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जैश-ए-मोहम्मद का AI डीपफेक दांव: मसूद अजहर के नकली वीडियो से भर्ती बढ़ाने की कोशिश

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जैश-ए-मोहम्मद का AI डीपफेक दांव: मसूद अजहर के नकली वीडियो से भर्ती बढ़ाने की कोशिश

सारांश

ऑपरेशन सिंदूर के बाद बहावलपुर मुख्यालय तबाह और भर्ती ठप — जैश-ए-मोहम्मद अब मसूद अजहर के AI डीपफेक वीडियो के ज़रिये संगठन को ज़िंदा रखने की कोशिश कर रहा है। निशाने पर हैं ग्रामीण और कम शिक्षित युवा, जहाँ नकली और असली वीडियो में फ़र्क करना मुश्किल है।

मुख्य बातें

जैश-ए-मोहम्मद ने मसूद अजहर के AI-जनित डीपफेक ऑडियो-वीडियो के ज़रिये भर्ती अभियान शुरू किया है।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद बहावलपुर स्थित जैश का मुख्यालय नष्ट हुआ; मसूद अजहर के कई करीबी रिश्तेदार और अनेक आतंकी मारे गए।
AI वीडियो में अजहर को सक्रिय नेता के रूप में दिखाया गया है — नई भर्ती के लिए अपील और भारत के खिलाफ जिहाद का आह्वान।
निशाना कम शिक्षित युवाओं और ग्रामीण व आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्गों पर, जहाँ AI जागरूकता कम है।
खुफिया एजेंसियों के अनुसार जैश भारत के ग्रामीण इलाकों में क्षेत्रीय भाषाओं में भी AI प्रचार फैलाने की योजना बना रहा है।
अधिकारियों का मानना है कि यह अभियान नए नेतृत्व की तलाश पूरी होने तक समय खरीदने की रणनीति भी है।

पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) ने अपने प्रमुख मसूद अजहर के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से तैयार नकली ऑडियो और वीडियो क्लिप के ज़रिये भर्ती अभियान को नई गति देने की कोशिश शुरू की है। खुफिया एजेंसियों के अनुसार, यह कदम ऑपरेशन सिंदूर के बाद संगठन में आई भारी गिरावट की भरपाई के लिए उठाया गया है, जिसमें जैश के बहावलपुर स्थित मुख्यालय को नष्ट कर दिया गया था और मसूद अजहर के कई करीबी रिश्तेदारों सहित अनेक आतंकी मारे गए थे।

AI डीपफेक अभियान की पृष्ठभूमि

खुफिया एजेंसियों के अनुसार, इस्लामिक स्टेट (ISIS) और अल-कायदा उन शुरुआती आतंकी संगठनों में शामिल हैं जिन्होंने AI तकनीक को अपने प्रचार अभियानों में अपनाया। इसके विपरीत, लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद अब तक पारंपरिक संचार और भर्ती के तरीकों पर निर्भर रहे थे।

गौरतलब है कि पहलगाम हमले में निर्दोष पर्यटकों की मौत के बाद भारतीय सशस्त्र बलों ने ऑपरेशन सिंदूर चलाया, जिसके बाद जैश के शीर्ष नेतृत्व ने सार्वजनिक रूप से सामने आना बंद कर दिया। इससे संगठन की भर्ती प्रक्रिया को गहरा झटका लगा।

मसूद अजहर की 'अनुपस्थिति' और भर्ती संकट

इंटेलिजेंस ब्यूरो के एक अधिकारी के अनुसार, मसूद अजहर के लंबे समय से सार्वजनिक रूप से नज़र न आने से संभावित भर्ती होने वाले युवाओं में संशय बढ़ गया। कई लोग यह प्रमाण माँग रहे थे कि अजहर अभी भी सक्रिय है, लेकिन भर्ती करने वाले उनके सवालों का संतोषजनक जवाब देने में विफल रहे।

अधिकारी ने बताया, 'मनोबल बढ़ाने और नई भर्ती के लिए जो ऑडियो-वीडियो क्लिप प्रसारित किए गए थे, उन्हें पुराने और दोबारा इस्तेमाल किए गए वीडियो बताया गया। इसके बाद जैश ने अपनी छवि बदलने के लिए AI का बड़े पैमाने पर उपयोग करने का फैसला किया।'

AI वीडियो की रणनीति और निशाना

कथित तौर पर, AI की मदद से तैयार किए गए इन वीडियो में मसूद अजहर को नई भर्ती के लिए अपील करते और भारत के खिलाफ जिहाद का आह्वान करते हुए दिखाया गया है। एक अन्य अधिकारी ने बताया कि AI तकनीक के तेज़ी से विकसित होने के कारण आम कार्यकर्ताओं या संभावित भर्ती होने वाले लोगों के लिए असली और नकली सामग्री में फ़र्क करना मुश्किल हो गया है।

