भाजपा सांसद प्रकाश पाल का अखिलेश पर हमला: 'सपा की असली उपलब्धि दंगे और डर फैलाना'
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद प्रकाश पाल ने मंगलवार, 13 अक्टूबर को लखनऊ में समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला। पाल की यह आलोचना सपा मुख्यालय के बाहर लगाए गए उन पोस्टरों को लेकर थी, जिनमें पिछली सपा सरकार के कार्यकाल में शुरू की गई महिला कल्याण योजनाओं का उल्लेख था। भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि सपा उन योजनाओं का श्रेय लेने की कोशिश कर रही है, जबकि अपने कार्यकाल में कानून-व्यवस्था की दयनीय स्थिति पर पर्दा डाल रही है।
विवाद की जड़: पोस्टर और दावे
यह विवाद तब शुरू हुआ जब सपा दफ्तर के बाहर देवी दुर्गा की तस्वीर वाले पोस्टर लगाए गए, जिनमें उत्तर प्रदेश में पार्टी के पिछले कार्यकाल के दौरान शुरू की गई कई महिला-केंद्रित योजनाओं को प्रदर्शित किया गया था। भाजपा ने इसे राजनीतिक प्रचार करार देते हुए पलटवार किया।
पाल ने कहा, 'अखिलेश यादव इस बात का श्रेय ले सकते हैं कि उन्होंने कैसे पिछड़े वर्गों, दलितों और सामान्य वर्ग के अधिकारों को हड़पा। वह ऐसे पोस्टर लगा सकते हैं जिनमें दावा किया गया हो, 'मैंने पहले भी ऐसा किया था, और मैं फिर से ऐसा करूंगा।'
कानून-व्यवस्था पर सीधा प्रहार
भाजपा सांसद ने पिछली सपा सरकार के कार्यकाल में कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उनके अनुसार उस दौर में व्यापारियों को शाम 5-6 बजे तक दुकानें बंद करने पर मजबूर होना पड़ता था, और महिलाओं व लड़कियों में भय का वातावरण था।
पाल ने कहा, 'वह (अखिलेश यादव) ऐसा डर का माहौल बनाने का श्रेय ले सकते हैं कि लड़कियाँ बाहर निकलने से डरती थीं। उन्होंने (सपा सरकार ने) लोगों की जमीनें हड़प लीं।' गौरतलब है कि सपा ने इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
चुनावी प्रदर्शन पर सवाल
पाल ने सपा के चुनावी रिकॉर्ड का हवाला देते हुए कहा कि यदि पार्टी के दावे सच होते, तो उसे बड़ा जनादेश मिलता। उन्होंने पूछा, 'अगर उन्होंने इतना अच्छा काम किया है तो सत्ता में रहते हुए वे केवल 47 सीटें क्यों जीत पाए?'
उन्होंने 2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों में सपा के प्रदर्शन का भी उल्लेख करते हुए सवाल किया कि पार्टी की जीत अधिकांशतः राजनीतिक परिवार से जुड़ी सीटों तक ही सीमित क्यों रही। भाजपा सांसद ने सपा की चुनावी हार के लिए 'एंटी-इनकंबेंसी' को प्रमुख कारण बताया।
संवैधानिक संस्थाओं पर विपक्ष का रुख
पाल ने विपक्ष पर भारत की संवैधानिक संस्थाओं को कमज़ोर करने का भी आरोप लगाया। उन्होंने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ हुए विरोध मार्च का उल्लेख करते हुए कहा, 'एक अंतरराष्ट्रीय साजिश के तहत, वे भारत की संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करते हैं, लोकतंत्र का मजाक उड़ाते हैं, चुनाव आयोग पर सवाल उठाते हैं और न्यायपालिका के खिलाफ बोलते हैं।'
उन्होंने आगे कहा, 'इस तरह, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विरोध करते-करते 'इंडी अलायंस' भारत-विरोधी हो गया है।' उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के राजनीतिक नेतृत्व की भी प्रशंसा की।
आगे का राजनीतिक परिदृश्य
यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में राजनीतिक सक्रियता तेज़ हो रही है और सपा अपनी पहचान को नए सिरे से स्थापित करने की कोशिश में है। भाजपा की यह आक्रामक प्रतिक्रिया संकेत देती है कि सत्तारूढ़ दल पिछली सरकारों की कथित विफलताओं को चुनावी विमर्श में केंद्रीय मुद्दा बनाए रखना चाहता है। आने वाले दिनों में सपा की ओर से भी जवाबी हमला अपेक्षित है।