ऑपरेशन सिंदूर में तबाह आतंकी ठिकाने फिर हो रहे सक्रिय, जैश-ए-मोहम्मद ने केपीके में शिफ्ट किया बेस
सारांश
मुख्य बातें
जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी ठिकाने, जिन्हें ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेना ने भारी नुकसान पहुंचाया था, अब फिर से सक्रिय होने के संकेत दे रहे हैं। मिडिल ईस्ट मीडिया रिसर्च इंस्टीट्यूट (MEMRI) की एक रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में इन ठिकानों पर बड़े पैमाने पर पुनर्निर्माण कार्य जारी है और जैश ने अपने कई प्रमुख ऑपरेशनल बेस खैबर पख्तूनख्वा (केपीके) में स्थानांतरित कर दिए हैं। यह रिपोर्ट मंगलवार, 12 मई 2026 को सामने आई है।
सैटेलाइट तस्वीरों में दिखा पुनर्निर्माण
MEMRI की रिपोर्ट में अमेरिकी स्पेस टेक्नोलॉजी कंपनी 'वंटोर' की हाई-रेजोल्यूशन सैटेलाइट तस्वीरों का हवाला दिया गया है। इन तस्वीरों में बहावलपुर स्थित एन-5 नेशनल हाईवे के पास जामिया सुभान अल्लाह परिसर में भारी मशीनें और निर्माण वाहन काम करते नजर आए। 14 अप्रैल 2026 की तस्वीरों में स्पष्ट रूप से निर्माण सामग्री और मशीनें दिखाई दीं।
रिपोर्ट के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान मस्जिद के जो गुंबद क्षतिग्रस्त हुए थे, उन्हें दोबारा बना दिया गया है। नए गुंबदों का रंग पहले की तुलना में अधिक गहरा है, जो हाल ही में हुए सीमेंट कार्य का संकेत देता है। इसके अलावा, 22 अप्रैल 2026 की सैटेलाइट तस्वीरों में पीओके की सैयदना बिलाल मस्जिद में भी इसी तरह की गतिविधियां देखी गईं, जिसे जैश-ए-मोहम्मद से जुड़ा माना जाता है।
जैश ने पीओके से केपीके में शिफ्ट किया बेस
रिपोर्ट में कहा गया है कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद जैश-ए-मोहम्मद ने अपने कई अहम ऑपरेशनल बेस पीओके से हटाकर खैबर पख्तूनख्वा (केपीके) में स्थानांतरित कर दिए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय हमलों के बाद पीओके को संगठन के लिए कम सुरक्षित माना जाने लगा, जबकि केपीके को अधिक सुरक्षित और बचाव योग्य विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।
गौरतलब है कि ऑपरेशन सिंदूर के तहत भारतीय सेना ने पाकिस्तान और पीओके में जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा और हिजबुल मुजाहिदीन से जुड़े नौ आतंकी ठिकानों पर हमला किया था। यह ऑपरेशन 22 अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में चलाया गया था।
पाकिस्तानी सरकारी तंत्र की कथित भूमिका
MEMRI की रिपोर्ट में मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से दावा किया गया है कि जैश का यह स्थानांतरण कथित तौर पर पाकिस्तान की सरकारी मशीनरी की सीधी मदद से किया जा रहा है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि जैश-ए-मोहम्मद की खुली सभाएं पुलिस सुरक्षा में आयोजित हुईं और कट्टरपंथी इस्लामी संगठन जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम की भी इसमें कथित भूमिका रही।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े बताए जा रहे सोशल मीडिया अकाउंट्स ने डिजिटल वॉलेट्स के जरिए जामिया सुभान अल्लाह परिसर के पुनर्निर्माण के लिए फंड जुटाने के संकेत दिए।
एफएटीएफ और अंतरराष्ट्रीय निगरानी पर सवाल
पाकिस्तान अभी भी एशिया पैसिफिक ग्रुप (APG) ऑन मनी लॉन्ड्रिंग की निगरानी में है। उल्लेखनीय है कि पाकिस्तान अक्टूबर 2022 में एफएटीएफ (FATF) की ग्रे लिस्ट से बाहर आया था।
एफएटीएफ की अध्यक्ष एलिसा डी एंडा माद्राजो ने पहले कहा था कि ग्रे लिस्ट से बाहर आ चुके देश भी मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवादी फंडिंग के खतरे से पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं और उन्होंने सरकारों से सख्त निगरानी जारी रखने की अपील की थी। MEMRI की रिपोर्ट में कहा गया,