निषाद समुदाय आरक्षण पर संजय निषाद का BJP को सीधा सवाल — 'यह उनका अपना वादा है'
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री और निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद ने 21 अगस्त को निषाद समुदाय के आरक्षण के मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) को सीधे जवाबदेह ठहराया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह प्रश्न भाजपा से पूछा जाना चाहिए, क्योंकि यह उनका अपना वादा और एजेंडे का हिस्सा रहा है। इस बीच, यूपी के मंत्री नरेंद्र कश्यप ने संजय निषाद को सलाह दी कि इन मुद्दों को सार्वजनिक मंच की बजाय कैबिनेट बैठकों में उठाया जाए।
संजय निषाद का BJP पर सीधा प्रहार
संजय निषाद ने बातचीत में कहा, 'यह सवाल भाजपा से पूछा जाना चाहिए, यह उनका अपना वादा है और उनके एजेंडे का हिस्सा रहा है। मैं खुद एक वकील हूं और इस मुद्दे की वकालत करता रहूंगा। जब भाजपा विपक्ष में थी, तब वे खुद इसकी वकालत करते थे। अब पार्टी खुद ही जज हो गई है, तो उनकी जवाबदेही है।' उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब निषाद समुदाय लंबे समय से अनुसूचित जाति (SC) आरक्षण में शामिल किए जाने की माँग कर रहा है।
निषाद का 'वकालत' वाला तर्क
निषाद ने अपनी भूमिका को स्पष्ट करते हुए कहा, 'मैं एक वकील हूं और वकालत ही करूंगा। समुदाय ने मुझे इसी काम के लिए यहां भेजा है।' उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने 14 किताबें लिखी हैं और 'दलील दल' बनाकर ठोस तर्कों के आधार पर अपना पक्ष रखा है। उन्होंने उन लोगों पर भी निशाना साधा जो कथित तौर पर विरोधी पार्टियों से धन लेकर समुदाय में बाँटते हैं।
मंत्री नरेंद्र कश्यप की प्रतिक्रिया
यूपी सरकार में मंत्री नरेंद्र कश्यप ने संजय निषाद को एनडीए का 'अहम सदस्य और बड़े नेता' बताते हुए कहा, 'आरक्षण की माँग करना पूरी तरह से सही है, लेकिन इन मुद्दों को जनता के सामने ले जाने के बजाय, उन्हें कैबिनेट और सही मंच पर उठाना चाहिए ताकि सरकार समाधान पर विचार कर सके।' उन्होंने यह भी याद दिलाया कि कैबिनेट और एनडीए की बैठकें नियमित रूप से होती हैं।
मेरठ SSP विवाद पर कश्यप का बयान
मेरठ के निवर्तमान वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) अविनाश पांडे द्वारा एक किसान नेता पर कथित हमले के सवाल पर नरेंद्र कश्यप ने कहा, 'कानून सबसे ऊपर है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार में किसी को भी कानून के साथ खिलवाड़ करने का अधिकार नहीं है।' उन्होंने योगी सरकार की भ्रष्टाचार और अपराध के प्रति 'जीरो-टॉलरेंस' नीति का हवाला दिया।
आगे क्या होगा
गौरतलब है कि निषाद समुदाय की आरक्षण माँग उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक संवेदनशील और लंबे समय से लंबित मुद्दा है। संजय निषाद का यह बयान एनडीए के भीतर आंतरिक तनाव का संकेत देता है। अब देखना यह होगा कि भाजपा नेतृत्व इस माँग पर औपचारिक रुख कब स्पष्ट करता है और क्या इसे आगामी किसी कैबिनेट बैठक में स्थान मिलता है।