28 अक्टूबर 2026
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हरसिमरत कौर बादल का 'मावां-धीआं दी फौज' रैली में आह्वान: पंजाब में नशे के खिलाफ महिलाएं उठाएं आवाज़

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हरसिमरत कौर बादल का 'मावां-धीआं दी फौज' रैली में आह्वान: पंजाब में नशे के खिलाफ महिलाएं उठाएं आवाज़

सारांश

हरसिमरत कौर बादल ने खरड़ में 'मावां-धीआं दी फौज' रैली में पंजाब की महिलाओं को नशे के खिलाफ संगठित किया, AAP सरकार पर विफलता का आरोप लगाया और 2027 में सत्ता आने पर महिला DGP की अगुवाई में STF बनाने का वादा किया।

मुख्य बातें

हरसिमरत कौर बादल ने 28 अक्टूबर 2026 को खरड़ में 'मावां-धीआं दी फौज' रैली को संबोधित किया।
महिलाओं से गाँवों में पारंपरिक 'ठिकरी पहरा' (सामुदायिक निगरानी) शुरू करने की अपील की।
AAP सरकार और मुख्यमंत्री भगवंत मान पर नशा पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदनहीनता का आरोप।
2027 में सत्ता आने पर नशा माफिया के विरुद्ध महिला DGP की अगुवाई में STF गठित करने का वादा।
प्रस्तावित नीति के तहत नशा तस्करों को 10 वर्षों तक जमानत नहीं, संपत्तियाँ जब्त कर पीड़ितों को मुआवजा।

शिरोमणि अकाली दल (SAD) की वरिष्ठ नेता और बठिंडा से सांसद हरसिमरत कौर बादल ने 28 अक्टूबर 2026 को खरड़ में आयोजित 'मावां-धीआं दी फौज' रैली में पंजाब की महिलाओं से नशा तस्करी के विरुद्ध एकजुट होकर संघर्ष करने का आह्वान किया। उन्होंने आम आदमी पार्टी (AAP) की राज्य सरकार पर आरोप लगाया कि वह नशे के बढ़ते कारोबार पर अंकुश लगाने में पूरी तरह नाकाम रही है।

रैली में क्या बोलीं हरसिमरत

हरसिमरत बादल ने कहा कि पंजाब की माताओं और बेटियों के लिए नशे के विरुद्ध लड़ाई एक अत्यंत व्यक्तिगत और भावनात्मक संघर्ष है। उनके अनुसार, राज्य के विभिन्न हिस्सों की महिलाओं ने उनसे मिलकर नशे की वजह से टूट रहे परिवारों और बर्बाद हो रहे युवाओं को बचाने की गुहार लगाई है।

उन्होंने महिलाओं से अपील की कि वे गाँवों और मोहल्लों में पारंपरिक 'ठिकरी पहरा' (सामुदायिक निगरानी प्रणाली) फिर से शुरू करें। उन्होंने कहा कि नशा बेचने वालों और उन्हें संरक्षण देने वालों की पहचान कर प्रशासन को सूचित किया जाए, क्योंकि सामुदायिक सतर्कता और सामूहिक कार्रवाई ही तस्करों को बेनकाब करने का कारगर तरीका है।

सरकार पर गंभीर आरोप

हरसिमरत बादल ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए कहा कि पूरे पंजाब में झोटा और हाल ही में दिवंगत हुए दलजीत सिंह की मौत पर शोक का माहौल है, किंतु आम आदमी पार्टी सरकार का कोई भी नेता शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करने सामने नहीं आया। उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत मान पर भी आरोप लगाया कि उन्होंने नशे से प्रभावित परिवारों से मिलने और उनकी चिंताओं को गंभीरता से लेने में अपेक्षित संवेदनशीलता नहीं दिखाई।

उन्होंने दावा किया कि दलजीत सिंह के मामले में विरोध प्रदर्शन के लिए शव ले जाए जाने के दौरान पुलिस ने हस्तक्षेप किया और परिवार के सदस्यों के साथ कथित तौर पर दुर्व्यवहार किया।

व्हिसलब्लोअर्स की सुरक्षा पर सवाल

हरसिमरत बादल ने कहा कि नशे के विरुद्ध आवाज़ उठाने वाले लोगों को डराने-धमकाने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। उनके अनुसार, सरकार न तो नशा तस्करी रोकने में सफल रही है और न ही शिकायतकर्ताओं तथा व्हिसलब्लोअर्स की सुरक्षा सुनिश्चित कर पा रही है। उन्होंने महिलाओं से डरने या चुप रहने के बजाय जवाबदेही तय कराने के लिए खुलकर आवाज़ उठाने का आग्रह किया।

