सुधांशु त्रिवेदी का कांग्रेस पर हमला: मॉक पार्लियामेंट 'राजनीतिक तमाशा', विश्व बैंक के आंकड़ों से मिला जवाब
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं राज्यसभा सांसद डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने 31 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में मीडिया को संबोधित करते हुए कांग्रेस के मॉक पार्लियामेंट आयोजन को 'राजनीतिक तमाशा' करार दिया और कहा कि विश्व बैंक की 2025 की रिपोर्ट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की गरीबी उन्मूलन की उपलब्धियों को स्वयं मान्यता दी है। त्रिवेदी का यह बयान उस समय आया जब कांग्रेस ने अपना मॉक पार्लियामेंट सत्र आयोजित किया था।
विश्व बैंक के आंकड़े — मुख्य दावे
डॉ. त्रिवेदी ने कहा कि विश्व बैंक की 2025 रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 2011 से 2023 के बीच अत्यधिक गरीबी 27.6 प्रतिशत से घटकर मात्र 2.6 प्रतिशत रह गई है। उन्होंने यह भी बताया कि करीब 13-14 वर्ष पहले भारत की 57 प्रतिशत आबादी की दैनिक आय 2 डॉलर से कम थी, जबकि आज प्रतिदिन ₹400 से कम कमाने वाले लोग घटकर केवल 16 प्रतिशत रह गए हैं।
इसका अर्थ है कि आज भारत की 84 प्रतिशत आबादी प्रतिदिन ₹400 से अधिक कमाती है। त्रिवेदी के अनुसार, यह आंकड़े विश्व बैंक की स्वतंत्र स्वीकृति हैं और इन्हें नकारा नहीं जा सकता।
गिनी इंडेक्स और आर्थिक समानता
डॉ. त्रिवेदी ने आगे बताया कि अगस्त 2025 में विश्व बैंक द्वारा जारी गिनी इंडेक्स में भारत का स्कोर 22.5 रहा, जिसके आधार पर भारत आर्थिक समानता के मामले में दुनिया में चौथे स्थान पर रहा। उन्होंने कहा कि उस समय G7 और G20 के किसी भी देश में भारत की तुलना में आर्थिक असमानता कम नहीं थी।
मॉक पार्लियामेंट पर BJP का आरोप
डॉ. त्रिवेदी ने कहा कि भारत में अराजकता फैलाने के मंसूबों में नाकाम रहने के बाद कांग्रेस पार्टी ने मॉक पार्लियामेंट का आयोजन किया, जो उनके अनुसार कांग्रेस नेता राहुल गांधी को 'खुश' करने का एक राजनीतिक उपक्रम मात्र है। उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि इस आयोजन के ठीक उसी समय विश्व बैंक के ठोस आंकड़े सामने आए, जिन्होंने इस 'फसाने' की हकीकत उजागर कर दी।
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब भाजपा ने कांग्रेस के किसी जन-जागरूकता अभियान को 'नाटक' या 'तमाशा' कहा हो। पार्टी लंबे समय से यह रेखा खींचती आई है कि विपक्ष की आलोचना नीतिगत विकल्प पर नहीं, बल्कि राजनीतिक दुराग्रह पर आधारित है।
राहुल गांधी के पुराने बयानों का हवाला
त्रिवेदी ने अगस्त 2013 में राहुल गांधी द्वारा कथित तौर पर दिए गए उस बयान का उल्लेख किया जिसमें उन्होंने 'गरीबी को महज एक मानसिकता' कहा था। साथ ही, उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के उस कथन का भी संदर्भ दिया कि 'पैसे पेड़ों पर नहीं उगते।' त्रिवेदी ने तर्क दिया कि ऐसी सोच और प्रधानमंत्री मोदी की नीति-आधारित प्रतिबद्धता में 'जमीन-आसमान का अंतर' है।
एलन मस्क प्रकरण का जिक्र
त्रिवेदी ने कहा कि जो लोग भारत की अर्थव्यवस्था को 'मृत' बताते थे, वही लोग दुनिया के जाने-माने उद्योगपति एलन मस्क को भारत आने का निमंत्रण भी दे रहे हैं। उन्होंने व्यंग्य किया कि यदि उन्हें वाकई ऐसा लगता है तो उन्हें मस्क से कहना चाहिए था कि 'भारत एक मृत अर्थव्यवस्था है, आप यहाँ क्यों आ रहे हैं?' उनके अनुसार यह विरोधाभास दर्शाता है कि भारत की अर्थव्यवस्था नहीं, बल्कि विरोधियों का 'जमीर' मर चुका है।
आने वाले दिनों में भाजपा और कांग्रेस के बीच इस विमर्श के और तेज होने की संभावना है, खासकर तब जब संसद सत्र और राज्य चुनावों की तैयारियाँ एक साथ चल रही हों।