अजय राय का भाजपा पर हमला: निषाद समाज से वादाखिलाफी, 2027 में जनता देगी जवाब
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने 26 अगस्त 2026 को लखनऊ स्थित पार्टी मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत में भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने निषाद समाज के साथ खुलेआम वादाखिलाफी की है और उनके पारंपरिक अधिकारों को कुचला है। राय ने चेतावनी दी कि 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में जनता इसका हिसाब करेगी और 'दूध का दूध और पानी का पानी' हो जाएगा।
निषाद समाज और भाजपा: वादे बनाम हकीकत
अजय राय ने कहा कि निषाद समाज का भगवान राम और निषादराज से ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक संबंध रहा है। उन्होंने तर्क दिया कि अयोध्या में राम मंदिर निर्माण में निषाद समाज के लोगों ने सक्रिय योगदान दिया, फिर भी मंदिर निर्माण के बाद समाज को न उचित अधिकार मिला और न सम्मान। उन्होंने कहा कि भाजपा ने रोहिणी आयोग और आरक्षण के मुद्दे पर निषाद समाज से वादे किए, लेकिन उन्हें पूरा नहीं किया।
संजय निषाद और आरक्षण पर सीधा सवाल
राय ने निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद को भी घेरा। उन्होंने पूछा कि जब उनके बेटे सांसद और विधायक के पद पर हैं, तो निषाद समाज को अब तक आरक्षण क्यों नहीं दिलाया गया। यह ऐसे समय में आया है जब कांग्रेस नेता रामनिहाल निषाद ने भाजपा छोड़ दी है — राय ने इसे निषाद समाज की बढ़ती नाराज़गी का प्रतीक बताया।
पारंपरिक आजीविका और कानून-व्यवस्था पर हमला
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में निषाद समाज के लोगों को बालू खनन, नौकायन और अन्य परंपरागत कार्यों से जुड़े पट्टे दिए गए थे। उन्होंने वादा किया कि कांग्रेस की सरकार बनने पर ये अधिकार फिर से बहाल किए जाएंगे। इसके साथ ही उन्होंने मछली कारोबार पर कथित रोक और निषाद समाज की पारंपरिक आजीविका पर अंकुश लगाने के प्रयासों की कड़ी निंदा की। राय ने प्रदेश में महिलाओं के विरुद्ध बढ़ती घटनाओं और कृष्णानंद हत्याकांड का भी उल्लेख करते हुए सरकार से जवाब माँगा।
कुंवर सिंह निषाद का आरोप: FIR दर्ज नहीं
इस प्रेस वार्ता में कांग्रेस नेता एवं निषाद समाज से जुड़े कुंवर सिंह निषाद ने आरोप लगाया कि एक बहस के दौरान कथित तौर पर आरएसएस के पूर्व कार्यकर्ता राजू दास ने उनकी माँ के विरुद्ध आपत्तिजनक टिप्पणी की। उन्होंने बताया कि पुलिस को तहरीर दी गई, किंतु अभी तक प्राथमिकी दर्ज नहीं हुई है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या यह निष्क्रियता संबंधित व्यक्ति को भाजपा और सरकार के संरक्षण का संकेत है।
रामनिहाल निषाद ने बताई भाजपा छोड़ने की वजह
रामनिहाल निषाद ने बताया कि उन्होंने 1998 में फैजाबाद लोकसभा सीट से बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ा था और करीब एक लाख मत मिले थे। 2014 में वे भाजपा में शामिल हुए और विभिन्न पदों पर रहे। उन्होंने कहा कि भाजपा के भीतर रहते हुए उन्होंने निषाद समाज के हितों से जुड़े मुद्दे उठाए, लेकिन जब उन्हें लगा कि समाज के साथ न्याय नहीं हो रहा है, तो उन्होंने पार्टी से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि निषाद समाज भाजपा के साथ किए गए व्यवहार को नहीं भूलेगा। 2027 के चुनाव में यह राजनीतिक गणित निर्णायक भूमिका निभा सकता है।