अधिकारी के अनुसार, 'यह अभियान खासतौर पर कम शिक्षित कार्यकर्ताओं और संभावित भर्ती युवाओं को ध्यान में रखकर चलाया गया है। ऐसा जानबूझकर किया गया क्योंकि इनके लिए वीडियो की सच्चाई की जाँच करना या तथ्य सत्यापित करना आसान नहीं होता।' जैश ने जानबूझकर ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्गों को निशाना बनाया है, जहाँ जेनेरेटिव AI जैसी तकनीकों के बारे में जागरूकता अपेक्षाकृत कम है।

भविष्य की योजना और नेतृत्व संकट

खुफिया अधिकारियों के अनुसार, जैश यह भी समझता है कि मसूद अजहर का स्वास्थ्य अब पहले जैसा नहीं है और वह अग्रिम मोर्चे से नेतृत्व करने की स्थिति में नहीं है। संगठन पाकिस्तान के साथ-साथ भारत के ग्रामीण इलाकों में भी AI-आधारित प्रचार अभियान चलाने की योजना बना रहा है, जिसमें अलग-अलग क्षेत्रों और स्थानीय भाषाओं के अनुसार वीडियो तैयार किए जाएंगे।

एक अधिकारी के अनुसार, 'AI से तैयार वीडियो के ज़रिये जैश न केवल अपनी भर्ती बढ़ाना चाहता है, बल्कि नए नेतृत्व की तलाश पूरी होने तक समय भी हासिल करना चाहता है।' यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर AI-जनित दुष्प्रचार के ख़िलाफ़ नीतिगत ढाँचा अभी भी अपरिपक्व है, जिससे इस तरह के अभियानों को रोकना और भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो अपने सबसे बड़े प्रतीक की अनुपस्थिति को छुपाने की कोशिश कर रहा है। चिंताजनक पहलू यह है कि भारत में ग्रामीण और कम शिक्षित तबकों को निशाना बनाने की यह रणनीति उस नीतिगत खालीपन को उजागर करती है जहाँ AI साक्षरता और डिजिटल जागरूकता अभियान अभी भी पर्याप्त नहीं हैं। वैश्विक स्तर पर ISIS और अल-कायदा पहले ही यह रास्ता दिखा चुके हैं — भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के लिए असली परीक्षा केवल इन वीडियो की पहचान करना नहीं, बल्कि उनके प्रसार को रोकने और संभावित भर्ती लक्ष्यों तक सही जानकारी पहुँचाने की है।
RashtraPress
31 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जैश-ए-मोहम्मद के AI डीपफेक अभियान का मकसद क्या है?
खुफिया एजेंसियों के अनुसार, जैश-ए-मोहम्मद ने मसूद अजहर के AI-जनित नकली वीडियो और ऑडियो के ज़रिये यह संदेश देने की कोशिश की है कि वह अभी भी सक्रिय है। इसका मुख्य उद्देश्य ऑपरेशन सिंदूर के बाद घटी भर्ती को फिर से बढ़ाना और कार्यकर्ताओं का मनोबल ऊँचा रखना है।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद जैश को क्या नुकसान हुआ था?
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान बहावलपुर स्थित जैश का मुख्यालय नष्ट कर दिया गया था और मसूद अजहर के कई करीबी रिश्तेदारों सहित अनेक आतंकी मारे गए थे। इसके बाद संगठन का शीर्ष नेतृत्व सार्वजनिक रूप से सामने आना बंद हो गया, जिससे भर्ती अभियान को गहरा झटका लगा।
जैश के AI वीडियो का निशाना कौन है?
अधिकारियों के अनुसार, यह अभियान खासतौर पर कम शिक्षित युवाओं और ग्रामीण व आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्गों को ध्यान में रखकर चलाया गया है। इन इलाकों में जेनेरेटिव AI जैसी तकनीकों के बारे में जागरूकता कम होने के कारण नकली और असली सामग्री में फ़र्क करना मुश्किल होता है।
क्या अन्य आतंकी संगठन भी AI का इस्तेमाल करते हैं?
हाँ, खुफिया एजेंसियों के अनुसार इस्लामिक स्टेट (ISIS) और अल-कायदा पहले से ही AI तकनीक का इस्तेमाल अपने प्रचार अभियानों में कर रहे हैं। जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा अब तक पारंपरिक तरीकों पर निर्भर थे, लेकिन अब जैश ने भी इस दिशा में कदम बढ़ाया है।
जैश का भविष्य का AI प्रचार अभियान कैसा होगा?
खुफिया अधिकारियों के अनुसार, जैश पाकिस्तान के साथ-साथ भारत के ग्रामीण इलाकों में भी AI-आधारित प्रचार फैलाने की योजना बना रहा है। इसके तहत अलग-अलग क्षेत्रों और स्थानीय भाषाओं के अनुसार मसूद अजहर के वीडियो तैयार किए जाएंगे।
राष्ट्र प्रेस
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