31 जुलाई 2026
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ओडिशा बाढ़: बीजद-कांग्रेस का BJP सरकार पर हमला, CM माझी दिल्ली में, राहत कार्य पर सवाल

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ओडिशा बाढ़: बीजद-कांग्रेस का BJP सरकार पर हमला, CM माझी दिल्ली में, राहत कार्य पर सवाल

सारांश

ओडिशा में बाढ़ की तबाही के बीच राजनीतिक संग्राम छिड़ा है — बीजद और कांग्रेस का आरोप है कि CM माझी दिल्ली में हैं, जबकि 20 से अधिक जिले बाढ़ में डूबे हैं। सरकार ने महानदी जल विवाद बैठक का हवाला दिया, लेकिन मौतों के आँकड़ों और राहत की तैयारी पर सवाल बने हुए हैं।

मुख्य बातें

बीजद और कांग्रेस ने 30 जुलाई को ओडिशा सरकार पर बाढ़ राहत में लापरवाही का आरोप लगाया।
बीजद अध्यक्ष नवीन पटनायक ने एक्स पर कहा कि BJP नेता 'दिल्ली में दावत उड़ा रहे हैं' जबकि मयूरभंज, बालेश्वर, भद्रक, जाजपुर, झारसुगुड़ा, ढेंकनाल, संबलपुर समेत कई जिले बाढ़ में हैं।
राजस्व मंत्री सुरेश पुजारी ने सफाई दी कि CM माझी महानदी जल विवाद बैठक के लिए दिल्ली गए थे और 20 जिलों के विधायकों से संपर्क में हैं।
कांग्रेस नेता निरंजन पटनायक ने मॉनसून-पूर्व तैयारी की कमी और बाढ़ के आँकड़ों में विसंगति का आरोप लगाया।
कांग्रेस का दावा है कि सरकारी आँकड़ों से अधिक मौतें हुई हैं — स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है।

ओडिशा में भीषण बाढ़ के बीच राजनीतिक विवाद चरम पर पहुँच गया है। बीजू जनता दल (बीजद) और कांग्रेस ने गुरुवार, 30 जुलाई को राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला, यह आरोप लगाते हुए कि जब ओडिशा के लाखों लोग बाढ़ की विभीषिका झेल रहे हैं, तब मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी समेत भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता नई दिल्ली में हैं। सरकार ने जवाब में कहा कि मुख्यमंत्री एक अहम जल विवाद बैठक में शामिल होने गए थे और स्थिति पर पूरी नज़र रखी जा रही है।

विपक्ष के आरोप: 'दिल्ली में दावत, ओडिशा में तबाही'

विपक्ष के नेता और बीजद अध्यक्ष नवीन पटनायक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि ओडिशा में बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है, फिर भी राज्य के BJP नेता 'दिल्ली में दावत उड़ा रहे हैं।' उन्होंने कहा कि लगातार बारिश के कारण राज्य भर में बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं, लेकिन नेतृत्व नदारद है।

पटनायक ने मयूरभंज, बालेश्वर, भद्रक, जाजपुर, झारसुगुड़ा, ढेंकनाल और संबलपुर जिलों में लोगों की भारी मुश्किलों का ज़िक्र किया। उन्होंने कहा कि कई लोगों की मौत की खबरों ने ओडिशा के लोगों को गहरा दुख पहुँचाया है और सरकार की लापरवाही के आरोप भी सामने आ रहे हैं।

बीजद प्रमुख ने याद दिलाया कि ओडिशा ने हमेशा 'हर जीवन कीमती है' के सिद्धांत का पालन किया है और आपदा प्रबंधन के लिए वैश्विक पहचान हासिल की है। उन्होंने कहा कि ऐसी नाज़ुक स्थिति में सरकार को असंवेदनशील नहीं होना चाहिए और चुने हुए प्रतिनिधियों का लोगों को उनके हाल पर छोड़ना हैरानी की बात है।

सरकार की सफाई: CM थे महानदी जल विवाद बैठक में

आरोपों का जवाब देते हुए राजस्व मंत्री सुरेश पुजारी ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री माझी महानदी जल विवाद पर एक अहम बैठक में शामिल होने के लिए नई दिल्ली गए थे — यह वही मुद्दा है जिसे बीजद अपने कार्यकाल में सुलझाने में नाकाम रही थी। पुजारी ने कहा कि वे बाढ़ से प्रभावित 20 जिलों के विधायकों — जिनमें विपक्ष के विधायक भी शामिल हैं — के संपर्क में हैं और हालात पर बारीकी से नज़र रखी जा रही है।

