकार नहीं है।
2027 चुनाव पर BJP का दावा
अखिलेश यादव के इस बयान पर कि 'पहले प्रदेश और फिर देश से भाजपा को हटाया जाएगा', कश्यप ने इसे 'ख्याली पुलाव' करार दिया। उन्होंने कहा कि गृह मंत्री अमित शाह ने प्रदेश कार्यसमिति में पूरे आत्मविश्वास के साथ स्पष्ट किया है कि 2027 के विधानसभा चुनाव में भाजपा उत्तर प्रदेश में फिर से प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बनाएगी। कश्यप ने दिल्ली, हरियाणा, महाराष्ट्र, बिहार और बंगाल के चुनावी नतीजों का उल्लेख करते हुए कहा कि शाह के राजनीतिक आकलन बार-बार सटीक साबित हुए हैं।
चुनाव आयोग पर अखिलेश के आरोपों को नकारा
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया था कि चुनाव आयोग (ECI) केवल भाजपा समर्थकों को भारतीय नागरिक मानता है। इस पर कश्यप ने तर्क दिया कि चुनाव आयोग के लिए किसी मतदाता की राजनीतिक पहचान जान पाना तकनीकी रूप से असंभव है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी मतदाता भाजपा के अपने हैं, और यदि सपा कुछ मतदाताओं को अपना नहीं मानती, तो वह उसकी अपनी सोच है।
केजीएमयू धर्मांतरण मामला और राम जन्मभूमि विवाद
कश्यप ने केजीएमयू (King George's Medical University) में सामने आए कथित धर्मांतरण के मामले को 'गंभीर और खतरनाक' बताया। उन्होंने कहा कि जिन डॉक्टरों का कर्तव्य समाज सेवा है, उन पर धर्म परिवर्तन से जुड़े आरोप आना चिंताजनक है और संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है। उन्होंने चेतावनी दी कि योगी आदित्यनाथ सरकार के रहते प्रदेश में धर्मांतरण की गतिविधियों को आगे जारी रखना आसान नहीं होगा।
सपा नेता एसटी हसन के राम जन्मभूमि संबंधी बयान पर कश्यप ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के फैसले और अयोध्या में रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा के बाद भी इस तरह के बयान दिए जाना सपा की 'तुष्टिकरण की राजनीति' को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि 2027 के चुनाव में सनातन धर्म में आस्था रखने वाले मतदाता सपा को इसका जवाब देंगे।
1 नवंबर की विपक्षी रैली पर आपत्ति
1 नवंबर 2026 को प्रस्तावित विपक्षी रैली को लेकर कश्यप ने कहा कि गाजियाबाद, गौतमबुद्ध नगर, मेरठ और बागपत के व्यापारियों में इससे नाराजगी है। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली में कांग्रेस और उसके गठबंधन सहयोगी लगातार सड़क जाम और अफरातफरी का माहौल बनाते हैं, जिससे व्यापारियों के कारोबार को नुकसान पहुँचता है। कश्यप ने विपक्षी दलों की संसदीय गतिविधियों पर भी सवाल उठाया — उनके अनुसार, जब संसद चलती है तब विपक्ष बाहर प्रदर्शन करता है और जब नहीं चलती तब 'संसद चलाने का नाटक' किया जाता है।
यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर सत्ता और विपक्ष दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।