बांदीपोरा में एंटी-फिदायीन मॉक ड्रिल: पुलिस और 13 राष्ट्रीय राइफल्स ने परखी आतंकी हमले से निपटने की तैयारी
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर के बांदीपोरा में 31 अक्टूबर 2026 को जिला पुलिस और 13 राष्ट्रीय राइफल्स (आरआर) ने अरागम में एक संयुक्त एंटी-फिदायीन मॉक ड्रिल आयोजित की, जिसका उद्देश्य आत्मघाती आतंकी हमले जैसी आपात स्थिति में सुरक्षा बलों की ऑपरेशनल तैयारी, अंतर-एजेंसी तालमेल और त्वरित आपातकालीन प्रतिक्रिया क्षमता को जाँचना था। यह अभ्यास ऐसे समय में हुआ जब जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बल अपनी परिचालन क्षमता को निरंतर पैना करने में जुटे हैं।
मॉक ड्रिल में क्या हुआ
अरागम पुलिस स्टेशन, 13 राष्ट्रीय राइफल्स और अन्य संबद्ध एजेंसियों के जवानों ने इस संयुक्त अभ्यास में हिस्सा लिया। एक काल्पनिक परिदृश्य में एक आतंकवादी को निर्माणाधीन इमारत में घेरा गया, तय प्रोटोकॉल के अनुसार उसे बेअसर किया गया और इसके बाद पूरे इलाके की गहन तलाशी ली गई।
तलाशी अभियान में संदिग्ध विस्फोटक सामग्री का पता लगाने पर विशेष ध्यान दिया गया। इसके साथ ही मेडिकल रिस्पॉन्स और घायलों के प्रबंधन की क्षमता भी परखी गई, जिसमें एम्बुलेंस की तैनाती और काल्पनिक रूप से घायल व्यक्तियों को संभालने की प्रक्रिया शामिल थी।
ब्रीफिंग और डीब्रीफिंग सत्र
परिसर की पूर्ण तलाशी, उसे सुरक्षित घोषित करने और साफ-सफाई के बाद यह ड्रिल सफलतापूर्वक संपन्न हुई। इसके बाद एक विस्तृत ब्रीफिंग और डीब्रीफिंग सत्र आयोजित किया गया, जिसमें सभी शामिल कर्मियों के प्रदर्शन का मूल्यांकन किया गया और सुधार की गुंजाइश वाले क्षेत्रों की पहचान की गई।
गौरतलब है कि इस तरह के संयुक्त अभ्यास अंतर-एजेंसी संचार और त्वरित प्रतिक्रिया में आने वाली व्यावहारिक बाधाओं को उजागर करने में अहम भूमिका निभाते हैं, जो वास्तविक अभियानों में अक्सर जानमाल के नुकसान का कारण बनती हैं।
सुरक्षा तैयारी का संदर्भ
बांदीपोरा जिला जम्मू-कश्मीर के उन संवेदनशील क्षेत्रों में आता है जहाँ सुरक्षा बल नियमित रूप से आतंकवाद-रोधी गतिविधियाँ संचालित करते हैं। बांदीपोरा जिला पुलिस के अनुसार, इस अभ्यास ने एजेंसियों के बीच आपसी तालमेल को और मज़बूत किया है तथा किसी भी आपात स्थिति में प्रभावी प्रतिक्रिया देने की प्रतिबद्धता को दोहराया है।
यह आयोजन केवल प्रशिक्षण तक सीमित नहीं था — यह उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत केंद्र और राज्य की सुरक्षा एजेंसियाँ संयुक्त रूप से अपनी परिचालन क्षमता को परखती और परिष्कृत करती रहती हैं।
आगे की दिशा
इस ड्रिल से मिले सबक और डीब्रीफिंग में उठाए गए बिंदुओं के आधार पर सुरक्षा बल अपनी प्रतिक्रिया प्रक्रियाओं को और बेहतर बनाएँगे। भविष्य में ऐसे और अभ्यास आयोजित किए जाने की उम्मीद है ताकि जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा तंत्र की समन्वित क्षमता लगातार मज़बूत बनी रहे।