राहुल गांधी के NDA सरकार गिरने के दावे पर अजय राय बोले — यह उनकी सोच और जनाधार की ताकत
सारांश
मुख्य बातें
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के उस बयान पर सियासी पारा चढ़ा हुआ है, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि अगले एक साल के भीतर केंद्र की राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) सरकार गिर जाएगी। भारतीय जनता पार्टी (BJP) और NDA के कई नेताओं ने इस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है, वहीं उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने 26 मई 2026 को लखनऊ में राहुल गांधी का खुलकर समर्थन किया।
अजय राय का राहुल गांधी को समर्थन
अजय राय ने लखनऊ में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि राहुल गांधी जो भी कह रहे हैं, वह उनकी सोच और जनता के बीच उनकी मजबूत पकड़ को दर्शाता है। उन्होंने कहा, 'राहुल गांधी ने देश में अपनी मजबूत जगह बनाई है।' राय के अनुसार, आज हर वर्ग के लोग — चाहे सवर्ण समाज हो, पिछड़ा वर्ग, दलित या अल्पसंख्यक समुदाय — राहुल गांधी पर भरोसा जता रहे हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि राहुल गांधी लगातार जनता के मुद्दे उठा रहे हैं और यही वजह है कि उनकी लोकप्रियता बढ़ रही है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) विपक्ष के रूप में अपनी पहचान मजबूत करने की कोशिश में है।
हामिद अंसारी और अरशद मदनी के बयान पर प्रतिक्रिया
अजय राय ने पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी के उस बयान पर भी अपनी राय रखी, जिसमें उन्होंने गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की बात कही थी। राय ने कहा कि अंसारी ने बिल्कुल सही बात कही है। उन्होंने जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष अरशद मदनी के बयान का भी हवाला दिया, जिसमें मदनी ने भी गाय को 'राष्ट्रीय पशु' घोषित किए जाने की वकालत की थी।
सरकार पर हमला — इजरायल और ईरान का संदर्भ
अजय राय ने केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिस इजरायल को 'फादरलैंड' बताते हैं, वहाँ बड़ी मात्रा में बीफ का सेवन किया जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान ऐसा देश है जहाँ गाय की हत्या नहीं की जाती और न ही बीफ खाया जाता है। गौरतलब है कि यह बयान गाय और बीफ से जुड़ी बहस को एक नया राजनीतिक आयाम देता है।
BJP की प्रतिक्रिया और राजनीतिक संदर्भ
BJP और NDA के नेताओं ने राहुल गांधी के 'सरकार गिरने' वाले दावे को निराधार बताया है। आलोचकों का कहना है कि विपक्ष के पास बहुमत का कोई ठोस आधार नहीं है और यह बयान केवल राजनीतिक ध्यान आकर्षित करने की कोशिश है। यह ऐसे समय में आया है जब संसद का अगला सत्र नजदीक है और विपक्ष सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति बना रहा है।
आगे क्या
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, राहुल गांधी के इस बयान का असर आने वाले हफ्तों में संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह दिखेगा। कांग्रेस इसे अपने जनाधार विस्तार के अभियान से जोड़ने की कोशिश करेगी, जबकि BJP इसे विपक्ष की 'हताशा' के रूप में पेश करती रहेगी।