बीजद नेता बिक्रम अरुख ने BJP में जाने की अफवाहें नकारीं, बोले— 'बीजद में था, हूं और रहूंगा'
सारांश
मुख्य बातें
बीजू जनता दल (बीजद) के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री बिक्रम केशरी अरुख ने 19 जुलाई 2026 को एक वीडियो संदेश जारी कर पार्टी छोड़ने और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने की तमाम अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे बीजद के संस्थापक सदस्य हैं और पार्टी अध्यक्ष नवीन पटनायक के नेतृत्व में काम जारी रखेंगे।
क्या थी अटकलों की वजह
अरुख बीजद की राजनीतिक मामलों की समिति (PAC) के सदस्य हैं। मीडिया के कुछ वर्गों में उनके दल-बदल की खबरें तब उठीं जब वे लगातार एक-दो PAC बैठकों में अनुपस्थित रहे। इस अनुपस्थिति को उनकी नाराज़गी और भाजपा में जाने की तैयारी के रूप में व्याख्यायित किया गया।
अरुख ने इस व्याख्या को पूरी तरह निराधार बताया। उन्होंने कहा, 'निजी कारणों से मैं एक-दो बैठकों में शामिल नहीं हो सका। अगर इससे यह अटकलें लगाई जा रही हैं कि मैं नाराज़ या असंतुष्ट हूं, तो ऐसे दावे बिल्कुल गलत हैं।'
अरुख का स्पष्ट बयान
वीडियो संदेश में अरुख ने कहा, 'आज मैंने विभिन्न मीडिया आउटलेट्स में सुना कि मैं किसी अन्य पार्टी में शामिल होने जा रहा हूं। यह केवल एक अफवाह है और इसमें कोई सच्चाई नहीं है। मैं बीजद में था, हूं और हमेशा रहूंगा।' उन्होंने नवीन पटनायक को अपना 'पसंदीदा नेता' और बीजद को अपनी 'पसंदीदा पार्टी' बताया।
भाजपा की प्रतिक्रिया
भाजपा के ओडिशा प्रदेश अध्यक्ष मनमोहन सामल से जब अरुख के संभावित प्रवेश के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि उन्हें इस मामले की कोई जानकारी नहीं है। हालांकि, उन्होंने यह जरूर जोड़ा कि सत्तारूढ़ पार्टी के दरवाजे सभी के लिए खुले हैं — एक बयान जिसे राजनीतिक हलकों में सांकेतिक माना जा रहा है।
बीजद में हलचल का व्यापक संदर्भ
यह स्पष्टीकरण ऐसे समय में आया है जब बीजद 2024 के ओडिशा विधानसभा चुनावों में ऐतिहासिक हार के बाद से आंतरिक उथल-पुथल से गुज़र रही है। पार्टी के कई वरिष्ठ नेता इस्तीफा दे चुके हैं या भाजपा में शामिल हो चुके हैं। ऐसे में अरुख जैसे संस्थापक सदस्य का पार्टी के प्रति वफादारी दोहराना बीजद नेतृत्व के लिए राहत की बात मानी जा रही है।
गौरतलब है कि अरुख पार्टी की स्थापना के समय से ही बीजद से जुड़े हैं और ओडिशा की राजनीति में उनका अनुभव और प्रभाव उन्हें एक महत्वपूर्ण नेता बनाता है। आने वाले हफ्तों में बीजद के संगठनात्मक पुनर्गठन पर सबकी नज़रें टिकी रहेंगी।