ऑपरेशन सिंदूर में भारत की हवाई बढ़त पर अमेरिकी विशेषज्ञ की मुहर, पाकिस्तान के दावे झूठे निकले

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
ऑपरेशन सिंदूर में भारत की हवाई बढ़त पर अमेरिकी विशेषज्ञ की मुहर, पाकिस्तान के दावे झूठे निकले

सारांश

अमेरिकी अर्बन वॉरफेयर इंस्टीट्यूट के जॉन स्पेंसर ने एक स्विस सैन्य अध्ययन के हवाले से कहा है कि ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने 88 घंटे के भीतर पाकिस्तान पर हवाई बढ़त हासिल की और पाकिस्तान ने संघर्षविराम इसलिए स्वीकार किया क्योंकि वह लड़ाई जारी रखने में सक्षम नहीं था।

मुख्य बातें

जॉन स्पेंसर (अर्बन वॉरफेयर इंस्टीट्यूट, वॉशिंगटन) ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने हवाई बढ़त हासिल की।
भारत ने 7 मई से 10 मई 2025 तक 88 घंटे के अभियान में पाकिस्तान और पीओके के नौ आतंकी ठिकानों पर हमले किए।
स्विस संस्था सेंटर डी'हिस्टॉयर एट डी प्रॉस्पेक्टिव मिलिटेयर्स की 15 जनवरी की रिपोर्ट ने ऑपरेशनल डेटा के आधार पर भारत की सफलता की पुष्टि की।
पाकिस्तान ने शुरुआत में भारतीय विमानों के नुकसान के झूठे दावे किए, जो बाद में तथ्यों पर खरे नहीं उतरे।
स्पेंसर के अनुसार पाकिस्तान ने संघर्षविराम इसलिए स्वीकार किया क्योंकि वह आगे लड़ाई जारी रखने में सक्षम नहीं था ।

वॉशिंगटन स्थित अर्बन वॉरफेयर इंस्टीट्यूट के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर जॉन स्पेंसर ने कहा है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान वायुसेना के बड़ी सफलता के दावे तथ्यों पर खरे नहीं उतरते और भारत ने 7 मई से 10 मई 2025 तक चले 88 घंटे के हवाई अभियान में पाकिस्तान के बड़े हिस्से में हवाई बढ़त हासिल की। स्पेंसर ने अमेरिकी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म सबस्टैक पर लिखते हुए यह विश्लेषण प्रस्तुत किया, जो एक स्वतंत्र स्विस सैन्य अध्ययन पर आधारित है।

ऑपरेशन सिंदूर की पृष्ठभूमि

22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में पाकिस्तान समर्थित आतंकियों ने धर्म पूछकर 26 निर्दोष पर्यटकों की हत्या कर दी थी। इस दर्दनाक आतंकी हमले के जवाब में भारत ने 7 मई 2025 को ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया और पाकिस्तान तथा पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में नौ आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए। यह ऑपरेशन 10 मई 2025 तक जारी रहा।

पाकिस्तान के दावे और असल तस्वीर

स्पेंसर के अनुसार, भारत-पाकिस्तान टकराव में अक्सर यह देखा गया है कि पाकिस्तान शुरुआत में गलत या बढ़ा-चढ़ाकर दावे करके अंतरराष्ट्रीय मीडिया में अपनी कहानी स्थापित कर लेता है। 88 घंटे के हवाई अभियान की शुरुआत में कई पश्चिमी मीडिया रिपोर्टों में भारतीय विमानों के नुकसान पर ज़ोर दिया गया और पाकिस्तान वायुसेना की बड़ी सफलता का दावा किया गया। गौरतलब है कि बाद में यह कहानी तथ्यों पर खरी नहीं उतरी।

स्विस सैन्य अध्ययन की अहम बातें

स्पेंसर ने स्विट्जरलैंड के सेंटर डी'हिस्टॉयर एट डी प्रॉस्पेक्टिव मिलिटेयर्स की ओर से 15 जनवरी को जारी एक रिपोर्ट का हवाला दिया। इस अध्ययन को सैन्य इतिहासकार एड्रियन फोंटानेलज ने लिखा है और इसकी समीक्षा सेवानिवृत्त स्विस एयरफोर्स मेजर जनरल क्लॉड मायर के नेतृत्व वाले पैनल ने की है। रिपोर्ट में शुरुआती दावों की जगह ऑपरेशनल डेटा के आधार पर संघर्ष का विश्लेषण किया गया है, जिसमें स्पष्ट किया गया कि चार दिनों की लड़ाई की असल तस्वीर शुरुआती रिपोर्टों से काफी अलग थी।

भारत की रणनीतिक सफलता

रिपोर्ट के अनुसार, अभियान के अंत तक पाकिस्तान वायुसेना कमज़ोर पड़ गई, भारत ने पाकिस्तान के बड़े हिस्से में हवाई बढ़त हासिल कर ली और पाकिस्तान के अंदर गहराई तक सटीक हमले किए गए। स्पेंसर ने बताया कि यह परिणाम किसी एक हमले का नहीं, बल्कि एक सुनियोजित बहु-दिवसीय अभियान का नतीजा था, जिसमें पाकिस्तान की हवाई रक्षा प्रणाली को धीरे-धीरे कमज़ोर किया गया। इससे पाकिस्तान की निगरानी, समन्वय और जवाब देने की क्षमता प्रभावित हुई।

