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बीजद इंडिया ब्लॉक रैली से दूर, ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर कायम: मानस रंजन मंगराज

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बीजद इंडिया ब्लॉक रैली से दूर, ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर कायम: मानस रंजन मंगराज

सारांश

बीजद इंडिया ब्लॉक की रैली से दूर रहेगी, लेकिन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग पर अडिग है। यह रुख बताता है कि बीजद मुद्दे-दर-मुद्दे विपक्षी राय साझा कर सकती है, पर गठबंधन की छत्रछाया से बाहर रहना चाहती है।

मुख्य बातें

बीजद के सांसद मानस रंजन मंगराज ने कहा कि पार्टी 1 नवंबर की इंडिया ब्लॉक रैली में शामिल नहीं होगी।
बीजद ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग दोहराई; नवीन पटनायक पहले ही यह रुख सार्वजनिक कर चुके हैं।
पार्टी ईवीएम की जगह बैलेट पेपर से चुनाव कराने की माँग का समर्थन करती है।
मंगराज ने 2024 के ओडिशा चुनाव में ईवीएम से जुड़ी संदिग्ध घटनाओं का हवाला दिया और कहा कि चुनाव आयोग को शिकायतें दी गई थीं।
व्यापारी संगठनों की रैली टालने की अपील को मंगराज ने उचित बताया, सुझाया कि दिवाली के बाद आयोजन बेहतर होता।

बीजू जनता दल (बीजद) के सांसद मानस रंजन मंगराज ने 30 अक्टूबर 2026 को स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी 1 नवंबर को नई दिल्ली में प्रस्तावित इंडिया ब्लॉक की रैली में शामिल नहीं होगी, क्योंकि बीजद इस विपक्षी गठबंधन का हिस्सा नहीं है। हालाँकि, मंगराज ने यह भी कहा कि उनकी पार्टी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग पर पूरी तरह कायम है, और इस मुद्दे पर बीजद के शीर्ष नेता नवीन पटनायक पहले ही अपना रुख सार्वजनिक कर चुके हैं।

इंडिया गठबंधन रैली में भागीदारी का सवाल

मंगराज ने साफ शब्दों में कहा कि 1 नवंबर की रैली इंडिया गठबंधन का कार्यक्रम है और बीजद उस गठबंधन का अंग नहीं है, इसलिए पार्टी के सांसद इसमें भाग नहीं लेंगे। उन्होंने यह भी बताया कि कुछ दिन पहले आयोजित संयुक्त विपक्षी मार्च में उन्होंने और बीजद सांसदों ने एक सांसद एवं विपक्षी नेता की हैसियत से हिस्सा लिया था, क्योंकि वह कार्यक्रम सभी विपक्षी दलों का साझा आयोजन था।

यह स्थिति उजागर करती है कि बीजद मुद्दे-दर-मुद्दे विपक्ष के साथ खड़ा होने की नीति अपना रहा है, लेकिन औपचारिक गठबंधन से दूरी बनाए रखता है। गौरतलब है कि 2024 के ओडिशा विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) से करारी हार के बाद बीजद अपनी पुनर्स्थापना की रणनीति तय कर रहा है।

ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग

मंगराज ने दोहराया कि बीजद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग से पीछे नहीं हटेगी। उन्होंने बताया कि पार्टी के वरिष्ठ नेता नवीन पटनायक यह सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं कि मुख्य चुनाव आयुक्त को पद छोड़ना चाहिए। यह माँग उस व्यापक विपक्षी असंतोष का हिस्सा है जो चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर उठ रहे सवालों के बीच तेज हो गई है।

ईवीएम और बैलेट पेपर पर बीजद का रुख

मंगराज ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) को लेकर भी चुनाव आयोग पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने 2024 के ओडिशा चुनाव का हवाला देते हुए कहा कि उस दौरान कई संदिग्ध घटनाएँ सामने आई थीं, जिन पर बीजद ने चुनाव आयोग के समक्ष पहले ही शिकायतें दर्ज कराई थीं। मंगराज ने कहा कि उनकी पार्टी बैलेट पेपर से चुनाव कराने की माँग का पूरा समर्थन करती है, क्योंकि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता अनिवार्य है।

भाजपा की दलील — कि बैलेट पेपर वाले चुनावों में भी विपक्ष को हार मिली है — का जवाब देते हुए मंगराज ने कहा कि विधान परिषद जैसे अप्रत्यक्ष चुनावों और आम चुनावों के बीच बुनियादी फर्क होता है, इसलिए दोनों की तुलना उचित नहीं है।

