गंगासागर तक पहुंचेगी विकास की लहर, सुधांशु त्रिवेदी का TMC पर बड़ा हमला
सारांश
Key Takeaways
- डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने 26 अप्रैल को कोलकाता में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर TMC पर भ्रष्टाचार, अपराध और तुष्टीकरण के आरोप लगाए।
- पश्चिम बंगाल बजट में उद्योग के लिए 1,100 करोड़ बनाम मदरसों के लिए 5,713 करोड़ के आवंटन पर विरोधाभास उजागर किया।
- TMC के घोषणापत्र का नाम 'इश्तेहार' रखे जाने को बंगाली अस्मिता के दावों के विरुद्ध बताया, कहा यह अरबी-फारसी मूल का शब्द है।
- भाजपा ने 5 वर्षों में 1 करोड़ रोजगार, महिलाओं को 3,000 रुपए मासिक सहायता और महिला पुलिस बटालियन का वादा किया।
- त्रिवेदी ने ममता बनर्जी के पुराने बयान का हवाला देकर तुष्टीकरण की राजनीति का आरोप और मजबूत किया।
- गंगा के प्रतीक के जरिए कहा — राष्ट्रवाद और विकास की लहर को गंगासागर तक पहुंचने से अब कोई नहीं रोक सकता।
कोलकाता, 26 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं राज्यसभा सांसद डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने रविवार को कोलकाता में आयोजित प्रेस वार्ता में तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार पर जोरदार प्रहार किया। उन्होंने TMC पर संस्थागत भ्रष्टाचार, अपराधियों को संरक्षण और खतरनाक तुष्टीकरण की राजनीति के गंभीर आरोप लगाए। त्रिवेदी ने दावा किया कि जिस तरह गंगा उत्तराखंड से बंगाल तक अविरल बहती है, उसी तरह राष्ट्रवाद और विकास की धारा को अब गंगासागर तक पहुंचने से कोई नहीं रोक सकता।
पश्चिम बंगाल में TMC शासन पर भाजपा का आरोपों का सिलसिला
डॉ. त्रिवेदी ने कहा कि एक दौर था जब कोलकाता पूरे देश में उद्योग, आर्थिक प्रगति और रोजगार का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता था। हर कोई अवसरों के लिए कोलकाता की ओर देखता था, लेकिन TMC के शासन में पश्चिम बंगाल विकास की दौड़ में पिछड़ता चला गया। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार, अपराध और तुष्टीकरण — इन तीन कारकों ने मिलकर राज्य में भय का वातावरण बना दिया है।
त्रिवेदी ने ममता बनर्जी के उस पुराने बयान का हवाला दिया जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर उनकी सरकार सत्ता से बाहर हुई तो एक विशेष समुदाय कुछ ही सेकंड में सब कुछ तबाह कर सकता है। भाजपा सांसद ने इसे तुष्टीकरण की राजनीति का सबसे खतरनाक उदाहरण बताया।
TMC के 'इश्तेहार' पर उठाया सवाल — बंगाली अस्मिता या दिखावा?
TMC के चुनावी घोषणापत्र का नाम 'इश्तेहार' रखे जाने पर सुधांशु त्रिवेदी ने तीखा सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि TMC बंगाली भाषा और अस्मिता की दुहाई देती है, लेकिन 'इश्तेहार' कोई बंगाली शब्द नहीं है — यह अरबी-फारसी मूल का शब्द है जो उर्दू में प्रचलित है। उन्होंने पूछा कि किस मानसिकता के तहत यह शब्द चुना गया?
इसी क्रम में उन्होंने यूसुफ पठान का उदाहरण देते हुए कहा कि बाहर से आकर चुनाव जीतने वाले ऐसे नेता बंगाली का एक शब्द भी नहीं बोल पाते। यह बंगाली अस्मिता के दावों की विडंबना है।
महिला सुरक्षा और सशक्तीकरण पर भाजपा बनाम TMC
डॉ. त्रिवेदी ने TMC सरकार पर आरोप लगाया कि उसने महिलाओं को अंधेरा होने के बाद घर से बाहर न निकलने की सलाह दी। उन्होंने इसे महिला सुरक्षा के प्रति सरकार की घोर उदासीनता करार दिया।
इसके विपरीत, उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चलाई जा रही मुद्रा योजना, हर घर नल योजना, उज्ज्वला योजना, स्वच्छता अभियान और प्रधानमंत्री आवास योजना का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन योजनाओं ने गरीब महिलाओं को मालिकाना हक दिया और उन्हें आत्मनिर्भर बनाया। 15 अगस्त 2014 को लाल किले से 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' अभियान की घोषणा का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इससे लिंगानुपात में सुधार हुआ है।
भाजपा का घोषणापत्र — एक करोड़ रोजगार और महिला पुलिस बटालियन का वादा
भाजपा के घोषणापत्र का उल्लेख करते हुए त्रिवेदी ने बताया कि पार्टी की सरकार बनने पर अगले पांच वर्षों में एक करोड़ रोजगार के अवसर सृजित किए जाएंगे। महिलाओं को 3,000 रुपए की मासिक वित्तीय सहायता दी जाएगी और उनकी सुरक्षा के लिए एक अलग महिला पुलिस बटालियन का गठन किया जाएगा।
उन्होंने पूर्वी भारत में बाढ़ नियंत्रण के लिए केंद्र सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का भी उल्लेख किया। नदियों की गाद निकालने, उन्हें गहरा करने और अंतर्देशीय जल परिवहन प्रणाली शुरू करने की बात कही। उन्होंने बताया कि आज पूर्वी क्षेत्र में 100 से अधिक राष्ट्रीय जलमार्ग सक्रिय हैं।
बजट का विरोधाभास — उद्योग के लिए 1,100 करोड़, मदरसों के लिए 5,713 करोड़
पश्चिम बंगाल सरकार के बजट आवंटन पर तीखी आलोचना करते हुए त्रिवेदी ने बताया कि औद्योगिक विकास के लिए मात्र 1,100 करोड़ रुपए और विज्ञान-प्रौद्योगिकी के लिए केवल 182 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं। इसके विपरीत, मौलवियों, मुअज्जिनों और मदरसों के लिए 5,713 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।
यह आंकड़ा राजनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सीधे तौर पर TMC की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़ा करता है — जब राज्य में उद्योग और रोजगार की भारी कमी है, तब बजट का इस तरह का आवंटन विकास-विरोधी मानसिकता को दर्शाता है।
उन्होंने तमिलनाडु में सनातन धर्म विरोधी सम्मेलनों का उदाहरण देते हुए कहा कि TMC और कुछ अन्य दलों का दो-सूत्रीय एजेंडा — सनातन धर्म का विरोध और घुसपैठ का समर्थन — पूरे देश में एक जैसा है।
आगामी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले भाजपा की यह आक्रामक रणनीति संकेत देती है कि पार्टी राज्य में TMC को हर मोर्चे पर घेरने की तैयारी में है। अब देखना होगा कि ममता बनर्जी और TMC इन आरोपों का किस तरह जवाब देती है।