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ओडिशा बाढ़ संकट: 12 की मौत, भक्त चरण दास बोले — मुख्यमंत्री दिल्ली में, जनता बेहाल

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ओडिशा बाढ़ संकट: 12 की मौत, भक्त चरण दास बोले — मुख्यमंत्री दिल्ली में, जनता बेहाल

सारांश

ओडिशा में बाढ़ का कहर जारी है — 12 मौतें कथित, सरकार 7 मान रही है। पीसीसी प्रमुख भक्त चरण दास का आरोप: मुख्यमंत्री और मंत्री दिल्ली में, जनता बेहाल। भद्रक कलेक्टर का कार्यकाल बढ़ाने की माँग, और नदी-मुहानों पर रेत जमाव को स्थायी समस्या बताया।

मुख्य बातें

ओडिशा के कई जिलों में 31 जुलाई 2026 को बाढ़ की स्थिति गंभीर, उत्तर ओडिशा सबसे अधिक प्रभावित।
कांग्रेस के दावे के अनुसार बाढ़ में लगभग 12 लोगों की मौत ; राज्य सरकार ने केवल 7 मौतों की पुष्टि की है।
5 से अधिक लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं।
पीसीसी अध्यक्ष भक्त चरण दास ने आरोप लगाया कि आपदा के दौरान मुख्यमंत्री और मंत्री दिल्ली में थे।
दास ने सरकार को पत्र लिखकर भद्रक के कलेक्टर का कार्यकाल तत्काल बढ़ाने की माँग की।
नदी-मुहानों पर रेत जमाव को बाढ़ की पुनरावृत्ति का प्रमुख कारण बताते हुए दीर्घकालिक नीति की माँग।

ओडिशा के कई जिलों में 31 जुलाई 2026 को बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है, जहाँ नदियों का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुँच चुका है और बड़े पैमाने पर जलभराव हो रहा है। इस आपदा के बीच ओडिशा प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीसीसी) के अध्यक्ष भक्त चरण दास ने राज्य सरकार पर संवेदनहीनता का आरोप लगाते हुए कहा कि बाढ़ पीड़ितों की उपेक्षा हो रही है और जनता का भरोसा टूट रहा है।

बाढ़ की स्थिति कितनी गंभीर

भक्त चरण दास के अनुसार, ओडिशा की चारों दिशाओं में बाढ़ का व्यापक प्रकोप है। उत्तर ओडिशा के अधिकांश हिस्से विशेष रूप से प्रभावित हैं, जहाँ कई नदियाँ खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। उनके दावे के अनुसार बाढ़ में अब तक लगभग 12 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि राज्य सरकार ने आधिकारिक तौर पर केवल 7 मौतों की पुष्टि की है। इसके अतिरिक्त 5 से अधिक लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। नदियों का बहाव लगातार बढ़ रहा है और आने वाले दिनों में स्थिति और विकट होने की आशंका जताई जा रही है।

सरकार पर संवेदनहीनता का आरोप

भक्त चरण दास ने कहा कि यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि जब पूरा ओडिशा बाढ़ और जलभराव की मार झेल रहा है, उस समय मुख्यमंत्री समेत कई मंत्री, सांसद और विधायक विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा लेने के लिए दिल्ली में हैं। उन्होंने कहा कि आपदा के समय सरकार का सारा ध्यान प्रभावित जनता की मदद पर केंद्रित होना चाहिए, लेकिन मौजूदा हालात सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाते हैं। उनके अनुसार इसी कारण जनता का सरकार पर भरोसा कमज़ोर पड़ रहा है।

प्रशासनिक तैयारी पर सवाल

पीसीसी प्रमुख ने राज्य सरकार को पत्र लिखकर भद्रक के कलेक्टर का कार्यकाल तत्काल बढ़ाने की माँग की है। उन्होंने कहा कि आपदा की स्थिति में प्रत्येक जिले में अनुभवी प्रशासनिक अधिकारी अनिवार्य हैं और जिन अधिकारियों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, उन्हें स्थिति सामान्य होने तक सेवा में बनाए रखा जाए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नयागढ़ जैसे कुछ क्षेत्रों की वास्तविक स्थिति की जानकारी तक सरकार के पास उपलब्ध नहीं है और कई इलाकों में राहत एवं बचाव कार्य अपर्याप्त हैं।

