31 अक्टूबर 2026
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गांधीनगर: दिवाली 'किस्त' के नाम पर ₹22,000 रिश्वत लेते पशु निरीक्षक एसीबी के जाल में गिरफ्तार

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गांधीनगर: दिवाली 'किस्त' के नाम पर ₹22,000 रिश्वत लेते पशु निरीक्षक एसीबी के जाल में गिरफ्तार

सारांश

गांधीनगर में दिवाली की 'किस्त' के नाम पर भ्रष्टाचार का एक और मामला सामने आया — आउटसोर्स पशु निरीक्षक ने मवेशी न पकड़ने की एवज़ में ₹40,000 माँगे, बातचीत के बाद ₹22,000 पर सहमति बनी, और एसीबी के जाल में रंगे हाथ पकड़ा गया।

मुख्य बातें

जयदीपसिंह राजपूत , गांधीनगर नगर निगम का आउटसोर्स पशु निरीक्षक , 30 अक्टूबर 2026 को एसीबी के जाल में गिरफ्तार।
आरोपी ने पशुपालक व्यवसायी से पहले ₹40,000 माँगे, बाद में बातचीत कर ₹22,000 पर सहमति जताई।
रिश्वत को दिवाली त्योहार की 'किस्त' के रूप में माँगा गया था।
जाल गांधीनगर के सेक्टर 28 में बिछाया गया; पुलिस इंस्पेक्टर एम.
सोलंकी ने ऑपरेशन का नेतृत्व किया।
अगस्त 2022 में भी इसी विभाग के दो आउटसोर्स कर्मचारी ₹15,000 रिश्वत मामले में पकड़े गए थे।
राजपूत के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज।

गांधीनगर नगर निगम में आउटसोर्सिंग के ज़रिये तैनात 22 वर्षीय पशु निरीक्षक जयदीपसिंह राजपूत को भ्रष्टाचार विरोधी ब्यूरो (एसीबी) ने 30 अक्टूबर 2026 को एक पशुपालक व्यवसायी से ₹22,000 रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया। आरोपी ने यह राशि दिवाली त्योहार की 'किस्त' के रूप में माँगी थी — मवेशियों को न पकड़ने और पशुपालक के खिलाफ मामला दर्ज न करने के एवज़ में।

मुख्य घटनाक्रम

जयदीपसिंह राजपूत गांधीनगर नगर निगम के पशु उपद्रव नियंत्रण विभाग (सीएनसीडी) में पशुधन निरीक्षक (श्रेणी तृतीय) के पद पर एक आउटसोर्सिंग एजेंसी के माध्यम से नियुक्त था। एसीबी के अनुसार, उसने शुरुआत में शिकायतकर्ता पशुपालक व्यवसायी से कथित तौर पर ₹40,000 की मांग रखी — यह राशि उसके मवेशियों को न पकड़ने और उसके विरुद्ध कोई कार्रवाई न करने के बदले में माँगी गई थी। बातचीत के बाद यह माँग घटाकर ₹22,000 कर दी गई।

पशुपालक ने रिश्वत देने से इनकार करते हुए गांधीनगर एसीबी में शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद एसीबी ने जाल बिछाने की योजना बनाई।

जाल और गिरफ्तारी

यह जाल 30 अक्टूबर 2026 को गांधीनगर के सेक्टर 28 में एक बगीचे के पीछे सड़क के निकट बिछाया गया। एसीबी के अनुसार, राजपूत ने शिकायतकर्ता से मुलाकात की और ₹22,000 स्वीकार किए। इसी दौरान एसीबी टीम ने उसे मौके पर ही दबोच लिया और पूरी रकम बरामद कर ली। गांधीनगर एसीबी पुलिस स्टेशन के पुलिस इंस्पेक्टर एम. एम. सोलंकी ने इस ऑपरेशन का नेतृत्व किया।

