ओम प्रकाश राजभर का अखिलेश पर तीखा हमला: महिला आरक्षण विरोध और पीडीए राजनीति पर उठाए सवाल
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने 30 अक्टूबर 2026 को लखनऊ में समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव पर कड़ा हमला बोला। राजभर ने महिला आरक्षण विधेयक के विरोध, पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) राजनीति की बदलती परिभाषा, गोरखपुर एमएलसी चुनाव के नतीजे और उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था पर सपा के आरोपों को एक-एक कर खारिज किया।
महिला आरक्षण: पुराना विरोध, नई भाषा
राजभर ने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) ने महिला आरक्षण विधेयक का सदन के बाहर विरोध किया था। उन्होंने कहा, 'जब महिलाओं के अधिकारों की बात आई थी, तब विरोध किया गया था — और अब वही दल महिलाओं को टिकट देने और उनके राजनीतिक प्रतिनिधित्व की बात कर रहे हैं।' राजभर के अनुसार, यदि यह विधेयक लागू होता तो 2029 से लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को सुरक्षित सीटों के ज़रिये प्रतिनिधित्व मिल सकता था।
उन्होंने दावा किया कि ग्रामीण महिला मतदाता इस विरोध को नहीं भूली हैं और जब विपक्षी नेता वोट माँगने जाएँगे तो उन्हें इस सवाल का सामना करना पड़ेगा।
पीडीए राजनीति पर सवाल: गोरखपुर का आईना
राजभर ने गोरखपुर एमएलसी चुनाव का उदाहरण देते हुए सपा की पीडीए राजनीति पर तंज कसा। उनके अनुसार, सपा ने पंडित संजय त्रिपाठी को टिकट दिया, लेकिन पार्टी के यादव मतदाताओं ने उन्हें वोट नहीं दिया और राजीव यादव को समर्थन दिया। उन्होंने कहा, 'यदि सपा वास्तव में पीडीए और सभी वर्गों के सम्मान की बात करती है, तो संजय त्रिपाठी को समर्थन क्यों नहीं मिला?'
राजभर ने यह भी कहा कि पीडीए की परिभाषा समय-समय पर बदलती रहती है — व्यंग्य करते हुए उन्होंने कहा कि अब 'ए' का अर्थ 'अग्रहरी' भी बताया जा रहा है, जबकि पहले अगड़ा और अल्पसंख्यक वर्गों की बात होती थी। स्वामी प्रसाद मौर्य के इंडिया गठबंधन में शामिल होने के प्रश्न पर राजभर ने कहा कि अखिलेश यादव के बयानों पर भरोसा करना कठिन है, क्योंकि उनके राजनीतिक रुख में लगातार बदलाव आता रहता है।
एमएलसी चुनाव परिणाम और 2027 का दावा
अखिलेश यादव के इस आरोप पर कि एमएलसी चुनाव के दौरान पुलिस और प्रशासन ने शिक्षकों पर दबाव बनाया, राजभर ने पलटवार करते हुए सवाल किया कि राजीव यादव को वोट किसने दिया। उन्होंने दावा किया कि मुसलमानों ने एकजुट होकर राजीव यादव के पक्ष में मतदान किया।
राजभर ने एमएलसी चुनाव के आँकड़े सामने रखे — करीब 14 लाख मतदाताओं में से लगभग आठ लाख ने मतदान किया। उन्होंने इसकी तुलना विधानसभा चुनाव से करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में करीब 14 करोड़ मतदाता होते हैं, जिनमें से आठ करोड़ से अधिक मतदान कर सकते हैं। उनके अनुसार, इन दोनों संख्याओं के अंतर को अखिलेश यादव नज़रअंदाज़ कर रहे हैं। राजभर ने दावा किया कि 2027 के विधानसभा चुनाव में विपक्ष का भ्रम दूर हो जाएगा।
शिक्षा व्यवस्था पर पलटवार
अखिलेश यादव के इस आरोप कि भाजपा सरकार ने यूपी की शिक्षा व्यवस्था को ध्वस्त किया है, के जवाब में राजभर ने कहा कि अखिलेश को किसी प्राथमिक या जूनियर हाईस्कूल में जाकर दोनों सरकारों के कार्यकाल की तुलना करनी चाहिए। उनके अनुसार, सपा सरकार के दौरान गरीब बच्चों को केवल मिड-डे मील मिलता था, जबकि 2017 से वर्तमान सरकार बच्चों को यूनिफॉर्म, जूते, मोजे, किताबें और कॉपियाँ दे रही है।
राजभर ने कहा, 'पहले बच्चे टाट पर बैठकर पढ़ाई करते थे, अब उन्हें टेबल और मेज की सुविधा मिल रही है।' उन्होंने यह भी दावा किया कि बिना पैसे दिए दस लाख से अधिक लोगों को सरकारी नौकरी मिली है और आवास, राशन, शौचालय, आयुष्मान कार्ड, किसान सम्मान निधि तथा पेंशन जैसी योजनाओं के लाभार्थियों ने भी एमएलसी चुनाव में मतदान किया।
आगे क्या
राजभर के इस बयान से उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सत्तारूढ़ एनडीए और विपक्षी सपा के बीच वाक्-युद्ध और तेज़ होने के संकेत हैं। महिला आरक्षण, पीडीए की परिभाषा और जातीय समीकरण — तीनों मुद्दे आने वाले महीनों में चुनावी बहस का केंद्र बने रहने की संभावना है।