चक्रवात अर्नब: राहुल गांधी ने माँगी त्वरित राहत, आंध्र में 7 मौतें, ₹4,600 करोड़ का नुकसान
सारांश
मुख्य बातें
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने 29 अक्टूबर 2026 को आंध्र प्रदेश में चक्रवात अर्नब और ओडिशा में भारी वर्षा व बाढ़ से हुई तबाही पर गहरी चिंता जताई और प्रभावित परिवारों तक शीघ्र राहत एवं पुनर्वास सहायता पहुँचाने के लिए संबंधित राज्य सरकारों से अपील की। एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर जारी संदेश में उन्होंने आपदा में जान गँवाने वालों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की।
राहुल गांधी का संदेश
राहुल गांधी ने अपनी पोस्ट में कहा कि आंध्र प्रदेश में चक्रवात अर्नब और ओडिशा में भारी वर्षा व बाढ़ की स्थिति अत्यंत चिंताजनक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी संवेदनाएँ उन सभी लोगों के साथ हैं जिन्होंने अपने प्रियजनों, घरों, आजीविका और सुरक्षा की भावना को खोया है। उन्होंने राज्य सरकारों से आग्रह किया कि इस कठिन घड़ी में प्रत्येक प्रभावित परिवार तक राहत और पुनर्वास सहायता शीघ्र पहुँचाई जाए।
मुख्य घटनाक्रम — नुकसान का आकलन
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने बताया कि चक्रवात अर्नब के कारण राज्य में सात लोगों की मौत हुई है और प्रारंभिक आकलन के अनुसार करीब ₹4,600 करोड़ का नुकसान हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि विस्तृत सर्वेक्षण के बाद यह आँकड़ा और बढ़ सकता है। कोनसीमा और पश्चिम गोदावरी जिले सर्वाधिक प्रभावित बताए गए हैं।
नायडू ने प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण करने के बाद कहा कि राज्य सरकार ने केंद्र सरकार को नुकसान की प्रारंभिक रिपोर्ट भेज दी है। केंद्रीय मूल्यांकन दल शुक्रवार को राज्य का दौरा कर नुकसान का स्वतंत्र आकलन करेगा।
राहत एवं पुनर्वास उपाय
राज्य सरकार ने राहत शिविरों में रह रहे परिवारों को घर वापसी पर 25 किलो चावल, आवश्यक वस्तुओं का पैकेट और तत्काल खर्च के लिए वित्तीय सहायता देने का निर्णय लिया है। इसके अतिरिक्त, क्षतिग्रस्त प्रत्येक नारियल और ऑयल पाम के पेड़ के लिए ₹1,500 की सहायता राशि देने की घोषणा की गई है। किसानों को फसल बीमा योजना के तहत मुआवजा भी दिया जाएगा।
गौरतलब है कि चक्रवात के कारण अकेले कोनसीमा जिले में लगभग 8,000 बिजली के खंभे गिर गए हैं। बिजली और दूरसंचार सेवाओं को बहाल करने के लिए युद्धस्तर पर काम किया जा रहा है।
राहत कार्य — बल की तैनाती
चक्रवात के बाद राहत कार्यों में लगभग 30,000 अधिकारियों और कर्मचारियों को तैनात किया गया है। तेलंगाना से भी 1,000 बिजली कर्मियों की सहायता माँगी गई है ताकि विद्युत आपूर्ति शीघ्र बहाल की जा सके। मुख्यमंत्री नायडू ने कहा कि एहतियाती उपायों के चलते बड़े पैमाने पर जनहानि को रोका जा सका, परंतु सात लोगों की मौत बेहद दुखद है।
आगे क्या
यह ऐसे समय में आया है जब मानसून के बाद के चक्रवाती तूफान दक्षिण-पूर्वी तट के लिए हर वर्ष गंभीर चुनौती बनते हैं। केंद्रीय टीम का दौरा और विस्तृत नुकसान सर्वेक्षण पूरा होने के बाद राहत पैकेज का अंतिम स्वरूप तय होगा। विशेषज्ञों के अनुसार कोनसीमा जैसे डेल्टाई जिलों में बुनियादी ढाँचे की बहाली में कई सप्ताह लग सकते हैं।