1984 सिख नरसंहार पर AAP कर रही है राजनीति, भाजपा नेता एचएस फूलका का गंभीर आरोप
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता एचएस फूलका ने बुधवार, 2 सितंबर को चंडीगढ़ में आम आदमी पार्टी (AAP) पर कड़ा हमला बोला और आरोप लगाया कि भगवंत मान की सरकार 1984 के सिख नरसंहार के पीड़ितों के दर्द को न्याय दिलाने की बजाय चुनावी फायदे के लिए भुना रही है। फूलका ने मीडिया से बातचीत में कहा कि AAP का यह रवैया राजनीतिक पाखंड की मिसाल है।
मुख्य आरोप: सज्जन कुमार की शोक सभा में AAP विधायक की मौजूदगी
फूलका ने विशेष रूप से 1984 के नरसंहार में दोषी ठहराए गए सज्जन कुमार के लिए आयोजित शोक सभा में AAP विधायक राम सिंह नेताजी की भागीदारी पर सवाल उठाया। उन्होंने तीखे शब्दों में पूछा, "जो लोग वास्तव में पीड़ितों के साथ खड़े हैं, वे एक ही समय में उनके विरुद्ध अपराधों में दोषी ठहराए गए लोगों के साथ एकजुटता कैसे व्यक्त कर सकते हैं?" उनका यह बयान AAP की नीयत पर सीधा प्रश्नचिह्न लगाता है।
मुआवजे में देरी का इतिहास
2014 में नरेंद्र मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद तत्कालीन केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने नरसंहार के प्रत्येक पीड़ित परिवार को ₹5 लाख के अतिरिक्त मुआवजे की घोषणा की थी। केंद्र ने राज्यों को जल्द से जल्द वितरण का निर्देश दिया, क्योंकि पीड़ित लगभग 30 वर्षों से इंतजार कर रहे थे। अन्य राज्यों में वितरण हो गया, किंतु दिल्ली में AAP सरकार के कार्यकाल में यह प्रक्रिया अटकी रही।
फूलका ने दावा किया, "मैंने AAP सरकार से बार-बार मुआवजा वितरित करने का अनुरोध किया। केंद्र सरकार ने राशि पहले ही स्वीकृत कर दी थी, लेकिन मुझे बताया गया कि इसे तुरंत देने का कोई मतलब नहीं है और इसे पंजाब चुनावों के करीब दिया जा सकता है।" इस देरी के विरोध में उन्होंने सितंबर 2015 में पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया था।
अंततः 1 नवंबर 2015 को दिल्ली सरकार ने तिलक विहार में एक कार्यक्रम के ज़रिए यह अतिरिक्त मुआवजा वितरित किया।
भाजपा से चार दशक पुराना जुड़ाव
फूलका ने स्पष्ट किया कि 1984 के पीड़ितों के न्याय के मुद्दे पर भाजपा के साथ उनका संबंध लगभग चार दशक पुराना है। उन्होंने याद दिलाया कि मदन लाल खुराना के दिल्ली के मुख्यमंत्री कार्यकाल में वे उनके सलाहकार रहे, और वरिष्ठ नेताओं अरुण जेटली व रवि शंकर प्रसाद सहित भाजपा के वकीलों ने नरसंहार से जुड़े मामलों में पैरवी की थी।
न्याय और सज़ा का रिकॉर्ड
फूलका ने यह भी रेखांकित किया कि अटल बिहारी वाजपेयी के प्रधानमंत्री कार्यकाल और अब नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में ही नरसंहार के दोषियों को सज़ा मिली है। उन्होंने कहा कि पीड़ित पहले ही 30 साल इंतजार कर चुके थे और उनकी पीड़ा को कभी भी चुनावी समीकरणों के नज़रिए से नहीं देखा जाना चाहिए था। यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब पंजाब में AAP सरकार और विपक्षी दल दोनों ही सिख समुदाय की भावनाओं को साधने की कोशिश में लगे हैं।