पूर्व घटना — पैटर्न की पुनरावृत्ति

गौरतलब है कि यह गांधीनगर नगर निगम की पशु-पकड़ने वाली टीम से जुड़ा कोई पहला मामला नहीं है। अगस्त 2022 में एसीबी ने इसी विभाग के दो आउटसोर्स कर्मचारियों — मनोज उर्फ बबलू शनाजी ठाकोर और बंटी जयंतीभाई वाघेला — को एक पशुपालक से कथित तौर पर ₹15,000 रिश्वत लेते हुए पकड़ा था। वह राशि पाँच व्यक्तियों के बीच ₹5,000 प्रति व्यक्ति के हिसाब से बाँटी जानी थी। एसीबी ने उन दोनों के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया था।

यह ऐसे समय में आया है जब आउटसोर्स कर्मचारियों पर निगरानी और जवाबदेही की व्यवस्था को लेकर सवाल उठते रहे हैं। दोनों मामलों में आरोपी आउटसोर्सिंग एजेंसियों के ज़रिये नियुक्त थे, जो नियंत्रण की कमज़ोरी को उजागर करता है।

कानूनी स्थिति और आगे की कार्रवाई

एसीबी ने वर्तमान मामले में जयदीपसिंह राजपूत के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज कर लिया है। अधिकारियों के अनुसार जाँच जारी है और मामले में आगे की कार्यवाही की जाएगी। आउटसोर्सिंग एजेंसी की भूमिका की समीक्षा भी प्रक्रिया का हिस्सा हो सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि नगर निकायों में आउटसोर्सिंग मॉडल की जवाबदेही पर एक गंभीर सवाल है — 2022 में भी इसी विभाग में यही दोहराया गया था, और अब फिर। जब एजेंसी के ज़रिये रखे गए कर्मचारी नागरिकों से सीधे रिश्वत माँगते हैं और 'त्योहारी किस्त' जैसी भाषा का इस्तेमाल करते हैं, तो यह संकेत देता है कि भ्रष्टाचार व्यवस्थागत हो चुका है, न कि छिटपुट। जब तक आउटसोर्स कर्मचारियों पर निगरानी और जवाबदेही की स्पष्ट संरचना नहीं बनती, एसीबी की छापेमारियाँ लक्षण का इलाज करती रहेंगी, बीमारी का नहीं।
RashtraPress
31 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गांधीनगर पशु निरीक्षक रिश्वत मामला क्या है?
गांधीनगर नगर निगम के आउटसोर्स पशु निरीक्षक जयदीपसिंह राजपूत को 30 अक्टूबर 2026 को एसीबी ने एक पशुपालक से ₹22,000 रिश्वत लेते पकड़ा। आरोपी ने मवेशियों को न पकड़ने और मामला दर्ज न करने की एवज़ में यह रकम दिवाली 'किस्त' के नाम पर माँगी थी।
एसीबी का जाल कहाँ और कैसे बिछाया गया?
एसीबी ने 30 अक्टूबर 2026 को गांधीनगर के सेक्टर 28 में एक बगीचे के पीछे सड़क के पास जाल बिछाया। पुलिस इंस्पेक्टर एम. एम. सोलंकी के नेतृत्व में टीम ने आरोपी को ₹22,000 स्वीकार करते ही रंगे हाथों गिरफ्तार कर पूरी रकम बरामद कर ली।
आरोपी ने शुरुआत में कितनी रिश्वत माँगी थी?
एसीबी के अनुसार, आरोपी जयदीपसिंह राजपूत ने शुरू में पशुपालक से ₹40,000 की माँग रखी थी। बातचीत के बाद यह राशि घटाकर ₹22,000 पर तय हुई, जिसे 'दिवाली किस्त' भी कहा गया।
क्या इस विभाग में पहले भी रिश्वत का मामला आया है?
हाँ, अगस्त 2022 में इसी नगर निगम की पशु-पकड़ने वाली टीम के दो आउटसोर्स कर्मचारी — मनोज उर्फ बबलू ठाकोर और बंटी वाघेला — ₹15,000 रिश्वत मामले में एसीबी द्वारा पकड़े गए थे। दोनों के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया था।
आरोपी के विरुद्ध क्या कानूनी कार्रवाई की गई है?
एसीबी ने जयदीपसिंह राजपूत के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किया है। मामले की जाँच जारी है और अधिकारियों के अनुसार आगे की कार्यवाही की जाएगी।
राष्ट्र प्रेस
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