यूपी में माफियाराज नहीं, कानून का राज: प्रकाश पाल का अखिलेश यादव पर तीखा पलटवार
सारांश
मुख्य बातें
राज्यसभा सांसद प्रकाश पाल ने 31 अक्टूबर 2026 को लखनऊ में समाजवादी पार्टी (SP) के अध्यक्ष अखिलेश यादव के उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था संबंधी बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी। पाल ने दावा किया कि आज प्रदेश में माफियाराज की जगह कानून का राज कायम है और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने अपराधियों पर लगाम कसी है।
अखिलेश के बयान पर प्रकाश पाल का पलटवार
अखिलेश यादव ने कहा था कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था की समीक्षा करनी चाहिए। इस पर पाल ने कहा कि अमित शाह वर्ष 2014 में ही प्रदेश का दौरा कर चुके हैं और गाँव-गली घूमकर उस समय की स्थिति का जायजा ले चुके हैं। उनके अनुसार, उस दौर में प्रदेश में अराजकता और गुंडागर्दी का माहौल था, युवाओं की नौकरियों में गड़बड़ी होती थी और महिलाओं का घर से निकलना मुश्किल था।
पाल ने दावा किया कि अमित शाह ने 2014 में उत्तर प्रदेश की हालत देखकर चुनावी एजेंडा तैयार किया था, जिसका नतीजा यह रहा कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने उस वर्ष के लोकसभा चुनाव में प्रदेश की 80 में से 73 सीटें जीती थीं। इसके बाद 2017 में भी भाजपा ने बहुमत की सरकार बनाई।
एसटी हसन के बयान पर आपत्ति
समाजवादी पार्टी के पूर्व सांसद एसटी हसन के राम जन्मभूमि से जुड़े बयान पर प्रकाश पाल ने आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म की आस्था से जुड़े विषयों पर टिप्पणी करने से पहले तथ्यों और परंपराओं की पर्याप्त जानकारी होनी चाहिए।
पाल ने अखिलेश यादव से सीधे सवाल किया कि वे बताएँ कि राम और कृष्ण का जन्मस्थान कहाँ है, क्योंकि भारत का हर नागरिक इन धार्मिक मान्यताओं से परिचित है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अयोध्या में राम जन्मभूमि थाना पहले से मौजूद है और इसकी स्थापना कांग्रेस शासनकाल से जुड़ी है — यह भाजपा सरकार की देन नहीं है।
राहुल गांधी पर विवादित टिप्पणी
कांग्रेस नेता राहुल गांधी की उस टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए — जिसमें कथित तौर पर व्यापारियों से दिवाली और त्योहारों को देखते हुए प्रदर्शन आगे बढ़ाने की अपील का उल्लेख था — पाल ने कहा कि राहुल गांधी ने व्यापारियों को कहा कि वे जाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात करें।
पाल ने इस बयान की तुलना पहलगाम के आतंकवादियों की कथित टिप्पणी से करते हुए दोनों की भाषा को एक जैसा बताया — एक बयान जो तत्काल विवाद का केंद्र बन गया। यह टिप्पणी सांसद पाल की व्यक्तिगत राय के रूप में दर्ज है और इसका कोई स्वतंत्र सत्यापन उपलब्ध नहीं है।
राजनीतिक संदर्भ
यह बयानबाज़ी ऐसे समय में आई है जब उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ धीरे-धीरे शुरू हो चुकी हैं। भाजपा और सपा दोनों ही कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर अपनी-अपनी कथा गढ़ने में जुटी हैं। गौरतलब है कि यूपी में कानून-व्यवस्था का मुद्दा हर चुनाव में केंद्रीय रहा है और दोनों दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का यह दौर इसी राजनीतिक जमीन को तैयार करने की कवायद का हिस्सा माना जा रहा है।