सपा-कांग्रेस गठबंधन स्वार्थ और अवसरवाद की नींव पर: भूपेंद्र चौधरी का तीखा हमला
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री भूपेंद्र सिंह चौधरी ने 22 जून 2026 को लखनऊ में समाजवादी पार्टी (सपा) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के गठबंधन पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि यह राजनीतिक साझेदारी विशुद्ध रूप से स्वार्थ और अवसरवाद पर टिकी है, जिसमें राज्य या देश के विकास का कोई ठोस एजेंडा नहीं है। उनके अनुसार, दोनों दलों की प्राथमिकता सदैव पार्टी और परिवार के हित रहे हैं, न कि आम जनता के।
गठबंधन पर मंत्री की मुख्य आपत्तियाँ
चौधरी ने कहा, 'इतिहास को देखें तो कांग्रेस और समाजवादी पार्टी, दोनों ने अपनी सुविधा के अनुसार बार-बार गठबंधन बदले हैं। उनकी प्राथमिकता हमेशा अपनी पार्टी और परिवार के हित रहे हैं, न कि समाज, राज्य या देश के हित।' उन्होंने यह भी कहा कि अखिलेश यादव के बयान को गंभीरता से लिया जाना चाहिए और कांग्रेस को भी उनके संदेश पर संज्ञान लेना चाहिए।
2012–2017 की कानून-व्यवस्था पर निशाना
उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था के सवाल पर चौधरी ने कहा कि 2012 से 2017 के बीच सपा शासनकाल में राज्य में अराजकता का माहौल था। उन्होंने दावा किया कि उस दौर में दंगाई और माफियाओं का बोलबाला था और अपराधी पुलिस पर हमला करते थे। उनके अनुसार, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार के सत्ता में आने के बाद अपराधी या तो जेल में हैं, राज्य छोड़ चुके हैं, या निष्क्रिय हो गए हैं।
श्मशान-कब्रिस्तान विवाद और भेदभाव का आरोप
चौधरी ने आरोप लगाया कि सपा सरकारों के दौरान योजनाएँ केवल वोटबैंक को ध्यान में रखकर बनाई जाती थीं। उन्होंने कहा कि उस समय कब्रिस्तानों की चारदीवारी बनवाई जाती थी, जबकि श्मशान घाटों को नजरअंदाज किया जाता था। उन्होंने दावा किया कि योगी सरकार ने बिना किसी भेदभाव के श्मशान घाटों का जीर्णोद्धार कराया।
एसआईटी जाँच और सनातन धर्म पर टिप्पणी
एसआईटी जाँच पर अखिलेश यादव की टिप्पणी के जवाब में चौधरी ने कहा कि सपा ने कभी मस्जिद-दरगाहों का हिसाब नहीं माँगा और उनका एजेंडा सनातन धर्म व हिंदू आस्था को अपमानित करने का रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूरे मामले पर संज्ञान लेते हुए एसआईटी गठित की है और जिसके विरुद्ध भी रिपोर्ट आएगी, सरकार उसके खिलाफ कार्रवाई करेगी।
महाराष्ट्र और 'विकसित भारत' के संदर्भ में NDA का स्वागत
महाराष्ट्र के राजनीतिक घटनाक्रम पर चौधरी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों के विकास कार्यों और 'विकसित भारत' के विजन ने अन्य दलों के नेताओं को भी NDA से जुड़ने के लिए प्रेरित किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो भी नेता मोदी के नेतृत्व में काम करना चाहते हैं और NDA के विकास एजेंडे में योगदान देना चाहते हैं, उनका स्वागत है — चाहे वे पश्चिम बंगाल से हों, महाराष्ट्र से हों या किसी अन्य राज्य से।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारियाँ जोर पकड़ रही हैं और सपा-कांग्रेस गठबंधन की रणनीति को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज है।