ऑपरेशन सिंदूर में तबाह आतंकी ठिकाने फिर हो रहे सक्रिय, जैश-ए-मोहम्मद ने केपीके में शिफ्ट किया बेस

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ऑपरेशन सिंदूर में तबाह आतंकी ठिकाने फिर हो रहे सक्रिय, जैश-ए-मोहम्मद ने केपीके में शिफ्ट किया बेस

सारांश

ऑपरेशन सिंदूर में तबाह जैश-ए-मोहम्मद के ठिकाने फिर खड़े हो रहे हैं। MEMRI की रिपोर्ट में सैटेलाइट तस्वीरों के हवाले से बहावलपुर और पीओके में पुनर्निर्माण की पुष्टि हुई है, जबकि जैश ने अपना बेस केपीके में शिफ्ट कर लिया है — यह सब कथित तौर पर पाकिस्तानी सरकारी मदद से।

मुख्य बातें

MEMRI की रिपोर्ट के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर में तबाह जैश-ए-मोहम्मद के ठिकानों पर पुनर्निर्माण कार्य शुरू हो गया है।
14 अप्रैल 2026 की सैटेलाइट तस्वीरों में बहावलपुर के जामिया सुभान अल्लाह परिसर में भारी मशीनें और निर्माण वाहन देखे गए।
जैश ने अपने प्रमुख ऑपरेशनल बेस पीओके से खैबर पख्तूनख्वा (केपीके) में स्थानांतरित किए, कथित तौर पर पाकिस्तानी सरकारी मदद से।
जैश की खुली सभाएं पुलिस सुरक्षा में आयोजित हुईं; जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम की भी कथित भूमिका।
पाकिस्तान अक्टूबर 2022 में एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट से बाहर आया था, लेकिन अभी भी APG की निगरानी में है।

जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी ठिकाने, जिन्हें ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेना ने भारी नुकसान पहुंचाया था, अब फिर से सक्रिय होने के संकेत दे रहे हैं। मिडिल ईस्ट मीडिया रिसर्च इंस्टीट्यूट (MEMRI) की एक रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में इन ठिकानों पर बड़े पैमाने पर पुनर्निर्माण कार्य जारी है और जैश ने अपने कई प्रमुख ऑपरेशनल बेस खैबर पख्तूनख्वा (केपीके) में स्थानांतरित कर दिए हैं। यह रिपोर्ट मंगलवार, 12 मई 2026 को सामने आई है।

सैटेलाइट तस्वीरों में दिखा पुनर्निर्माण

MEMRI की रिपोर्ट में अमेरिकी स्पेस टेक्नोलॉजी कंपनी 'वंटोर' की हाई-रेजोल्यूशन सैटेलाइट तस्वीरों का हवाला दिया गया है। इन तस्वीरों में बहावलपुर स्थित एन-5 नेशनल हाईवे के पास जामिया सुभान अल्लाह परिसर में भारी मशीनें और निर्माण वाहन काम करते नजर आए। 14 अप्रैल 2026 की तस्वीरों में स्पष्ट रूप से निर्माण सामग्री और मशीनें दिखाई दीं।

रिपोर्ट के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान मस्जिद के जो गुंबद क्षतिग्रस्त हुए थे, उन्हें दोबारा बना दिया गया है। नए गुंबदों का रंग पहले की तुलना में अधिक गहरा है, जो हाल ही में हुए सीमेंट कार्य का संकेत देता है। इसके अलावा, 22 अप्रैल 2026 की सैटेलाइट तस्वीरों में पीओके की सैयदना बिलाल मस्जिद में भी इसी तरह की गतिविधियां देखी गईं, जिसे जैश-ए-मोहम्मद से जुड़ा माना जाता है।

जैश ने पीओके से केपीके में शिफ्ट किया बेस

रिपोर्ट में कहा गया है कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद जैश-ए-मोहम्मद ने अपने कई अहम ऑपरेशनल बेस पीओके से हटाकर खैबर पख्तूनख्वा (केपीके) में स्थानांतरित कर दिए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय हमलों के बाद पीओके को संगठन के लिए कम सुरक्षित माना जाने लगा, जबकि केपीके को अधिक सुरक्षित और बचाव योग्य विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।

गौरतलब है कि ऑपरेशन सिंदूर के तहत भारतीय सेना ने पाकिस्तान और पीओके में जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा और हिजबुल मुजाहिदीन से जुड़े नौ आतंकी ठिकानों पर हमला किया था। यह ऑपरेशन 22 अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में चलाया गया था।