2027 के लिए अकाली दल के वादे

अकाली दल की नेता ने ऐलान किया कि यदि वर्ष 2027 में उनकी पार्टी सत्ता में आती है तो नशा माफिया के विरुद्ध कार्रवाई के लिए एक विशेष टास्क फोर्स (STF) गठित की जाएगी, जिसकी अगुवाई एक महिला पुलिस महानिदेशक (DGP) करेंगी।

उन्होंने यह भी वादा किया कि नशा तस्करों के विरुद्ध और कठोर कानून बनाए जाएंगे — प्रस्तावित नीति के तहत तस्करों को 10 वर्षों तक जमानत नहीं मिलेगी और उनकी संपत्तियाँ जब्त कर पीड़ित परिवारों को मुआवजा दिया जाएगा। गौरतलब है कि यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब पंजाब में विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ अभी से आकार लेने लगी हैं।

आगे क्या

'मावां-धीआं दी फौज' अभियान के तहत अकाली दल ने महिलाओं को नशा-विरोधी आंदोलन का नेतृत्व सौंपने की रणनीति अपनाई है। पार्टी का लक्ष्य इस अभियान को राज्यभर के गाँवों और शहरी इलाकों में फैलाना है। आने वाले हफ्तों में इसी तरह की और रैलियाँ आयोजित होने की संभावना है, जिससे 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले अकाली दल के जनाधार को नई ऊर्जा मिल सके।

संपादकीय दृष्टिकोण

पर इनकी विश्वसनीयता तभी बनेगी जब पार्टी यह स्पष्ट करे कि पिछली सरकारों में जो नहीं हुआ, वह अब अलग क्यों होगा।
RashtraPress
28 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'मावां-धीआं दी फौज' अभियान क्या है?
यह शिरोमणि अकाली दल द्वारा शुरू किया गया नशा-विरोधी महिला अभियान है, जिसके तहत पंजाब की महिलाओं को नशा तस्करों की पहचान करने, सामुदायिक निगरानी ('ठिकरी पहरा') चलाने और प्रशासन को सूचित करने के लिए संगठित किया जा रहा है। इसकी शुरुआत 28 अक्टूबर 2026 को खरड़ में रैली के साथ हुई।
हरसिमरत कौर बादल ने AAP सरकार पर क्या आरोप लगाए?
हरसिमरत बादल ने आरोप लगाया कि पंजाब में नशे का कारोबार लगातार बढ़ रहा है और सरकार इस पर अंकुश लगाने में विफल रही है। उन्होंने यह भी कहा कि AAP का कोई नेता नशा पीड़ित परिवारों से मिलने नहीं आया और व्हिसलब्लोअर्स को डराया-धमकाया जा रहा है।
अकाली दल ने 2027 में सत्ता आने पर नशे के खिलाफ क्या वादे किए हैं?
अकाली दल ने वादा किया है कि 2027 में सरकार बनने पर एक विशेष टास्क फोर्स (STF) गठित की जाएगी जिसकी अध्यक्षता एक महिला DGP करेंगी। इसके अलावा, नशा तस्करों को 10 वर्षों तक जमानत न मिले और उनकी संपत्तियाँ जब्त कर पीड़ित परिवारों को मुआवजा दिया जाए — ऐसे सख्त कानून बनाने का भी वादा किया गया है।
'ठिकरी पहरा' क्या होता है और यह कैसे काम करता है?
'ठिकरी पहरा' पंजाब की पारंपरिक सामुदायिक निगरानी प्रणाली है जिसमें ग्रामीण बारी-बारी से रात को गाँव की रखवाली करते हैं। हरसिमरत बादल ने इसे नशा तस्करों पर नज़र रखने और संदिग्ध गतिविधियों की सूचना प्रशासन को देने के लिए पुनर्जीवित करने का सुझाव दिया है।
दलजीत सिंह के मामले में हरसिमरत ने क्या दावा किया?
हरसिमरत बादल ने दावा किया कि हाल ही में दिवंगत दलजीत सिंह के परिवार के शव को विरोध प्रदर्शन के लिए ले जाए जाने के दौरान पुलिस ने हस्तक्षेप किया और परिवार के सदस्यों के साथ कथित तौर पर दुर्व्यवहार किया। उन्होंने सरकार से इस परिवार को न्याय दिलाने की मांग की।
राष्ट्र प्रेस
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