30 अक्टूबर 2026
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चक्रवात 'अर्नब': ओडिशा के गंजाम में 43,000 से अधिक प्रभावित, 692 राहत केंद्र सक्रिय

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चक्रवात 'अर्नब': ओडिशा के गंजाम में 43,000 से अधिक प्रभावित, 692 राहत केंद्र सक्रिय

सारांश

चक्रवात 'अर्नब' ने ओडिशा के गंजाम में इतिहास की सबसे भीषण बारिश गिराई — सामान्य से 118% अधिक। 43,000 से अधिक लोग प्रभावित, 23,000+ राहत केंद्रों में। नौसेना के हेलीकॉप्टर, तटरक्षक बल और ओडीआरएएफ एक साथ मैदान में हैं। असली चुनौती अभी भी उन इलाकों तक पहुँचना है जो पानी में डूबे हैं।

मुख्य बातें

चक्रवात 'अर्नब' से ओडिशा के गंजाम और गजपति जिलों में भीषण बाढ़; सड़क और पुल बह गए।
गंजाम में सामान्य से 118% , गजपति में 103% और कंधमाल में 123% अधिक वर्षा दर्ज।
अकेले गंजाम में 43,000+ प्रभावित; 23,323 लोगों को निकालकर 352 राहत केंद्रों में रखा गया।
भारतीय नौसेना के 4 हेलीकॉप्टर गंजाम के 21 स्थानों पर राहत सामग्री वितरित कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी ने प्रभावित जिलों का हवाई सर्वेक्षण किया; केंद्रीय दल का दौरा जल्द संभावित।
पिछले 24 घंटों में बारिश न होने से स्थिति में सुधार की उम्मीद।

चक्रवाती तूफान 'अर्नब' के चलते हुई अभूतपूर्व बारिश ने ओडिशा के गंजाम और गजपति जिलों में भीषण बाढ़ की स्थिति पैदा कर दी है, जिससे हजारों लोग अपने घरों में और दुर्गम इलाकों में फंसे हुए हैं। 30 अक्टूबर 2026 को उपलब्ध आँकड़ों के अनुसार, अकेले गंजाम जिले में 43,000 से अधिक लोग प्रभावित हो चुके हैं, जबकि नौसेना, तटरक्षक बल और आपदा प्रबंधन दल बचाव अभियान में जुटे हैं।

बारिश के टूटे सभी पुराने रिकॉर्ड

ओडिशा के राजस्व और आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी ने शुक्रवार को मीडिया को बताया कि गुरुवार से पूर्व के तीन दिनों के वर्षा आँकड़ों के विश्लेषण में चौंकाने वाले नतीजे सामने आए हैं। गंजाम जिले में सामान्य से 118 प्रतिशत अधिक वर्षा दर्ज की गई, गजपति में 103 प्रतिशत और कंधमाल में 123 प्रतिशत अधिक बारिश हुई।

मंत्री पुजारी ने स्पष्ट किया कि गंजाम जिले में इस बार वर्षा के सभी ऐतिहासिक रिकॉर्ड टूट गए हैं। इतने कम समय में इतनी अधिक वर्षा के कारण जिले में व्यापक क्षति हुई है — सड़कें और पुल ध्वस्त हो गए हैं, जिससे कई इलाकों का संपर्क पूरी तरह कट गया है।

प्रभावित क्षेत्र और राहत केंद्रों की स्थिति

गंजाम जिले के 22 ब्लॉकों और 18 शहरी स्थानीय निकायों के अंतर्गत 386 गाँव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। जिले में कुल 352 राहत केंद्र कार्यरत हैं, जहाँ 23,300 लोग शरण लिए हुए हैं। इनमें से 23,323 लोगों को निकालकर राहत शिविरों में पहुँचाया जा चुका है।

गजपति जिले में 340 राहत केंद्र सक्रिय हैं और वहाँ 21,782 लोगों ने शरण ली है। मंत्री पुजारी ने चेताया कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में अभी भी फंसे लोगों की संख्या राहत केंद्रों में दर्ज लोगों की संख्या से कहीं अधिक है।

बचाव अभियान: नौसेना, तटरक्षक और ओडीआरएएफ मैदान में

गुरुवार को भारतीय तटरक्षक बल के एयर क्रू ने एएलएच एमके-थर्ड हेलीकॉप्टर की सहायता से गंजाम जिले के जगमोहन स्थित एक जलमग्न सार्वजनिक स्वास्थ्य केंद्र से छह लोगों — जिनमें दो महिलाएँ, दो बच्चे और एक बुजुर्ग व्यक्ति शामिल थे — को सुरक्षित निकाला।

