ओडिशा बाढ़ पर बीजेडी का हमला: CM माझी की दिल्ली यात्रा के दौरान 7 मौतें, सरकार पर देरी का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
बीजू जनता दल (बीजेडी) ने रविवार, 2 अगस्त को ओडिशा की भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार पर गंभीर आरोप लगाए कि हालिया बाढ़ संकट के दौरान प्रशासनिक प्रतिक्रिया बेहद विलंबित रही, जिसके चलते 7 लोगों की जान गई, 1,380 पालतू जानवर मारे गए और हज़ारों एकड़ कृषि भूमि जलमग्न हो गई। विपक्षी दल का आरोप है कि मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी बाढ़ की गंभीरता के बावजूद नई दिल्ली में वरिष्ठ BJP नेताओं के साथ थे, और उनके लौटने के बाद ही राहत तंत्र सक्रिय हुआ।
मुख्य आरोप और घटनाक्रम
बीजेडी के प्रवक्ता एवं मीडिया समन्वयक डॉ. लेनिन मोहंती ने एक प्रेस बयान में कहा कि विपक्षी दलों की बार-बार की चेतावनियों के बावजूद राज्य सरकार ने अपेक्षित तत्परता नहीं दिखाई। उनके अनुसार, लगातार भारी वर्षा ने बाढ़ को गंभीर स्तर पर पहुँचा दिया था, लेकिन प्रशासन तब तक सुस्त रहा जब तक मुख्यमंत्री दिल्ली से वापस नहीं लौटे।
डॉ. मोहंती ने कहा, "बीजेडी और अन्य विपक्षी दलों ने बार-बार यह बताया कि बाढ़ की स्थिति गंभीर हो गई है, लेकिन राज्य सरकार ने वास्तविकता को नहीं समझा। मुख्यमंत्री के दिल्ली से लौटने और बाढ़ की गंभीरता को समझने के बाद ही उन्होंने कुछ मंत्रियों को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की निगरानी के लिए नियुक्त किया।"
नुकसान का दायरा
बीजेडी के वरिष्ठ नेताओं के अनुसार, बाढ़ में 7 लोगों की मृत्यु हुई, 1,380 पालतू जानवर काल के गाल में समा गए और हज़ारों एकड़ कृषि भूमि पानी में डूब गई। पार्टी का कहना है कि समय पर प्रशासनिक हस्तक्षेप से इस नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता था। यह ऐसे समय में आया है जब ओडिशा के कई ज़िले मानसून की अत्यधिक वर्षा से पहले से ही जूझ रहे थे।
सरकार की प्रतिक्रिया
बता दें कि मुख्यमंत्री माझी ने शनिवार को बाढ़ और लगातार बारिश से सर्वाधिक प्रभावित जिलों में राहत एवं पुनर्वास कार्यों की देखरेख के लिए वरिष्ठ मंत्रियों को नियुक्त किया। हालाँकि, बीजेडी का तर्क है कि यह कदम बहुत देर से उठाया गया और इससे पहले ही व्यापक क्षति हो चुकी थी।
राजनीतिक संदर्भ
गौरतलब है कि ओडिशा में BJP ने 2024 में सत्ता संभाली थी, जिससे बीजेडी के दो दशकों के शासन का अंत हुआ था। यह पहली बड़ी प्राकृतिक आपदा है जिसमें विपक्षी बीजेडी ने नई सरकार की आपदा प्रबंधन क्षमता पर सीधा सवाल उठाया है। आलोचकों का कहना है कि बाढ़ राहत में देरी राज्य सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े करती है।
आगे क्या होगा
नियुक्त मंत्री अब प्रभावित ज़िलों का दौरा कर राहत कार्यों की निगरानी कर रहे हैं। बीजेडी ने माँग की है कि सरकार बाढ़ प्रभावित परिवारों को तत्काल मुआवज़ा दे और भविष्य में ऐसी आपदाओं के लिए एक स्पष्ट प्रोटोकॉल तैयार करे।