दानिश अंसारी का अखिलेश पर हमला: सपा-कांग्रेस गठबंधन निजी स्वार्थ की राजनीति, 2027 में हार तय
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के अल्पसंख्यक कल्याण राज्य मंत्री दानिश अंसारी ने 2 सितंबर 2026 को लखनऊ में समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला। उन्होंने सपा-कांग्रेस गठबंधन को अवसरवादी करार देते हुए कहा कि यह गठजोड़ प्रदेश के विकास के लिए नहीं, बल्कि निजी राजनीतिक हितों के लिए है। मंत्री ने एसआईआर विवाद, सपा के चुनाव अभियान और देश की जीडीपी वृद्धि पर अखिलेश यादव के बयानों का भी खंडन किया।
गठबंधन पर सवाल
मंत्री अंसारी ने कहा, सपा और कांग्रेस एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाती रहती हैं, लेकिन जैसे ही सत्ता की संभावना दिखती है, दोनों एक हो जाती हैं। उन्होंने कहा कि सपा को पहले यह स्पष्ट करना चाहिए कि वह कांग्रेस के साथ है या उसके विरुद्ध। उनके अनुसार, यह एकजुटता प्रदेश के विकास की मंशा से नहीं, बल्कि निजी राजनीतिक एजेंडे को पूरा करने के लिए है।
जनता को गुमराह करने का आरोप
अंसारी ने आगे कहा कि सपा का असली चेहरा जनता जानती है और वह उनकी चालों से गुमराह नहीं होगी। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस तरह सपा ने आम गरीबों के साथ दिखावा किया, उसी तरह कांग्रेस के साथ उनकी एकजुटता भी महज दिखावा है। उनका कहना था कि इस गठबंधन के पीछे का मकसद प्रदेश का विकास कतई नहीं है।
2027 विधानसभा चुनाव पर मंत्री का दावा
आगामी 2027 उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर मंत्री अंसारी ने कहा कि सपा अभी से अपनी हार की ज़मीन तैयार कर रही है। उन्होंने कहा कि यही रणनीति बिहार और पश्चिम बंगाल में भी अपनाई गई थी और जनता अब सपा पर भरोसा नहीं करती। उनके अनुसार, 2012 से 2017 के सपा शासनकाल में जनता के हितों की बजाय सत्ता का दुरुपयोग किया गया, जिसकी सज़ा जनता ने 2017 में सत्ता से बेदखल करके दी।
जीडीपी वृद्धि पर PM मोदी की तारीफ
वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रहने पर मंत्री अंसारी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना की। उन्होंने कहा कि 2014 के बाद से मोदी ने पूरी ईमानदारी के साथ देश को विकास के पथ पर अग्रसर किया है। उन्होंने उद्योगों को प्रोत्साहन, युवाओं के उत्थान और किसानों के हित में किए गए कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि मोदी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत की साख बढ़ाई है।
राजनीतिक संदर्भ
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव करीब आते ही राजनीतिक बयानबाज़ी तेज़ हो गई है। सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) और विपक्षी सपा-कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का यह दौर आने वाले महीनों में और तीखा होने की संभावना है।