कांग्रेस का अलग मोर्चा: आँकड़ों पर सवाल

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व जल संसाधन मंत्री निरंजन पटनायक ने सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि मॉनसून से दो महीने पहले ही तैयारी के लिए एक बैठक होनी चाहिए थी। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन बारिश और बाढ़ के बारे में अलग-अलग आँकड़े दे रहा है, जिससे संकेत मिलता है कि उनके पास सटीक जानकारी नहीं है। कांग्रेस ने यह भी दावा किया कि सरकारी आँकड़ों की तुलना में अधिक लोगों की जान जा चुकी है — हालाँकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है।

प्रभावित ज़िले और व्यापक संदर्भ

यह ऐसे समय में आया है जब ओडिशा के कई ज़िलों में मॉनसून की भारी बारिश से नदियाँ उफान पर हैं। गौरतलब है कि ओडिशा ने पिछले दो दशकों में आपदा प्रबंधन में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहनीय काम किया है, जिससे इस बार की राजनीतिक खींचतान और भी तीखी नज़र आती है। बाढ़ राहत और राजनीतिक जवाबदेही का यह टकराव राज्य में नई BJP सरकार के लिए एक बड़ी परीक्षा बन गया है।

आगे क्या

आलोचकों का कहना है कि सरकार को मृत्यु और नुकसान के एकीकृत, सत्यापित आँकड़े तत्काल जारी करने चाहिए। राहत कार्यों की प्रगति और मुख्यमंत्री की वापसी के बाद की प्रतिक्रिया पर सभी की निगाहें टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

और मुख्यमंत्री का दिल्ली में होना — चाहे कारण कितना भी वैध हो — राजनीतिक रूप से महँगा साबित हो सकता है। कांग्रेस का आँकड़ों पर सवाल उठाना गंभीर है: यदि मृत्यु संख्या में वास्तव में विसंगति है, तो यह पारदर्शिता की कमी नहीं बल्कि जवाबदेही का संकट है। सरकार को तत्काल एकीकृत आँकड़े जारी कर यह संदेश देना होगा कि आपदा प्रबंधन में ओडिशा की साख दलगत राजनीति से ऊपर है।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ओडिशा बाढ़ 2026 में कौन-से जिले सबसे अधिक प्रभावित हैं?
बीजद अध्यक्ष नवीन पटनायक के अनुसार मयूरभंज, बालेश्वर, भद्रक, जाजपुर, झारसुगुड़ा, ढेंकनाल और संबलपुर जिलों में हालात सबसे गंभीर हैं। राजस्व मंत्री सुरेश पुजारी ने कहा कि कुल 20 जिले बाढ़ से प्रभावित हैं।
मुख्यमंत्री मोहन माझी बाढ़ के दौरान दिल्ली में क्यों थे?
राजस्व मंत्री सुरेश पुजारी ने बताया कि CM माझी महानदी जल विवाद पर एक अहम बैठक में शामिल होने के लिए नई दिल्ली गए थे। सरकार का कहना है कि यह बैठक ओडिशा के दीर्घकालिक हित में थी और प्रभावित जिलों के विधायकों से लगातार संपर्क बनाए रखा गया।
बीजद ने ओडिशा बाढ़ राहत पर क्या आरोप लगाए हैं?
बीजद अध्यक्ष नवीन पटनायक ने एक्स पर आरोप लगाया कि BJP नेता बाढ़ के दौरान 'दिल्ली में दावत उड़ा रहे हैं' और लोगों को उनके हाल पर छोड़ दिया गया है। उन्होंने कहा कि ऐसी नाज़ुक स्थिति में सरकार की असंवेदनशीलता ओडिशा की आपदा प्रबंधन परंपरा के विरुद्ध है।
कांग्रेस ने ओडिशा बाढ़ के आँकड़ों पर सवाल क्यों उठाए?
कांग्रेस नेता निरंजन पटनायक ने आरोप लगाया कि प्रशासन बारिश और बाढ़ के बारे में अलग-अलग आँकड़े दे रहा है और सरकारी मृत्यु संख्या वास्तविकता से कम है। उन्होंने मॉनसून से पहले तैयारी बैठक न होने को भी सरकार की विफलता बताया।
ओडिशा में बाढ़ के दौरान राजनीतिक विवाद का क्या असर होगा?
यह विवाद नई BJP सरकार के लिए पहली बड़ी आपदा-प्रबंधन परीक्षा है। आलोचकों का कहना है कि सरकार को तत्काल एकीकृत और सत्यापित आँकड़े जारी करने चाहिए। मुख्यमंत्री की दिल्ली से वापसी के बाद उनकी प्रतिक्रिया और राहत कार्यों की गति पर सबकी निगाहें टिकी हैं।
राष्ट्र प्रेस
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