ओडिशा बाढ़: IMD चेतावनी के बावजूद तैयारी नहीं, BJD-कांग्रेस ने सरकार को घेरा
सारांश
मुख्य बातें
ओडिशा के गंजाम और गजपति जिलों में चक्रवात अर्नब के बाद आई भीषण बाढ़ के बीच विपक्षी दलों बीजू जनता दल (BJD) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) ने शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026 को राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। दोनों दलों का कहना है कि भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की अग्रिम चेतावनी के बावजूद सरकार चक्रवात और उससे उपजी बाढ़ से निपटने के लिए पर्याप्त तैयारी करने में विफल रही।
मुख्य घटनाक्रम
भुवनेश्वर में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में BJD की ओर से ओडिशा विधानसभा की मुख्य सचेतक प्रमिला मलिक और पार्टी के उपाध्यक्ष प्रताप जेना ने बाढ़ प्रबंधन और राहत कार्यों पर राज्य सरकार की खामियों को उजागर किया। उनका आरोप है कि जलाशयों के उचित प्रबंधन, जल निकासी व्यवस्था और संवेदनशील नदी तटबंधों की समय पर मरम्मत जैसे आवश्यक एहतियाती उपायों की घोर उपेक्षा की गई।
मलिक ने यह भी आरोप लगाया कि गंजाम और गजपति जिलों में कई नदी तटबंध अवैध बालू खनन के कारण पहले से ही कमजोर और क्षतिग्रस्त थे, जिससे बाढ़ की स्थिति और विकराल हो गई।
विपक्ष के आरोप
मलिक ने कहा, 'भारी बारिश की संभावना की पहले से जानकारी होने के बावजूद सरकार ने एहतियाती कदम क्यों नहीं उठाए? बाढ़ प्रभावित लोगों की मदद करने के बजाय सरकार अपने प्रचार-प्रसार में व्यस्त है।' उन्होंने माँग की कि बचाव कार्यों में लगाए गए हेलीकॉप्टरों की संख्या और बाढ़ पीड़ितों को दी गई वास्तविक सहायता का ब्यौरा सार्वजनिक किया जाए।
BJD ने चेतावनी दी कि यदि स्थिति में शीघ्र सुधार नहीं हुआ तो पार्टी अपना लोकतांत्रिक आंदोलन और तेज करेगी।
वहीं, ओडिशा प्रदेश कांग्रेस कमेटी (OPCC) के प्रवक्ता अभिषेक महानंदा ने कहा कि आधुनिक तकनीक, सैटेलाइट आधारित पूर्वानुमान और प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली के इस दौर में प्रशासन किसी प्राकृतिक आपदा के प्रति तैयार न होने का बहाना नहीं बना सकता। उन्होंने चक्रवात अर्नब को लेकर IMD की पूर्व चेतावनियों के बावजूद राज्य की आपदा प्रबंधन व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सीधे सवाल उठाए।
कांग्रेस की माँगें
कांग्रेस ने राज्य सरकार से तत्काल राहत और बचाव कार्यों में तेजी लाने, नुकसान का व्यापक आकलन करने और प्रभावित लोगों को पर्याप्त मुआवजा देने की माँग की। इसके अलावा पार्टी ने स्वास्थ्य सेवाएँ, स्वच्छ पेयजल, स्वच्छता सुविधाएँ और प्रभावित इलाकों में संपर्क व्यवस्था जल्द बहाल करने की भी माँग की।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब ओडिशा ऐतिहासिक रूप से देश के सबसे चक्रवात-संवेदनशील राज्यों में से एक रहा है और राज्य की पूर्ववर्ती सरकारों को अपनी आपदा-तैयारी के लिए राष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिलती रही है। आलोचकों का कहना है कि IMD की स्पष्ट पूर्व-चेतावनी के बाद भी तटबंध संरक्षण और जलाशय प्रबंधन में खामियों का उजागर होना आपदा प्रशासन में संरचनात्मक कमजोरियों को दर्शाता है। गौरतलब है कि अवैध बालू खनन और नदी तटबंधों के क्षरण का मुद्दा ओडिशा में लंबे समय से विवादास्पद रहा है।
आगे क्या
विपक्ष के बढ़ते दबाव के बीच राज्य सरकार पर राहत कार्यों में पारदर्शिता और तेजी लाने का दायित्व और बढ़ गया है। बचाव अभियान की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक करने की माँग और लोकतांत्रिक आंदोलन की चेतावनी के साथ यह मामला आने वाले दिनों में ओडिशा की राजनीति में केंद्रीय मुद्दा बन सकता है।