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1984 सिख नरसंहार पर AAP कर रही है राजनीति, भाजपा नेता एचएस फूलका का गंभीर आरोप

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1984 सिख नरसंहार पर AAP कर रही है राजनीति, भाजपा नेता एचएस फूलका का गंभीर आरोप

सारांश

भाजपा नेता एचएस फूलका ने AAP पर 1984 के सिख नरसंहार पीड़ितों के दर्द को चुनावी हथियार बनाने का आरोप लगाया। सज्जन कुमार की शोक सभा में AAP विधायक की मौजूदगी और दिल्ली में ₹5 लाख मुआवजे में हुई देरी को उन्होंने राजनीतिक पाखंड का प्रमाण बताया।

मुख्य बातें

भाजपा नेता एचएस फूलका ने 2 सितंबर को चंडीगढ़ में AAP पर 1984 सिख नरसंहार पीड़ितों के साथ राजनीति करने का आरोप लगाया।
AAP विधायक राम सिंह नेताजी की सज्जन कुमार की शोक सभा में भागीदारी पर फूलका ने सवाल उठाए।
2014 में केंद्र द्वारा घोषित ₹5 लाख प्रति पीड़ित परिवार का मुआवजा दिल्ली में AAP सरकार के दौरान अटका रहा।
फूलका के अनुसार उन्हें बताया गया कि मुआवजा पंजाब चुनावों के करीब दिया जाएगा — जिसके विरोध में उन्होंने सितंबर 2015 में पद छोड़ा।
मुआवजा अंततः 1 नवंबर 2015 को तिलक विहार में वितरित किया गया।
फूलका ने कहा कि वाजपेयी और मोदी सरकारों में ही नरसंहार के दोषियों को सज़ा मिली है।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता एचएस फूलका ने बुधवार, 2 सितंबर को चंडीगढ़ में आम आदमी पार्टी (AAP) पर कड़ा हमला बोला और आरोप लगाया कि भगवंत मान की सरकार 1984 के सिख नरसंहार के पीड़ितों के दर्द को न्याय दिलाने की बजाय चुनावी फायदे के लिए भुना रही है। फूलका ने मीडिया से बातचीत में कहा कि AAP का यह रवैया राजनीतिक पाखंड की मिसाल है।

मुख्य आरोप: सज्जन कुमार की शोक सभा में AAP विधायक की मौजूदगी

फूलका ने विशेष रूप से 1984 के नरसंहार में दोषी ठहराए गए सज्जन कुमार के लिए आयोजित शोक सभा में AAP विधायक राम सिंह नेताजी की भागीदारी पर सवाल उठाया। उन्होंने तीखे शब्दों में पूछा, "जो लोग वास्तव में पीड़ितों के साथ खड़े हैं, वे एक ही समय में उनके विरुद्ध अपराधों में दोषी ठहराए गए लोगों के साथ एकजुटता कैसे व्यक्त कर सकते हैं?" उनका यह बयान AAP की नीयत पर सीधा प्रश्नचिह्न लगाता है।

मुआवजे में देरी का इतिहास

2014 में नरेंद्र मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद तत्कालीन केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने नरसंहार के प्रत्येक पीड़ित परिवार को ₹5 लाख के अतिरिक्त मुआवजे की घोषणा की थी। केंद्र ने राज्यों को जल्द से जल्द वितरण का निर्देश दिया, क्योंकि पीड़ित लगभग 30 वर्षों से इंतजार कर रहे थे। अन्य राज्यों में वितरण हो गया, किंतु दिल्ली में AAP सरकार के कार्यकाल में यह प्रक्रिया अटकी रही।

फूलका ने दावा किया, "मैंने AAP सरकार से बार-बार मुआवजा वितरित करने का अनुरोध किया। केंद्र सरकार ने राशि पहले ही स्वीकृत कर दी थी, लेकिन मुझे बताया गया कि इसे तुरंत देने का कोई मतलब नहीं है और इसे पंजाब चुनावों के करीब दिया जा सकता है।" इस देरी के विरोध में उन्होंने सितंबर 2015 में पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया था।

अंततः 1 नवंबर 2015 को दिल्ली सरकार ने तिलक विहार में एक कार्यक्रम के ज़रिए यह अतिरिक्त मुआवजा वितरित किया।