पूर्व तैयारी की विफलता

भक्त चरण दास ने कहा कि यदि समय रहते समुचित पूर्व तैयारी की गई होती तो नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता था। उन्होंने सरकार पर समीक्षा बैठकें और एहतियाती उपाय समय पर न करने का आरोप लगाया। यह ऐसे समय में आया है जब ओडिशा हर वर्ष मानसून के दौरान गंभीर बाढ़ की चपेट में आता है, और दीर्घकालिक समाधान की माँग लंबे समय से उठती रही है।

स्थायी समाधान की माँग

उन्होंने बाढ़ की पुनरावृत्ति रोकने के लिए दीर्घकालिक योजना की आवश्यकता पर जोर दिया। उनके अनुसार, जहाँ राज्य की नदियाँ समुद्र में मिलती हैं, वहाँ वर्षों से रेत जमने की समस्या बनी हुई है। समुद्र और नदियों से आने वाली रेत के कारण जल निकासी बाधित होती है, जिससे नदी का पानी तेज़ी से नहीं निकल पाता और आसपास के क्षेत्रों में व्यापक जलभराव हो जाता है। उन्होंने सरकार से इस दिशा में ठोस दीर्घकालिक नीति बनाने की अपील की ताकि आने वाले वर्षों में इस चक्रीय आपदा से राहत मिल सके।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन मृत्यु संख्या पर सरकारी और विपक्षी आँकड़ों के बीच का अंतर — 7 बनाम 12 — वह असली सवाल है जिसका स्वतंत्र सत्यापन होना चाहिए। ओडिशा हर मानसून में बाढ़ झेलता है, फिर भी नदी-मुहानों पर रेत जमाव जैसी संरचनात्मक समस्याओं का समाधान दशकों से लंबित है — यह किसी एक सरकार की नहीं, बल्कि लगातार प्रशासनिक उदासीनता की विफलता है। आपदा प्रबंधन में मुख्यमंत्री की अनुपस्थिति प्रतीकात्मक रूप से महँगी पड़ सकती है, पर असली जवाबदेही राहत पहुँचाने की गति और मृत्यु आँकड़ों की पारदर्शिता में है।
RashtraPress
15 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ओडिशा में बाढ़ से अब तक कितने लोगों की मौत हुई है?
कांग्रेस के पीसीसी अध्यक्ष भक्त चरण दास के अनुसार बाढ़ में कथित तौर पर लगभग 12 लोगों की मौत हुई है, जबकि राज्य सरकार ने आधिकारिक रूप से 7 मौतों की पुष्टि की है। 5 से अधिक लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं।
भक्त चरण दास ने ओडिशा सरकार पर क्या आरोप लगाए?
उन्होंने आरोप लगाया कि बाढ़ आपदा के दौरान मुख्यमंत्री समेत कई मंत्री, सांसद और विधायक दिल्ली में विभिन्न कार्यक्रमों में व्यस्त थे। उन्होंने इसे सरकार की संवेदनहीनता बताया और कहा कि इससे जनता का भरोसा कमज़ोर हो रहा है।
भद्रक कलेक्टर के कार्यकाल विस्तार की माँग क्यों की गई?
भक्त चरण दास ने कहा कि बाढ़ जैसी आपदा में अनुभवी अधिकारियों की ज़रूरत होती है। उन्होंने राज्य सरकार को पत्र लिखकर भद्रक के कलेक्टर का कार्यकाल तत्काल बढ़ाने की माँग की ताकि राहत एवं बचाव कार्य बाधित न हो।
ओडिशा में बाढ़ की पुनरावृत्ति का स्थायी समाधान क्या बताया गया?
भक्त चरण दास ने नदी-मुहानों पर रेत जमाव को जल निकासी बाधित होने का प्रमुख कारण बताया। उन्होंने सरकार से इस समस्या के लिए दीर्घकालिक नीति बनाने की माँग की ताकि हर वर्ष आने वाली बाढ़ से स्थायी राहत मिल सके।
नयागढ़ को लेकर क्या चिंता जताई गई?
भक्त चरण दास ने आरोप लगाया कि नयागढ़ जैसे कुछ क्षेत्रों की वास्तविक स्थिति की अद्यतन जानकारी तक सरकार के पास उपलब्ध नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रशासन को वास्तविक स्थिति का समुचित आकलन कर राहत कार्य तत्काल तेज़ करना चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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