धनंजय सिंह बोले: यूपी का बंटवारा नहीं, मजबूत प्रशासन से होगा विकास; जन एकता यात्रा में युवाओं को आह्वान
सारांश
मुख्य बातें
जौनपुर में पूर्व सांसद धनंजय सिंह ने 31 अक्टूबर 2026 को सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती पर 'जन एकता यात्रा' का नेतृत्व करते हुए स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश के विभाजन की बजाय सुदृढ़ प्रशासनिक व्यवस्था से ही राज्य का समग्र विकास संभव है। उन्होंने युवाओं से राष्ट्रवादी बनने, योग-व्यायाम अपनाने और ज्ञान अर्जित करने का आग्रह किया।
यात्रा का उद्देश्य और युवाओं से अपील
पूर्व सांसद धनंजय सिंह ने कहा, 'युवा राष्ट्रवादी बनें, शक्तिशाली बनें, ताकतवर बनें, व्यायाम करें, योग करें और ज्ञान अर्जित करें।' उनके अनुसार भारत के पास लगभग 40 करोड़ युवाओं की आबादी है, जो अत्यंत संभावनाशील है और जिसे सही दिशा एवं चरित्र निर्माण की आवश्यकता है। इसी उद्देश्य से राष्ट्रवादी नौजवान सभा की स्थापना की गई है, जिसके तहत 10,000 से 25,000 राष्ट्र-समर्पित युवाओं का संगठित समूह तैयार किया जाएगा।
उन्होंने जोड़ा कि चरित्र निर्माण को केवल एक ही कोण से नहीं देखना चाहिए — बल्कि युवाओं में यह सोच विकसित होनी चाहिए कि वे समाज और राष्ट्र के उत्थान में किस प्रकार योगदान दे सकते हैं।
यूपी विभाजन पर स्पष्ट मत
उत्तर प्रदेश के बंटवारे की माँग पर धनंजय सिंह ने कहा कि राज्यों का लगातार विभाजन विकास का मॉडल नहीं हो सकता। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि उत्तराखंड का अलगाव एक लंबे जन-आंदोलन और जनभावना का परिणाम था, परंतु आज उत्तर प्रदेश के विभाजन की माँग प्रमुखता से नहीं उठती और वे स्वयं भी इसके पक्ष में नहीं हैं।
उनके अनुसार यदि प्रशासनिक व्यवस्था मजबूत हो तो बिना किसी राज्य-विभाजन के भी विकास का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। जिले विकास और प्रशासनिक सुविधा के लिए होते हैं, न कि राज्य-विभाजन की सीढ़ी।
राजनीतिक परिदृश्य और चुनाव सुधार पर विचार
जातीय समीकरणों पर आधारित राजनीति के संबंध में उन्होंने कहा कि ऐसी राजनीति का दौर अब समाप्त होने की ओर है। कांग्रेस का उल्लेख करते हुए कहा कि पारिवारिक वर्चस्व से बाहर निकलने के बाद उसमें कुछ सुधार दिखाई दिया है।
चुनाव सुधारों पर उन्होंने चुनाव आयोग (ECI) से माँग की कि चुनाव-पूर्व गठबंधन तय हों और एक ही चुनाव चिह्न पर मतदान कराया जाए, ताकि जनता को स्पष्ट विकल्प मिल सके। उन्होंने यह भी कहा कि बार-बार चुनाव होने से देश पर आर्थिक बोझ बढ़ता है और विकास कार्य बाधित होते हैं, इसलिए 'वन नेशन, वन इलेक्शन' की अवधारणा लागू हो तो उचित होगा।
आरक्षण और रोजगार के फरमान पर सतर्क रुख
जातीय आधार पर भेदभाव को लेकर उन्होंने कहा कि छात्र जीवन में उन्होंने कभी ऐसा भेद नहीं अनुभव किया। उनके अनुसार 21वीं सदी में ऐसी बातें दुर्भाग्यपूर्ण हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि संबंधित मामला सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष लंबित है और न्यायपालिका के निर्णय की प्रतीक्षा की जानी चाहिए।
उत्तर प्रदेश सरकार के रोजगार संबंधी नए आदेश पर उन्होंने कहा कि उन्होंने अभी उसे विस्तार से नहीं पढ़ा है, इसलिए बिना अध्ययन के कोई टिप्पणी करना उचित नहीं होगा। यह रुख उनकी तथ्य-आधारित राजनीतिक शैली को दर्शाता है।
आगे की राह
धनंजय सिंह की जन एकता यात्रा और राष्ट्रवादी नौजवान सभा की यह पहल यह संकेत देती है कि वे जौनपुर और उत्तर प्रदेश में युवाओं के बीच अपना राजनीतिक और सामाजिक आधार पुनर्निर्मित करने की दिशा में सक्रिय हैं। राष्ट्रीय एकता, प्रशासनिक सुधार और युवा चरित्र निर्माण को केंद्र में रखते हुए यह यात्रा आने वाले समय में और बड़े आयोजनों की पृष्ठभूमि बन सकती है।