व्यापारियों की चिंता पर प्रतिक्रिया

दिल्ली के व्यापारी संगठनों की ओर से रैली स्थगित करने की अपील पर मंगराज ने कहा कि व्यापारियों की आपत्ति जायज़ है। रैली जिस भीड़भाड़ वाले इलाके में होने वाली है, वहाँ कारोबार प्रभावित हो सकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि रैली दिवाली के बाद आयोजित होती तो व्यापारियों के लिए बेहतर होता। साथ ही उन्होंने यह स्पष्ट किया कि कार्यक्रम के समय और स्थान को लेकर अंतिम निर्णय इंडिया गठबंधन के नेताओं का होगा।

आगे क्या

1 नवंबर की रैली विपक्षी एकजुटता की बड़ी परीक्षा होगी। बीजद की अनुपस्थिति यह दर्शाती है कि इंडिया गठबंधन के बाहर के दल मुद्दों पर सहमति के बावजूद संगठनात्मक रूप से अलग बने रहना चाहते हैं। ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग अब बहुदलीय विपक्षी एजेंडे का अहम हिस्सा बन चुकी है, और आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद में भी गूँजने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन रैली में अनुपस्थित। असल में यह उस दलीय पुनर्स्थापना की कवायद है जो 2024 की विधानसभा हार के बाद बीजद को करनी है — गठबंधन की कीमत चुकाए बिना राष्ट्रीय मुद्दों पर दृश्यता बनाए रखना। ईवीएम पर जो सवाल मंगराज उठा रहे हैं, वे ओडिशा में पार्टी की चुनावी हार के बाद और भी संवेदनशील हैं; इस बयान को केवल संवैधानिक चिंता के रूप में पढ़ना पर्याप्त नहीं होगा। मुख्यधारा की कवरेज रैली-उपस्थिति तक सिमटी है, जबकि असली कहानी यह है कि 2024 के बाद बीजद किस राजनीतिक धुरी पर खड़ा होना चाहता है।
RashtraPress
31 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बीजद इंडिया ब्लॉक की 1 नवंबर की रैली में क्यों शामिल नहीं होगी?
बीजद इंडिया ब्लॉक गठबंधन का हिस्सा नहीं है, इसलिए पार्टी के सांसद इस रैली में भाग नहीं लेंगे। बीजद सांसद मानस रंजन मंगराज ने स्पष्ट किया कि यह कार्यक्रम गठबंधन का आंतरिक आयोजन है और इसमें केवल गठबंधन के सहयोगी दल शामिल होंगे।
बीजद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग क्यों कर रही है?
बीजद का आरोप है कि चुनाव आयोग की ओर से ईवीएम के मामले में गड़बड़ियाँ हुई हैं। नवीन पटनायक पहले ही सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं कि मुख्य चुनाव आयुक्त को इस्तीफा देना चाहिए, और 2024 के ओडिशा चुनाव में कथित अनियमितताओं को लेकर पार्टी ने पहले ही शिकायतें दर्ज कराई थीं।
क्या बीजद ईवीएम हटाकर बैलेट पेपर से चुनाव कराने के पक्ष में है?
हाँ, मानस रंजन मंगराज ने स्पष्ट कहा कि बीजद बैलेट पेपर से चुनाव कराने की माँग का समर्थन करती है। उनका कहना है कि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए इस माँग पर गंभीरता से विचार होना चाहिए।
दिल्ली के व्यापारियों ने 1 नवंबर की रैली पर क्या आपत्ति जताई?
दिल्ली के व्यापारी संगठनों ने रैली टालने की अपील की है, क्योंकि भीड़भाड़ वाले इलाके में आयोजन से कारोबार प्रभावित हो सकता है। मंगराज ने इस आपत्ति को उचित बताते हुए कहा कि दिवाली के बाद रैली होती तो व्यापारियों के लिए बेहतर होता।
बीजद और इंडिया ब्लॉक के बीच संबंध कैसे हैं?
बीजद इंडिया ब्लॉक का औपचारिक सदस्य नहीं है, लेकिन पार्टी कुछ साझा मुद्दों पर विपक्षी दलों के साथ सहमति रखती है। हाल के संयुक्त विपक्षी मार्च में बीजद सांसदों ने व्यक्तिगत क्षमता में भाग लिया था, जबकि गठबंधन के संगठनात्मक कार्यक्रमों से दूरी बनाए रखी है।
राष्ट्र प्रेस
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