संघर्षविराम और आगे की बहस

स्पेंसर ने कहा कि यह विश्लेषण भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक तरह की पुष्टि देता है, जिसे भारत सरकार आमतौर पर खुलकर नहीं कहती। उनके अनुसार, ऑपरेशन के उद्देश्य पूरे ही नहीं, बल्कि संभवतः उम्मीद से ज़्यादा सफल रहे। स्पेंसर ने यह भी कहा कि यह बहस अभी जारी है कि क्या भारत को 88 घंटे के बाद अभियान आगे बढ़ाना चाहिए था, लेकिन यह स्पष्ट है कि पाकिस्तान ने संघर्षविराम इसलिए स्वीकार किया क्योंकि वह आगे लड़ाई जारी रखने की स्थिति में नहीं था। यह ऑपरेशन सिंदूर की दीर्घकालिक रणनीतिक विरासत को लेकर चल रही बहस का एक महत्वपूर्ण अध्याय बनता जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह ध्यान देना ज़रूरी है कि यह एक स्वतंत्र विशेषज्ञ की राय है, न कि किसी सरकारी या अंतरराष्ट्रीय संस्था की आधिकारिक जाँच। पाकिस्तान की सूचना युद्ध की रणनीति — जल्दी दावे करना, मीडिया में कहानी स्थापित करना — कोई नई बात नहीं है और यह 1999 के कारगिल संघर्ष से लेकर अब तक देखी जाती रही है। असली सवाल यह है कि भारत सरकार खुद इस सफलता का सार्वजनिक और सत्यापन-योग्य लेखा-जोखा कब प्रस्तुत करेगी — क्योंकि तीसरे पक्ष की पुष्टि, चाहे कितनी भी विश्वसनीय हो, आधिकारिक पारदर्शिता का विकल्प नहीं हो सकती।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ऑपरेशन सिंदूर क्या था और यह कब शुरू हुआ?
ऑपरेशन सिंदूर भारत का वह सैन्य अभियान था जो 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में 26 पर्यटकों की हत्या के जवाब में 7 मई 2025 को शुरू किया गया। इसमें पाकिस्तान और पीओके के नौ आतंकी ठिकानों पर सटीक हवाई हमले किए गए और यह अभियान 10 मई 2025 तक 88 घंटे चला।
जॉन स्पेंसर कौन हैं और उनका विश्लेषण क्यों अहम है?
जॉन स्पेंसर वॉशिंगटन स्थित अर्बन वॉरफेयर इंस्टीट्यूट के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर हैं। उन्होंने अमेरिकी प्लेटफॉर्म सबस्टैक पर लिखते हुए एक स्वतंत्र स्विस सैन्य अध्ययन के आधार पर ऑपरेशन सिंदूर का विश्लेषण किया और कहा कि भारत ने हवाई बढ़त हासिल की थी।
पाकिस्तान के किन दावों को झूठा बताया गया है?
पाकिस्तान ने ऑपरेशन सिंदूर के शुरुआती दिनों में भारतीय विमानों को गिराने और बड़ी सफलता हासिल करने के दावे किए थे। स्पेंसर और स्विस सैन्य अध्ययन के अनुसार, ये दावे ऑपरेशनल डेटा पर खरे नहीं उतरे और अंत में पाकिस्तान वायुसेना कमज़ोर पड़ गई।
स्विस सैन्य अध्ययन में क्या निष्कर्ष निकाले गए?
स्विट्जरलैंड के सेंटर डी'हिस्टॉयर एट डी प्रॉस्पेक्टिव मिलिटेयर्स द्वारा 15 जनवरी को जारी रिपोर्ट में कहा गया कि भारत ने पाकिस्तान के बड़े हिस्से में हवाई बढ़त हासिल की और पाकिस्तान की हवाई रक्षा प्रणाली धीरे-धीरे कमज़ोर हुई। इस अध्ययन की समीक्षा सेवानिवृत्त स्विस एयरफोर्स मेजर जनरल क्लॉड मायर के नेतृत्व वाले पैनल ने की।
पाकिस्तान ने संघर्षविराम क्यों स्वीकार किया?
जॉन स्पेंसर के अनुसार, पाकिस्तान ने संघर्षविराम इसलिए स्वीकार किया क्योंकि 88 घंटे के अभियान के बाद वह आगे लड़ाई जारी रखने की स्थिति में नहीं था। पाकिस्तान की निगरानी, समन्वय और जवाब देने की क्षमता इस अभियान में गंभीर रूप से प्रभावित हो चुकी थी।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 5 दिन पहले
  2. 6 दिन पहले
  3. 6 दिन पहले
  4. 1 सप्ताह पहले
  5. 1 सप्ताह पहले
  6. 4 महीने पहले
  7. 9 महीने पहले
  8. 10 महीने पहले