भारतीय नौसेना ने चार हेलीकॉप्टरों का उपयोग करते हुए शुक्रवार को बाढ़ प्रभावित गंजाम जिले के 21 स्थानों पर खाद्य पैकेट और राहत सामग्री गिराना शुरू किया। अग्निशमन दलों और ओडिशा आपदा त्वरित कार्रवाई बल (ओडीआरएएफ) ने मिलकर गंजाम के बरहमपुर से 303, छत्रपुर से 359, गजपति से 31 और कंधमाल से 91 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया है।

गौरतलब है कि तेज़ जलधाराओं के कारण शुरुआती दौर में बचाव दल कई इलाकों तक नहीं पहुँच पा रहे थे, लेकिन जल प्रवाह में कमी आने के बाद अब उन्हें अधिकांश प्रभावित गाँवों तक पहुँचने की अनुमति मिल गई है।

मुख्यमंत्री का हवाई सर्वेक्षण, केंद्रीय दल का दौरा संभव

मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी ने गंजाम और अन्य प्रभावित जिलों का हवाई सर्वेक्षण कर नुकसान का जायजा लिया। राजस्व मंत्री पुजारी ने उम्मीद जताई कि पिछले 24 घंटों में वर्षा न होने के कारण स्थिति में शीघ्र सुधार होगा।

यह ऐसे समय में आया है जब ओडिशा लगातार कई वर्षों से चक्रवाती मौसम में भारी तबाही झेल रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, एक केंद्रीय दल जल्द ही प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर नुकसान का आकलन करने की संभावना है, जिसके बाद राहत राशि स्वीकृत की जा सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि जलवायु चरम की बढ़ती आवृत्ति का संकेत है — ओडिशा अब हर कुछ वर्षों में नहीं, बल्कि हर सीज़न में इस पैमाने की आपदा झेल रहा है। राहत केंद्रों में 23,000+ लोगों की संख्या प्रभावशाली लगती है, लेकिन मंत्री की यह स्वीकारोक्ति कि 'फंसे लोग राहत केंद्रों से कहीं अधिक हैं' — असली तस्वीर की गंभीरता उजागर करती है। नौसेना और तटरक्षक की तैनाती स्वागतयोग्य है, परंतु दक्षिण ओडिशा में बार-बार आने वाली बाढ़ यह सवाल उठाती है कि स्थायी बाढ़ रोधी बुनियादी ढाँचे में निवेश क्यों नहीं हो रहा। केंद्रीय दल के आकलन के बाद जो राशि मिलेगी, वह तात्कालिक राहत तो देगी — लेकिन अगले चक्रवात की तैयारी के लिए नहीं।
RashtraPress
30 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चक्रवात 'अर्नब' से ओडिशा में कितने लोग प्रभावित हुए हैं?
30 अक्टूबर 2026 तक के आँकड़ों के अनुसार, अकेले गंजाम जिले में 43,000 से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं, जिनमें से 23,323 को निकालकर राहत केंद्रों में रखा गया है। गजपति के 340 राहत केंद्रों में अतिरिक्त 21,782 लोग शरण लिए हुए हैं।
ओडिशा में बाढ़ बचाव के लिए कौन-कौन सी एजेंसियाँ तैनात हैं?
भारतीय नौसेना के चार हेलीकॉप्टर गंजाम के 21 स्थानों पर राहत सामग्री गिरा रहे हैं। भारतीय तटरक्षक बल, ओडिशा आपदा त्वरित कार्रवाई बल (ओडीआरएएफ) और अग्निशमन दल भी बचाव अभियान में सक्रिय हैं।
गंजाम में इस बार कितनी अधिक बारिश हुई है?
राजस्व और आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी के अनुसार, गंजाम में सामान्य से 118 प्रतिशत अधिक वर्षा दर्ज की गई, जो जिले के ऐतिहासिक रिकॉर्ड को तोड़ती है। इसी अवधि में गजपति में 103% और कंधमाल में 123% अधिक वर्षा हुई।
ओडिशा में राहत और बचाव कार्य कब तक पूरा होने की उम्मीद है?
मंत्री सुरेश पुजारी ने बताया कि पिछले 24 घंटों में बारिश न होने से स्थिति में जल्द सुधार की उम्मीद है। जल प्रवाह कम होने के बाद बचाव दल अब अधिकांश प्रभावित गाँवों तक पहुँच पा रहे हैं।
केंद्र सरकार ओडिशा बाढ़ में क्या सहायता दे रही है?
रिपोर्टों के अनुसार, एक केंद्रीय दल जल्द ही प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर नुकसान का आकलन करने की संभावना है। मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी ने हवाई सर्वेक्षण किया है और भारतीय नौसेना व तटरक्षक बल पहले से ही राहत अभियान में लगे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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