भाजपा से चार दशक पुराना जुड़ाव

फूलका ने स्पष्ट किया कि 1984 के पीड़ितों के न्याय के मुद्दे पर भाजपा के साथ उनका संबंध लगभग चार दशक पुराना है। उन्होंने याद दिलाया कि मदन लाल खुराना के दिल्ली के मुख्यमंत्री कार्यकाल में वे उनके सलाहकार रहे, और वरिष्ठ नेताओं अरुण जेटलीरवि शंकर प्रसाद सहित भाजपा के वकीलों ने नरसंहार से जुड़े मामलों में पैरवी की थी।

न्याय और सज़ा का रिकॉर्ड

फूलका ने यह भी रेखांकित किया कि अटल बिहारी वाजपेयी के प्रधानमंत्री कार्यकाल और अब नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में ही नरसंहार के दोषियों को सज़ा मिली है। उन्होंने कहा कि पीड़ित पहले ही 30 साल इंतजार कर चुके थे और उनकी पीड़ा को कभी भी चुनावी समीकरणों के नज़रिए से नहीं देखा जाना चाहिए था। यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब पंजाब में AAP सरकार और विपक्षी दल दोनों ही सिख समुदाय की भावनाओं को साधने की कोशिश में लगे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन उनके पास तथ्यात्मक आधार है — दिल्ली में मुआवजे की देरी और AAP विधायक की सज्जन कुमार की शोक सभा में उपस्थिति दोनों दर्ज घटनाएँ हैं। असली सवाल यह है कि 1984 का न्याय किसी एक दल की विरासत नहीं है — दशकों तक हर सत्तारूढ़ दल ने इसे भुनाया है। फूलका खुद AAP से भाजपा की यात्रा कर चुके हैं, जो उनकी आलोचना को नैतिक रूप से जटिल बनाता है। पीड़ितों के लिए असली जवाबदेही तब होगी जब न्याय को चुनावी कैलेंडर से नहीं, बल्कि अदालती प्रक्रिया की गति से मापा जाए।
RashtraPress
2 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एचएस फूलका ने AAP पर क्या आरोप लगाए हैं?
भाजपा नेता एचएस फूलका ने आरोप लगाया है कि AAP 1984 के सिख नरसंहार के पीड़ितों के दर्द को वास्तविक न्याय दिलाने की बजाय चुनावी लाभ के लिए इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने AAP विधायक राम सिंह नेताजी की दोषी सज्जन कुमार की शोक सभा में भागीदारी को राजनीतिक पाखंड का उदाहरण बताया।
1984 नरसंहार पीड़ितों के मुआवजे में देरी क्यों हुई?
2014 में केंद्र सरकार ने प्रत्येक पीड़ित परिवार को ₹5 लाख अतिरिक्त मुआवजे की घोषणा की थी। फूलका के अनुसार दिल्ली में AAP सरकार ने इसे तुरंत वितरित नहीं किया और उन्हें बताया गया कि इसे पंजाब चुनावों के करीब दिया जाएगा। अंततः 1 नवंबर 2015 को तिलक विहार में यह मुआवजा वितरित हुआ।
सज्जन कुमार कौन हैं और उनका 1984 से क्या संबंध है?
सज्जन कुमार कांग्रेस के पूर्व नेता हैं जिन्हें 1984 के सिख विरोधी नरसंहार में भूमिका के लिए दोषी ठहराया गया है। उनकी शोक सभा में AAP विधायक की उपस्थिति को फूलका ने पीड़ितों के प्रति विश्वासघात बताया।
फूलका का भाजपा और 1984 के न्याय से क्या संबंध है?
फूलका के अनुसार 1984 के पीड़ितों के न्याय के मुद्दे पर भाजपा के साथ उनका जुड़ाव लगभग चार दशक पुराना है। मदन लाल खुराना के दिल्ली मुख्यमंत्री कार्यकाल में वे उनके सलाहकार रहे और अरुण जेटली व रवि शंकर प्रसाद जैसे भाजपा नेताओं ने नरसंहार के मामलों में पैरवी की थी।
1984 नरसंहार के दोषियों को सज़ा कब और कैसे मिली?
फूलका ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी और नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री कार्यकाल में ही नरसंहार के लिए जिम्मेदार लोगों को सज़ा मिली है। सज्जन कुमार को अदालत ने दोषी ठहराया, जो इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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