पाकिस्तानी सरकारी तंत्र की कथित भूमिका

MEMRI की रिपोर्ट में मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से दावा किया गया है कि जैश का यह स्थानांतरण कथित तौर पर पाकिस्तान की सरकारी मशीनरी की सीधी मदद से किया जा रहा है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि जैश-ए-मोहम्मद की खुली सभाएं पुलिस सुरक्षा में आयोजित हुईं और कट्टरपंथी इस्लामी संगठन जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम की भी इसमें कथित भूमिका रही।

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े बताए जा रहे सोशल मीडिया अकाउंट्स ने डिजिटल वॉलेट्स के जरिए जामिया सुभान अल्लाह परिसर के पुनर्निर्माण के लिए फंड जुटाने के संकेत दिए।

एफएटीएफ और अंतरराष्ट्रीय निगरानी पर सवाल

पाकिस्तान अभी भी एशिया पैसिफिक ग्रुप (APG) ऑन मनी लॉन्ड्रिंग की निगरानी में है। उल्लेखनीय है कि पाकिस्तान अक्टूबर 2022 में एफएटीएफ (FATF) की ग्रे लिस्ट से बाहर आया था।

एफएटीएफ की अध्यक्ष एलिसा डी एंडा माद्राजो ने पहले कहा था कि ग्रे लिस्ट से बाहर आ चुके देश भी मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवादी फंडिंग के खतरे से पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं और उन्होंने सरकारों से सख्त निगरानी जारी रखने की अपील की थी। MEMRI की रिपोर्ट में कहा गया,

संपादकीय दृष्टिकोण

यह रिपोर्ट उसकी सीमाओं को रेखांकित करती है — हमले से ठिकाने नष्ट होते हैं, लेकिन संगठन नहीं। जैश का केपीके में पुनर्स्थापन और पाकिस्तानी सरकारी तंत्र की कथित संलिप्तता यह दर्शाती है कि इस्लामाबाद की दोहरी नीति में कोई बुनियादी बदलाव नहीं आया है। एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट से निकलने के बावजूद पाकिस्तान में आतंकी ढांचे का पुनर्निर्माण अंतरराष्ट्रीय निगरानी तंत्र की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्न उठाता है। भारत के लिए असली चुनौती अब कूटनीतिक मोर्चे पर है — इन सैटेलाइट साक्ष्यों को वैश्विक मंचों पर प्रभावी ढंग से पेश करना।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों पर क्या हो रहा है?
MEMRI की रिपोर्ट के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर में तबाह हुए जैश-ए-मोहम्मद के ठिकानों पर बड़े पैमाने पर पुनर्निर्माण कार्य शुरू हो गया है। बहावलपुर के जामिया सुभान अल्लाह परिसर और पीओके की सैयदना बिलाल मस्जिद में सैटेलाइट तस्वीरों से निर्माण गतिविधियां देखी गई हैं।
जैश-ए-मोहम्मद ने अपना बेस कहां शिफ्ट किया है?
रिपोर्ट के अनुसार, जैश-ए-मोहम्मद ने अपने प्रमुख ऑपरेशनल बेस पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) से हटाकर खैबर पख्तूनख्वा (केपीके) में स्थानांतरित कर दिए हैं। भारतीय हमलों के बाद पीओके को कम सुरक्षित माना जाने लगा था।
MEMRI रिपोर्ट में पाकिस्तानी सरकार की क्या भूमिका बताई गई है?
MEMRI की रिपोर्ट में मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से दावा किया गया है कि जैश का यह स्थानांतरण कथित तौर पर पाकिस्तानी सरकारी मशीनरी की सीधी मदद से हो रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, जैश की खुली सभाएं पुलिस सुरक्षा में आयोजित हुईं और जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम की भी इसमें भूमिका रही।
एफएटीएफ और पाकिस्तान की मौजूदा स्थिति क्या है?
पाकिस्तान अक्टूबर 2022 में एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट से बाहर आया था, लेकिन वह अभी भी एशिया पैसिफिक ग्रुप (APG) ऑन मनी लॉन्ड्रिंग की निगरानी में है। एफएटीएफ अध्यक्ष एलिसा डी एंडा माद्राजो ने चेतावनी दी थी कि ग्रे लिस्ट से बाहर आए देश भी आतंकी फंडिंग के खतरे से पूरी तरह मुक्त नहीं हैं।
ऑपरेशन सिंदूर में कितने और कौन से आतंकी ठिकानों पर हमला हुआ था?
ऑपरेशन सिंदूर के तहत भारतीय सेना ने पाकिस्तान और पीओके में जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा और हिजबुल मुजाहिदीन से जुड़े नौ आतंकी ठिकानों पर हमला किया था। यह ऑपरेशन 22 अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में चलाया गया था।
राष्ट्र प्रेस