ऑपरेशन सिंदूर में भारत की हवाई बढ़त पर अमेरिकी विशेषज्ञ की मुहर, पाकिस्तान के दावे झूठे निकले
सारांश
मुख्य बातें
वॉशिंगटन स्थित अर्बन वॉरफेयर इंस्टीट्यूट के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर जॉन स्पेंसर ने कहा है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान वायुसेना के बड़ी सफलता के दावे तथ्यों पर खरे नहीं उतरते और भारत ने 7 मई से 10 मई 2025 तक चले 88 घंटे के हवाई अभियान में पाकिस्तान के बड़े हिस्से में हवाई बढ़त हासिल की। स्पेंसर ने अमेरिकी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म सबस्टैक पर लिखते हुए यह विश्लेषण प्रस्तुत किया, जो एक स्वतंत्र स्विस सैन्य अध्ययन पर आधारित है।
ऑपरेशन सिंदूर की पृष्ठभूमि
22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में पाकिस्तान समर्थित आतंकियों ने धर्म पूछकर 26 निर्दोष पर्यटकों की हत्या कर दी थी। इस दर्दनाक आतंकी हमले के जवाब में भारत ने 7 मई 2025 को ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया और पाकिस्तान तथा पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में नौ आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए। यह ऑपरेशन 10 मई 2025 तक जारी रहा।
पाकिस्तान के दावे और असल तस्वीर
स्पेंसर के अनुसार, भारत-पाकिस्तान टकराव में अक्सर यह देखा गया है कि पाकिस्तान शुरुआत में गलत या बढ़ा-चढ़ाकर दावे करके अंतरराष्ट्रीय मीडिया में अपनी कहानी स्थापित कर लेता है। 88 घंटे के हवाई अभियान की शुरुआत में कई पश्चिमी मीडिया रिपोर्टों में भारतीय विमानों के नुकसान पर ज़ोर दिया गया और पाकिस्तान वायुसेना की बड़ी सफलता का दावा किया गया। गौरतलब है कि बाद में यह कहानी तथ्यों पर खरी नहीं उतरी।
स्विस सैन्य अध्ययन की अहम बातें
स्पेंसर ने स्विट्जरलैंड के सेंटर डी'हिस्टॉयर एट डी प्रॉस्पेक्टिव मिलिटेयर्स की ओर से 15 जनवरी को जारी एक रिपोर्ट का हवाला दिया। इस अध्ययन को सैन्य इतिहासकार एड्रियन फोंटानेलज ने लिखा है और इसकी समीक्षा सेवानिवृत्त स्विस एयरफोर्स मेजर जनरल क्लॉड मायर के नेतृत्व वाले पैनल ने की है। रिपोर्ट में शुरुआती दावों की जगह ऑपरेशनल डेटा के आधार पर संघर्ष का विश्लेषण किया गया है, जिसमें स्पष्ट किया गया कि चार दिनों की लड़ाई की असल तस्वीर शुरुआती रिपोर्टों से काफी अलग थी।
भारत की रणनीतिक सफलता
रिपोर्ट के अनुसार, अभियान के अंत तक पाकिस्तान वायुसेना कमज़ोर पड़ गई, भारत ने पाकिस्तान के बड़े हिस्से में हवाई बढ़त हासिल कर ली और पाकिस्तान के अंदर गहराई तक सटीक हमले किए गए। स्पेंसर ने बताया कि यह परिणाम किसी एक हमले का नहीं, बल्कि एक सुनियोजित बहु-दिवसीय अभियान का नतीजा था, जिसमें पाकिस्तान की हवाई रक्षा प्रणाली को धीरे-धीरे कमज़ोर किया गया। इससे पाकिस्तान की निगरानी, समन्वय और जवाब देने की क्षमता प्रभावित हुई।
संघर्षविराम और आगे की बहस
स्पेंसर ने कहा कि यह विश्लेषण भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक तरह की पुष्टि देता है, जिसे भारत सरकार आमतौर पर खुलकर नहीं कहती। उनके अनुसार, ऑपरेशन के उद्देश्य पूरे ही नहीं, बल्कि संभवतः उम्मीद से ज़्यादा सफल रहे। स्पेंसर ने यह भी कहा कि यह बहस अभी जारी है कि क्या भारत को 88 घंटे के बाद अभियान आगे बढ़ाना चाहिए था, लेकिन यह स्पष्ट है कि पाकिस्तान ने संघर्षविराम इसलिए स्वीकार किया क्योंकि वह आगे लड़ाई जारी रखने की स्थिति में नहीं था। यह ऑपरेशन सिंदूर की दीर्घकालिक रणनीतिक विरासत को लेकर चल रही बहस का एक महत्वपूर्ण अध्याय बनता जा रहा है।