क्या पाकिस्तान सोशल मीडिया के जरिए झूठी कहानी गढ़ने की कोशिश कर रहा है?
सारांश
Key Takeaways
- पाकिस्तान ने सोशल मीडिया का सहारा लिया है।
- भ्रामक तस्वीरें साझा की गई हैं।
- रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार कोई ठोस सबूत नहीं है।
- तथ्यों के खिलाफ झूठे दावे किए जा रहे हैं।
- यह एक जानबूझकर फैलाई गई गलत जानकारी है।
नई दिल्ली, 2 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। पाकिस्तान ने ऑपरेशन सिंदूर से जुड़ी एक झूठी और असफल कहानी को पुनर्जीवित करने का प्रयास किया है। इस हताशा में, पाकिस्तान ने एक बार फिर सोशल मीडिया का सहारा लिया है।
वास्तव में, पाकिस्तान से जुड़े कुछ सोशल मीडिया अकाउंट भ्रामक और बिना किसी प्रमाण के सैटेलाइट तस्वीरें साझा कर रहे हैं। ये तस्वीरें यह झूठा दावा कर रही हैं कि भारत के पंजाब, विशेषकर अमृतसर के आसपास के सैन्य ठिकानों पर हमले किए गए हैं। हालांकि, रक्षा विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि ये दावे वास्तविकता पर आधारित नहीं हैं।
ओपन सोर्स से जानकारी इकट्ठा करने वाले विश्लेषकों का कहना है कि इन नई तस्वीरों में जानबूझकर सीमित हिस्से दिखाए गए हैं। इन तस्वीरों में हमले के कोई स्पष्ट संकेत नहीं मिलते। मतलब, ऐसी कोई फोटो नहीं है जिसमें गड्ढे, मलबा, जले हुए निशान या ढांचे को हुआ नुकसान दिखाई दे। यहां तक कि उसी जगह की पुरानी और नई तस्वीरों की तुलना करने पर भी कोई बदलाव नहीं दिखता।
रक्षा विशेषज्ञ बताते हैं कि जिन जगहों की तस्वीरें दिखाई जा रही हैं, उनकी स्वतंत्र जांच में स्पष्ट पता चलता है कि वहां किसी भी प्रकार की तबाही या नुकसान का कोई निशान नहीं है। पाकिस्तान के सोशल मीडिया में जिन भारतीय सैन्य ठिकानों का जिक्र किया गया है, वे पूरी तरह सुरक्षित हैं। वहां न तो विस्फोट के निशान हैं, न ही इमारतों या आसपास के इलाके में कोई नुकसान दिखाई देता है। पिछले वर्ष मई में जब वास्तविक सैन्य घटनाएं हुई थीं, तब पाकिस्तान अपने दावों के समर्थन में कोई ठोस सैटेलाइट तस्वीरें नहीं दिखा सका था।
इन दावों के सामने आने का समय भी महत्वपूर्ण सवाल खड़ा करता है। अब सात महीने बाद, बिना तारीख, बिना सैटेलाइट के स्रोत और बिना किसी पुख्ता जानकारी के अचानक ऐसी तस्वीरों का सामने आना, इस बात की ओर इशारा करता है कि यह बाद में गढ़ी गई कहानी है, न कि उस समय की सच्ची तस्वीरें। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब पाकिस्तान ने इस तरह के बढ़ा-चढ़ाकर झूठे दावे किए हों। पिछले साल सैन्य ऑपरेशन के दौरान और उसके तुरंत बाद भी, पाकिस्तान से जुड़े सोशल मीडिया अकाउंट्स ने तथाकथित ‘जीत के आंकड़े’ और भारत की ‘रणनीतिक ताकत पर हमला’ जैसे दावे किए थे, जिन्हें कोई भी स्वतंत्र जांच सही साबित नहीं कर पाई।
इन तथ्यों के सामने आने के बावजूद, ऐसी तस्वीरों का लगातार प्रचार किया जाना इस बात को दर्शाता है कि यह सामान्य भ्रम नहीं, बल्कि जानबूझकर फैलाई जा रही गलत जानकारी है। जानकारों का मानना है कि इस तरह की कोशिशें अक्सर अपने देश के अंदर लोगों को गुमराह करने, असफल दावों को छिपाने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भ्रम फैलाने के लिए की जाती हैं। डिफेंस एक्सपर्ट मानते हैं कि हकीकत स्पष्ट है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पंजाब में भारतीय सैन्य ठिकानों पर किसी भी पाकिस्तानी हमले का कोई ठोस सबूत नहीं है। सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही यह नई कहानी झूठी तस्वीरों और पुराने प्रचार पर आधारित है, जो सच्चाई की कसौटी पर खरी नहीं उतरती।